तत्पुरुष समास (Tatpurusha Samas)
तत्पुरुष समास की परिभाषा, प्रकार, सूत्र, उदाहरण और उपभेदों की विस्तृत व्याख्या। संस्कृत व्याकरण के विद्यार्थियों हेतु सम्पूर्ण मार्गदर्शिका।
१. परिभाषा एवं स्वरूप (Definition)
परिभाषा: जिस समास में उत्तरपद (दूसरा पद) का अर्थ प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
सूत्र: प्रायेणोत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषः
(जहाँ प्रायः उत्तर पद का अर्थ प्रधान होता है।)
नाम की उत्पत्ति:
तस्य पुरुषः → तत्पुरुषः
अर्थात् ‘उसका पुरुष’ — यह इस समास का आदर्श उदाहरण है।
तस्य पुरुषः → तत्पुरुषः
अर्थात् ‘उसका पुरुष’ — यह इस समास का आदर्श उदाहरण है।
२. मुख्य भेद (Main Types)
तत्पुरुष समास दो प्रमुख वर्गों में विभाजित है —
(क) व्यधिकरण तत्पुरुष (Vyadhikarana)
इस समास में पूर्वपद और उत्तरपद की विभक्तियाँ भिन्न होती हैं। यह कारक (vibhakti) के आधार पर छह प्रकार का होता है।
| कारक | सूत्र (Sutra) | अर्थ (Meaning) | विग्रह | समस्त पद |
|---|---|---|---|---|
| द्वितीया | द्वितीया श्रितातीत... (2.1.24) | द्वितीयान्त का ‘श्रित’, ‘अतीत’ आदि से समास। | ग्रामं गतः | ग्रामगतः |
| तृतीया | तृतीया तत्कृतार्थेन... (2.1.30) | तृतीयान्त का ‘तत्कृत’/‘गुणवाचक’ से समास। | नखैः भिन्नः | नखभिन्नः |
| चतुर्थी | चतुर्थी तदर्थार्थ... (2.1.36) | चतुर्थ्यन्त का ‘हित’, ‘सुख’ आदि से समास। | भूताय बलिः | भूतबलिः |
| पञ्चमी | पञ्चमी भयेन (2.1.37) | पञ्चम्यन्त पद का ‘भय’ से समास। | चोरात् भयम् | चौरभयम् |
| षष्ठी | षष्ठी (2.2.8) | षष्ठ्यन्त का अन्य सुबन्त से समास। | राज्ञः पुरुषः | राजपुरुषः |
| सप्तमी | सप्तमी शौण्डैः (2.1.40) | सप्तम्यन्त का ‘शौण्ड’ (चतुर) आदि से समास। | अक्षेषु शौण्डः | अक्षशौण्डः |
(ख) समानाधिकरण तत्पुरुष (Samanadhikarana)
इसमें पूर्वपद और उत्तरपद समान विभक्ति (अधिकतर प्रथमा) में होते हैं। इसे दो रूपों में देखा जाता है:
१. कर्मधारय (Karmadharaya)
सूत्र: विशेषणं विशेष्येण बहुलम् (2.1.57)
पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है。
उदाहरण: नीलं कमलम् → नीलकमलम् | महान् देवः → महादेवः
पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है。
उदाहरण: नीलं कमलम् → नीलकमलम् | महान् देवः → महादेवः
२. द्विगु (Dvigu)
सूत्र: संख्यापूर्वो द्विगुः (2.1.52)
जब कर्मधारय का पूर्वपद संख्यावाची हो और समाहार का अर्थ दे।
उदाहरण: त्रयाणां लोकानां समाहारः → त्रिलोकी | पञ्चानां पात्राणां समूहः → पञ्चपात्रम्
जब कर्मधारय का पूर्वपद संख्यावाची हो और समाहार का अर्थ दे।
उदाहरण: त्रयाणां लोकानां समाहारः → त्रिलोकी | पञ्चानां पात्राणां समूहः → पञ्चपात्रम्
३. अन्य उपभेद (Other Sub-Types)
| उपभेद | सूत्र (Sutra) | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| नञ् तत्पुरुष | नञ् (2.2.6) | ‘न’ (निषेध) पूर्वपद होता है। | न ब्राह्मणः → अब्राह्मणः |
| उपपद तत्पुरुष | गति-कारक-उपपदात् कृत् | क्रियापद (कृदन्त) से पहले कारकपद। | कुम्भं करोति → कुम्भकारः |
| प्रादि तत्पुरुष | कु-गति-प्रादयः (2.2.18) | ‘प्र’, ‘परा’ आदि उपसर्गों के साथ। | प्रगतः आचार्यः → प्राचार्यः |
| अलुक् तत्पुरुष | अलुगुत्तरपदे (6.3.1) | विभक्ति का लोप नहीं होता। | आत्मने पदम् → आत्मनेपदम् |
४. संक्षेप (Summary)
| प्रकार | प्रमुख आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यधिकरण | भिन्न विभक्तियाँ | राजपुरुषः |
| समानाधिकरण | समान विभक्ति (विशेषण) | नीलकमलम् |
| द्विगु | संख्या + समूह | त्रिलोकी |
| नञ् | निषेध सूचक | अब्राह्मणः |
| उपपद | कारक + कृदन्त | कुम्भकारः |
| प्रादि | उपसर्ग + संज्ञा | प्राचार्यः |
| अलुक् | विभक्ति लोप न होना | आत्मनेपदम् |
५. शिक्षण हेतु सारांश
- तत्पुरुष = उत्तरपदप्रधान समास
- विस्तार = ६ कारकाधारित + ३ समानाधिकरण + ४ विशेष उपभेद
- मूल मन्त्र: “पूर्वपद-निर्भरता + उत्तरपद-प्रधानता = तत्पुरुष”
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