तत्पुरुष समास (Tatpurusha Samas): परिभाषा, प्रकार, सूत्र और उदाहरण सहित सम्पूर्ण व्याख्या

Sooraj Krishna Shastri
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तत्पुरुष समास (Tatpurusha Samas)

तत्पुरुष समास की परिभाषा, प्रकार, सूत्र, उदाहरण और उपभेदों की विस्तृत व्याख्या। संस्कृत व्याकरण के विद्यार्थियों हेतु सम्पूर्ण मार्गदर्शिका।

Tatpurusha Samas Definition Types Examples
तत्पुरुष समास: परिभाषा और प्रकार

१. परिभाषा एवं स्वरूप (Definition)

परिभाषा: जिस समास में उत्तरपद (दूसरा पद) का अर्थ प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
सूत्र: प्रायेणोत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषः (जहाँ प्रायः उत्तर पद का अर्थ प्रधान होता है।)
नाम की उत्पत्ति:
तस्य पुरुषः → तत्पुरुषः
अर्थात् ‘उसका पुरुष’ — यह इस समास का आदर्श उदाहरण है।

२. मुख्य भेद (Main Types)

तत्पुरुष समास दो प्रमुख वर्गों में विभाजित है —

(क) व्यधिकरण तत्पुरुष (Vyadhikarana)

इस समास में पूर्वपद और उत्तरपद की विभक्तियाँ भिन्न होती हैं। यह कारक (vibhakti) के आधार पर छह प्रकार का होता है।

कारक सूत्र (Sutra) अर्थ (Meaning) विग्रह समस्त पद
द्वितीया द्वितीया श्रितातीत... (2.1.24) द्वितीयान्त का ‘श्रित’, ‘अतीत’ आदि से समास। ग्रामं गतः ग्रामगतः
तृतीया तृतीया तत्कृतार्थेन... (2.1.30) तृतीयान्त का ‘तत्कृत’/‘गुणवाचक’ से समास। नखैः भिन्नः नखभिन्नः
चतुर्थी चतुर्थी तदर्थार्थ... (2.1.36) चतुर्थ्यन्त का ‘हित’, ‘सुख’ आदि से समास। भूताय बलिः भूतबलिः
पञ्चमी पञ्चमी भयेन (2.1.37) पञ्चम्यन्त पद का ‘भय’ से समास। चोरात् भयम् चौरभयम्
षष्ठी षष्ठी (2.2.8) षष्ठ्यन्त का अन्य सुबन्त से समास। राज्ञः पुरुषः राजपुरुषः
सप्तमी सप्तमी शौण्डैः (2.1.40) सप्तम्यन्त का ‘शौण्ड’ (चतुर) आदि से समास। अक्षेषु शौण्डः अक्षशौण्डः

(ख) समानाधिकरण तत्पुरुष (Samanadhikarana)

इसमें पूर्वपद और उत्तरपद समान विभक्ति (अधिकतर प्रथमा) में होते हैं। इसे दो रूपों में देखा जाता है:
१. कर्मधारय (Karmadharaya) सूत्र: विशेषणं विशेष्येण बहुलम् (2.1.57)
पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है。
उदाहरण: नीलं कमलम् → नीलकमलम् | महान् देवः → महादेवः
२. द्विगु (Dvigu) सूत्र: संख्यापूर्वो द्विगुः (2.1.52)
जब कर्मधारय का पूर्वपद संख्यावाची हो और समाहार का अर्थ दे।
उदाहरण: त्रयाणां लोकानां समाहारः → त्रिलोकी | पञ्चानां पात्राणां समूहः → पञ्चपात्रम्

३. अन्य उपभेद (Other Sub-Types)

उपभेद सूत्र (Sutra) विशेषता उदाहरण
नञ् तत्पुरुष नञ् (2.2.6) ‘न’ (निषेध) पूर्वपद होता है। न ब्राह्मणः → अब्राह्मणः
उपपद तत्पुरुष गति-कारक-उपपदात् कृत् क्रियापद (कृदन्त) से पहले कारकपद। कुम्भं करोति → कुम्भकारः
प्रादि तत्पुरुष कु-गति-प्रादयः (2.2.18) ‘प्र’, ‘परा’ आदि उपसर्गों के साथ। प्रगतः आचार्यः → प्राचार्यः
अलुक् तत्पुरुष अलुगुत्तरपदे (6.3.1) विभक्ति का लोप नहीं होता। आत्मने पदम् → आत्मनेपदम्

४. संक्षेप (Summary)

प्रकार प्रमुख आधार उदाहरण
व्यधिकरणभिन्न विभक्तियाँराजपुरुषः
समानाधिकरणसमान विभक्ति (विशेषण)नीलकमलम्
द्विगुसंख्या + समूहत्रिलोकी
नञ्निषेध सूचकअब्राह्मणः
उपपदकारक + कृदन्तकुम्भकारः
प्रादिउपसर्ग + संज्ञाप्राचार्यः
अलुक्विभक्ति लोप न होनाआत्मनेपदम्

५. शिक्षण हेतु सारांश

  • तत्पुरुष = उत्तरपदप्रधान समास
  • विस्तार = ६ कारकाधारित + ३ समानाधिकरण + ४ विशेष उपभेद
  • मूल मन्त्र: “पूर्वपद-निर्भरता + उत्तरपद-प्रधानता = तत्पुरुष”
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