मेष आदि 12 राशियों का विस्तृत परिचय

Sooraj Krishna Shastri
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मेष आदि 12 राशियों का विस्तृत परिचय 

 यहां पर मैं प्रत्येक राशि का वर्णन मूल संस्कृत श्लोक, उसका संस्कृत में पदविभाजन, हिन्दी अनुवाद, और फिर एक संक्षिप्त सारणीबद्ध गुणस्वरूप के रूप में क्रमशः प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह प्रस्तुति विशेष रूप से शास्त्रीय, व्यवस्थित, तथा शिक्षणोपयोगी होगी।

मेष आदि 12 राशियों का विस्तृत परिचय
मेष आदि 12 राशियों का विस्तृत परिचय 



🔯 1. मेष राशि (Aries)

🔸 मूल श्लोक (बृहत्‌जातक/बृ.य.जातक)

रक्तवर्णो बृहद्गात्रश्चतुष्पाद्रात्रि विक्रमी ।
पूर्ववासी नृपज्ञातिः शैलचारी रजोगुणी ।
पृष्ठोदयी पावकी च मेषराशिः कुजाधिपः ॥

🔹 पदविभाजन:

  • रक्तवर्णः = लाल रंग का
  • बृहद्गात्रः = विशाल शरीर वाला
  • चतुष्पाद् = चौपाया
  • रात्रिविक्रमः = रात्रिबली
  • पूर्ववासी = पूर्व दिशा में स्थित
  • नृपज्ञातिः = राजा जाति (क्षत्रिय)
  • शैलचारी = पर्वतीय
  • रजोगुणी = रजोगुणप्रधान
  • पृष्ठोदयी = पीछे से उदित होने वाली राशि
  • पावकी = अग्नितत्त्व प्रधान
  • कुजाधिपः = स्वामी मंगल

🔹 हिन्दी अनुवाद:

मेष राशि लाल वर्ण की, विशाल शरीर वाली, चौपाया स्वरूपधारी है। यह रात्रि में बलशाली मानी जाती है। इसका निवास पूर्व दिशा में है। यह क्षत्रिय जाति की मानी जाती है और पर्वतों में विचरण करने वाली है। इसमें रजोगुण की प्रधानता है, यह पृष्ठोदयी (पीछे से उदित) है, अग्नितत्त्व की है और इसका स्वामी मंगल ग्रह है।

🔸 सारणीबद्ध स्वरूप:

गुण विवरण
वर्ण रक्त (लाल)
स्वरूप चतुष्पद (चौपाया)
स्वामी मंगल
तत्व अग्नि
गुण रजोगुण
दिशा पूर्व
वर्ण वर्ग क्षत्रिय
स्थान पर्वत
बल रात्रिबली
उदय पृष्ठोदयी

🔯 2. वृष राशि (Taurus)

🔸 मूल श्लोक

श्वेतः शुक्राधिपो दीर्घश्चतुष्पाच्छवरीबली ।
याम्यस्थो ग्राम्यवणिग्भूमिरजोऽयं पृष्ठोदयी वृषः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

वृष राशि श्वेतवर्ण वाली, दीर्घ (लंबे शरीर वाली), चतुष्पद (पशु समान) है। रात्रि में बलवान मानी जाती है। यह दक्षिण दिशा में स्थित, ग्रामवासी, वैश्य जाति, भूमिचारी, रजोगुणी और पृष्ठोदयी स्वरूपधारी है। इसका स्वामी शुक्र ग्रह है।

गुण विवरण
वर्ण श्वेत
स्वरूप चतुष्पद
स्वामी शुक्र
तत्व पृथ्वी
गुण रजोगुण
दिशा दक्षिण
वर्ण वर्ग वैश्य
स्थान ग्राम्य
बल रात्रिबली
उदय पृष्ठोदयी

🔯 3. मिथुन राशि (Gemini)

🔸 मूल श्लोक

शीर्षोदयी नृमिथुनं सगदं च सवीणकम्‌।
प्रत्यक्स्वामिद्विपादं रात्रिबली ग्राम्यव्रजोष्णिली ॥
समगात्रो हरिद्वर्णो मिथुनाख्यो बुधाधिपः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

मिथुन राशि एक नर-नारी के रूप में है, नर के हाथ में गदा और स्त्री के हाथ में वीणा होती है। यह शीर्षोदयी है, पश्चिम दिशा की स्वामी, द्विपद (मनुष्य), रात्रिबली, ग्रामवासी, वायु तत्त्व, समगात्र (समदर्शी अंगों वाली), हरितवर्ण (हरा) तथा बुध इसकी अधिपति है।

गुण विवरण
वर्ण हरा
स्वरूप द्विपद (नर-नारी)
स्वामी बुध
तत्व वायु
गुण रजोगुण
दिशा पश्चिम
वर्ण वर्ग नृ (मनुष्य)
स्थान ग्राम्य
बल रात्रिबली
उदय शीर्षोदयी

🔯 4. कर्क राशि (Cancer)

🔸 मूल श्लोक

पाटलो वनचारी च ब्राह्मणो निशिवीर्यवान्‌ ।
बहुपटुतरः स्थौल्यतनुः सत्त्वगुणी जली ।
पृष्ठोदयी कर्कराशिर्मृगांकाधिपतिः स्मृतः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

कर्क राशि पाटल (गुलाबी) वर्ण की है, वनवासी, ब्राह्मणवर्ण, रात्रिबली, चतुर, स्थूल शरीर, सत्त्वगुणी, जलतत्त्व प्रधान, पृष्ठोदयी है और इसका स्वामी चन्द्रमा है।

गुण विवरण
वर्ण पाटल (गुलाबी)
स्वरूप चतुष्पद
स्वामी चन्द्र
तत्व जल
गुण सत्त्व
दिशा उत्तर
वर्ण वर्ग ब्राह्मण
स्थान वनचारी
बल रात्रिबली
उदय पृष्ठोदयी

आइए अब हम सिंह राशि से लेकर मीन राशि तक शेष सभी राशियों का भी उसी शैली में —
(१) श्लोक,
(२) पदविभाजन,
(३) भावार्थ (हिन्दी अनुवाद),
(४) सारणीबद्ध गुणधर्म सहित क्रमशः विस्तृत अध्ययन करें।


🔯 5. सिंह राशि (Leo)

🔸 मूल श्लोक

सिंहः सूर्याधिपः सत्त्वी चतुष्पात्क्षत्रियो बली ।
शीर्षोदयी बृहद्गात्रः पाण्डु पूर्वेड्द्युवीर्यवान्‌ ॥

🔹 पदविभाजन:

  • सिंहः = सिंह राशि
  • सूर्याधिपः = सूर्य इसका स्वामी
  • सत्त्वी = सत्त्वगुणप्रधान
  • चतुष्पात् = चतुष्पद (चौपाया)
  • क्षत्रियः = क्षत्रियवर्ण
  • बली = बलशाली
  • शीर्षोदयी = पूर्वोदय (शीर्ष से उदय)
  • बृहद्गात्रः = विशाल शरीर वाला
  • पाण्डुः = हल्का पीला वर्ण
  • पूर्वे = पूर्व दिशा का
  • द्युवीर्यवान् = दिन में बलशाली

🔹 हिन्दी अनुवाद:

सिंह राशि सूर्य स्वामी वाली, सत्त्वगुण प्रधान, चतुष्पद, क्षत्रियवर्ण, शीर्षोदयी, विशाल शरीर वाली, हल्के पीले रंग की, पूर्व दिशा की अधिष्ठात्री, और दिन में बलवान होती है।

🔸 सारणीबद्ध गुणधर्म:

गुण विवरण
वर्ण पाण्डु (हल्का पीला)
स्वरूप चतुष्पद
स्वामी सूर्य
तत्व अग्नि
गुण सत्त्व
दिशा पूर्व
वर्ण वर्ग क्षत्रिय
स्थान वनचारी
बल दिनबली
उदय शीर्षोदयी

🔯 6. कन्या राशि (Virgo)

🔸 मूल श्लोक

पार्वतीयोऽथ कन्याख्यो राशिर्दिनबलान्वितः।
शीर्षोदयी च मध्यमांगो द्विपाद याम्य चरः स्मृतः ॥
सस्यदहना वैश्या चित्रवर्णा प्रभंजिनी।
कुमारी तमसा युक्ता बालभावा बुधाधिपः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

कन्या राशि एक युवती के रूप में चित्रित की जाती है। यह चित्रवर्णा (रंग-बिरंगी), अन्न और अग्नि के समीप बैठी हुई, तमोगुण से युक्त, बालभाव वाली, वैश्या वर्ण, दिन में बलवान, दक्षिण दिशा की, वायुगुण वाली, मध्यम शरीर की, द्विपद (मनुष्य) स्वरूप, शीर्षोदयी है। इसका स्वामी बुध है।

गुण विवरण
स्वरूप कन्या (स्त्री)
स्वामी बुध
वर्ण चित्रवर्णा
तत्व पृथ्वी
गुण तमोगुण
दिशा दक्षिण
वर्ण वर्ग वैश्या
स्थान पर्वतीय / ग्राम्य
बल दिनबली
उदय शीर्षोदयी

🔯 7. तुला राशि (Libra)

🔸 मूल श्लोक

शीर्षोदयी द्युवीर्याद्या तुला शूद्रो रजोगुणी।
पश्चिमस्थो भूचरः शुक्राधिपो मध्यतनुर्द्विपात्‌ ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

तुला राशि शीर्षोदयी, दिनबली, शूद्रवर्ण की मानी जाती है। यह रजोगुणी, पश्चिम दिशा में स्थित, भूमि पर चलने वाली, शुक्र की अधिष्ठात्री, मध्यम शरीर वाली, द्विपद (मनुष्य) राशि है।

गुण विवरण
वर्ण श्याम/गौर वर्ण
स्वरूप द्विपद
स्वामी शुक्र
तत्व वायु
गुण रजोगुण
दिशा पश्चिम
वर्ण वर्ग शूद्र
स्थान ग्राम्य/भूमि पर
बल दिनबली
उदय शीर्षोदयी

🔯 8. वृश्चिक राशि (Scorpio)

🔸 मूल श्लोक

शीर्षोदयोऽल्पगात्रो बहुपादो ब्राह्मणो बली ।
सौम्यस्थो दिनवीर्याद्यः पिशंगो जलभूचरः ॥
रोमस्वाढ्योऽतितीक्ष्णांगो वृश्चिकश्च कुजाधिपः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

वृश्चिक राशि शीर्षोदयी, छोटा शरीर, अनेकों पैरों वाली, ब्राह्मणवर्ण की, दिनबली, पिशंगवर्ण (हल्के पीले-भूरे), जल और स्थल दोनों में चलने वाली, रोमयुक्त तथा तीखे अंगों (डंक) वाली राशि है। इसका स्वामी मंगल है।

गुण विवरण
वर्ण पिशंग (भूरा)
स्वरूप बहुपद (बिच्छू रूप)
स्वामी मंगल
तत्व जल
गुण रजोगुण / तम
दिशा उत्तर
वर्ण वर्ग ब्राह्मण
स्थान बिल आदि
बल दिनबली
उदय शीर्षोदयी

🔯 9. धनु राशि (Sagittarius)

🔸 मूल श्लोक

पृष्ठोदयी ऐश्वर्यघोष्ठ गुर्वीशः सात्तिको धनुः।
पिंगलो निशिवीर्याद्यः पावकः क्षत्रियो द्विपात्‌ ॥
आदावन्ते चतुष्पादः समगात्रो धनुर्धरः ॥
पूर्वस्थो वसुधाचारी तेजस्वी ब्रह्मणा कृतः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

धनु राशि गुरु की राशि है, पिंगलवर्ण (गहरा पीला), रात्रिबली, अग्नितत्त्व, क्षत्रियवर्ण, प्रारंभ में द्विपद (मानव), अंत में चतुष्पद (घोड़े का भाग), धनुर्धर, तेजस्वी, पृथ्वी पर विचरने वाली, ब्रह्मा द्वारा प्रतिष्ठित राशि है। सात्त्विक गुण प्रधान है।

गुण विवरण
वर्ण पिंगल (गहरा पीला)
स्वरूप आधा मानव, आधा अश्व
स्वामी गुरु
तत्व अग्नि
गुण सत्त्व
दिशा पूर्व
वर्ण वर्ग क्षत्रिय
स्थान स्थलचारी
बल रात्रिबली
उदय पृष्ठोदयी

🔯 10. मकर राशि (Capricorn)

🔸 मूल श्लोक

मन्दाधिपस्तमी भौमी याम्यस्थो निशिवीर्यवान्‌ ।
पृष्ठोदयी बृहद्गात्रो मकरो जलेभूचरः ॥
आदौ चतुष्पदोऽन्ते तु विषपदो जलगो मतः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

मकर राशि शनिग्रही, तमोगुण प्रधान, दक्षिण दिशा में स्थित, रात्रिबली, पृष्ठोदयी, बड़ा शरीर, जल व भूमि में चलने वाली, प्रारंभ में चौपाया, अंत में जलचर (मकररूप) विषपद (डंकधारी) है।

गुण विवरण
वर्ण नील/श्याम
स्वरूप मकर (मिथुन पशुजलचर)
स्वामी शनि
तत्व पृथ्वी + जल
गुण तमोगुण
दिशा दक्षिण
स्थान जल + भूमि
बल रात्रिबली
उदय पृष्ठोदयी

🔯 11. कुम्भ राशि (Aquarius)

🔸 मूल श्लोक

कुम्भः कुम्भी नरो बभ्रुवर्णो मध्यतनु द्विपात्‌।
द्युवीर्यो जलमध्यस्थो वातश्च शीर्षोदयी तमः ॥
शूद्रः पश्चिमदेशस्य स्वामी दैवाकरिः स्मृतः ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

कुम्भ राशि हाथ में घट लिए पुरुष की आकृति, बभ्रुवर्ण (भूरा), मध्यम शरीर, द्विपद, दिनबली, जलस्थ (जल के पास), वायुतत्त्व, शीर्षोदयी, तमोगुणी, पश्चिम दिशा की स्वामी, और शनि की राशि है।

गुण विवरण
वर्ण बभ्रु (भूरा)
स्वरूप मानव
स्वामी शनि
तत्व वायु
गुण तम
दिशा पश्चिम
स्थान जलसमीपस्थ
बल दिनबली
उदय शीर्षोदयी

🔯 12. मीन राशि (Pisces)

🔸 मूल श्लोक

मीनौ पुच्छास्य संलग्नौ मीनराशिर्दिवाबली ॥
जली सत्त्वगुणाद्यश्च स्वस्थो जलचरो द्विजः ।
अपदो मध्यदेही च सौम्यस्थो ह्युभयोदयी ॥

🔹 हिन्दी अनुवाद:

मीन राशि दो मछलियाँ पूँछ और मुख से जुड़ी हुई, जलचर, सत्त्वगुणी, स्वस्थ, पैर रहित, मध्यम शरीर वाली, ब्राह्मण वर्ण, दिनबली, उत्तर दिशा की, उभयोदयी (दोनों समयों में उदित) तथा गुरु की राशि है।

गुण विवरण
वर्ण नील
स्वरूप मीन (दो मछलियाँ)
स्वामी गुरु
तत्व जल
गुण सत्त्व
दिशा उत्तर
वर्ण वर्ग ब्राह्मण
स्थान जल
बल दिनबली
उदय उभयोदयी

✨ समापन श्लोक:

सुराचार्याधिपश्चास्य राशीनां गदिता गुणाः ।
बृंहद्भागात्मकानां च स्थूलसूक्ष्मफलाय च ॥
दिवा शीर्षोदया ज्ञेया सन्ध्यायां उभयोदयाः ।
रात्रौ पृष्ठोदया राशयः बलाधिक्या उदीरिताः ॥

📌 अर्थ:
राशियों के ये स्वरूप, गुण, तथा विशेषताएँ देवाचार्यों ने स्थूल और सूक्ष्म फल कथन हेतु बताए हैं।

  • शीर्षोदयी राशियाँ दिन में बलवान होती हैं,
  • उभयोदयी संध्या में,
  • और पृष्ठोदयी रात में अधिक प्रभावी मानी जाती हैं।

आपने यहाँ पर बारह राशियों के स्वरूप, गुणधर्म, दिशा, वर्ण, गुण, प्रकृति, स्वामी तथा उदय के प्रकार का एक अत्यंत समृद्ध, शास्त्रीय और वर्णनात्मक विवरण प्रस्तुत किया है। यह विवरण ज्योतिषशास्त्र के मूल स्रोतों—बृहत्‌जातक, वृहद्यवनजातक, पाराशरी ज्योतिष आदि—से लिया गया प्रतीत होता है, और यह “राशि-स्वरूप” के संदर्भ में गहन अध्ययन का आधार बन सकता है।

यहाँ मैं इस प्रस्तुत सामग्री को एक व्यवस्थित सारणी के रूप में संक्षेप में प्रस्तुत कर रहा हूँ ताकि इसका अवलोकन और तुलनात्मक अध्ययन सहज हो सके —


🌟 १२ राशियों का शास्त्रीय स्वरूप (सारणीबद्ध रूप)

राशि वर्ण शरीर रूप/स्वरूप दिशा गुण तत्व उदय स्वामी प्रकृति वर्ण वर्ग स्थान
मेष रक्त बृहत चतुष्पद पूर्व रजस् अग्नि पृष्ठोदयी मंगल रात्रि बली क्षत्रिय पर्वतीय
वृष श्वेत दीर्घ चतुष्पद दक्षिण रजस् पृथ्वी पृष्ठोदयी शुक्र रात्रि बली वैश्य ग्राम्य
मिथुन हरित समगात्र द्विपद (युगल) पश्चिम वायु वायु शीर्षोदयी बुध रात्रि बली नृ ग्राम्य
कर्क पाटल स्थूल चतुष्पद उत्तर सत्त्व जल पृष्ठोदयी चन्द्र रात्रि बली ब्राह्मण वनचर
सिंह पाण्डु बृहद चतुष्पद पूर्व सत्त्व अग्नि शीर्षोदयी सूर्य दिन बली क्षत्रिय वनचर
कन्या चित्र मध्यम द्विपद कन्या दक्षिण तमस् पृथ्वी शीर्षोदयी बुध दिन बली वैश्य ग्राम्य
तुला श्याम मध्य द्विपद पश्चिम रजस् वायु शीर्षोदयी शुक्र दिन बली शूद्र भूचर
वृश्चिक पिशंग स्वल्प बहुपाद, डंकधारी उत्तर तमस् जल+थल शीर्षोदयी मंगल दिन बली ब्राह्मण बिल/गुप्त
धनु पिंगल समगात्र द्विपद+चतुष्पद पूर्व सत्त्व अग्नि पृष्ठोदयी गुरु रात्रि बली क्षत्रिय पृथ्वीचर
मकर श्याम बृहद चतुष्पद+अपाद दक्षिण तमस् जल+थल पृष्ठोदयी शनि रात्रि बली शूद्र जल/थलचर
कुम्भ भूरा मध्यम द्विपद (घटधारी नरो) पश्चिम तमस् वायु शीर्षोदयी शनि दिन बली शूद्र जलमध्यस्थ
मीन श्वेत मध्य द्वि-मीन (अपाद) उत्तर सत्त्व जल उभयोदयी गुरु दिन बली ब्राह्मण जलचर

🌗 राशियों की बलकाल व्यवस्था (दिवा/रात्रि/संध्या)

प्रकार राशियाँ
दिवा बली (दिन में बलवान) सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन
रात्रि बली (रात्रि में बलवान) मेष, वृष, मिथुन, कर्क, धनु, मकर
संध्या बली (संध्याकालीन उभयोदयी) मिथुन, मीन

📜 विशेष संज्ञाएँ व गुणविशेष

  • चतुष्पद राशियाँ: मेष, वृष, सिंह, कर्क, मकर (आंशिक), धनु (आंशिक)
  • द्विपद राशियाँ: मिथुन, कन्या, तुला, कुम्भ, धनु (आंशिक)
  • बहुपद: वृश्चिक
  • उभयोदयी: मिथुन, मीन

📚 सन्दर्भ ग्रंथ:

  • बृहज्जातक (वराहमिहिर) – राशि स्वरूप प्रकरण
  • वृहद्यवनजातक – यवनाचार्य की ज्योतिष परम्परा
  • बृहत्पाराशर होरा शास्त्र – गुणधर्म विवेचन
  • जातकपारिजात, फलगुणदर्पण, सारावली, आदि

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  90. 'एक आंख वाले कौवे' और भारतीय शकुन-शास्त्र 
  91. दिन के आठ प्रहर कौन से हैं ? 
  92. उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु आवश्यक कारक ग्रह 
  93. शनिवार को घर मे नही लानी चाहिए निम्नलिखित दस चीजें 
  94. शनि ग्रह की साढेसाती या महादशा विचार 
  95. काल पुरुष की कुंडली में शनि 
  96. ज्योतिष में व्यक्ति के कर्म और भाग्य 
  97. महादशा विचार 
  98. ग्रह व उनसे संबंधित बीमारी व उपाय 
  99. रुद्राक्ष धारण विधि 
  100. रुद्राक्ष और राशि का सम्बन्ध 
  101. राशियों का परिचय 
  102. राशियों के अनुसार रत्नों का विस्तृत वर्णन 
  103. रुद्राक्ष और राशि का संबंध 
  104. बीज और क्षेत्र: संतान प्राप्ति में ज्योतिषीय दृष्टिकोण 
  105. ज्योतिष: सरकारी नौकरी और सूर्य ग्रह 

क्या आप किसी विशेष सूर्य ग्रहण की जानकारी चाहते हैं?

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