संस्कृत व्याकरण: विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi)
विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi) संस्कृत व्याकरण की एक प्रमुख सन्धि है जिसमें विसर्ग (ः) के स्थान पर विभिन्न परिवर्तन जैसे स्, श्, ष्, ओ, र् अथवा लोप होते हैं।
इस लेख में विसर्ग सन्धि की परिभाषा, नियम, सूत्र, चारों मुख्य प्रकार — सत्व सन्धि, उत्व सन्धि, रत्व सन्धि तथा विसर्ग लोप सन्धि — को सरल भाषा में समझाया गया है। साथ ही 50 सटीक उदाहरणों की सारणी द्वारा इसे अत्यंत उपयोगी बनाया गया है।
परिभाषा (Definition)
विसर्ग सन्धि के प्रमुख भेद
१. सत्व सन्धि (Satva Sandhi)
| क्रम | स्थिति | परिणामी परिवर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| १ | यदि स् के बाद च्, छ् आए | श् (श्चुत्व) | रामः + चिनोति → रामश्चिनोति |
| २ | यदि स् के बाद ट्, ठ् आए | ष् (ष्टुत्व) | धनुः + टङ्कारः → धनुष्टङ्कारः |
| ३ | अन्य स्थितियों में स् | स् यथावत् | नमः + कारः → नमस्कारः |
२. उत्व सन्धि (Utva Sandhi)
उदाहरण: रामस् → रामरु → रामः
उदाहरण: शिवः + अर्च्यः → शिवोऽर्च्यः
नियम २ (हशि च): यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और बाद में हश् प्रत्याहार (3, 4, 5 वर्ण या य, र, ल, व, ह) हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है。
उदाहरण: मनः + हरः → मनोहरः
३. विसर्ग लोप सन्धि (Visarga Lopa)
यदि विसर्ग से पहले आ हो और बाद में कोई स्वर या हश् प्रत्याहार हो, तो विसर्ग का लोप हो जाता है。
उदाहरण: रामाः + इति → रामा इति
उदाहरण: एषः + पुरुषः → एष पुरुषः
४. रत्व सन्धि (Ratva Sandhi)
| क्रम | उदाहरण | परिणाम |
|---|---|---|
| १ | मुनिः + अयम् | मुनिरयम् |
| २ | गुरुः + जयति | गुरुर्जयति |
उदाहरण: पुनर् + रमते → पुना रमते
🌿 सारांश (Summary Table)
| क्रम | सन्धि का नाम | सूत्र | परिवर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| १ | सत्व सन्धि | विसर्जनीयस्य सः | विसर्ग → स्/श्/ष् | धनुष्टङ्कारः |
| २ | उत्व सन्धि | ससजुषो रुः, हशि च | विसर्ग → ओ | मनोहरः |
| ३ | विसर्ग लोप | एषोऽमसि | विसर्ग लोप | एष पुरुषः |
| ४ | रत्व सन्धि | खरवसानयोर्विसर्जनीयः | विसर्ग → र् | मुनिरयम् |
📘 विसर्ग सन्धि के 50 उदाहरण
| क्र. | सन्धि का भेद | विच्छेद (Split) | सन्धि (Join) | नियम / परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| सत्व सन्धि (विसर्ग → स्, श्, ष्) | ||||
| 1 | सत्व (स्) | नमः + कारः | नमस्कारः | विसर्ग → स् |
| 2 | सत्व (स्) | कः + तरति | कस्तरति | विसर्ग → स् |
| 3 | सत्व (स्) | रामः + त्रायते | रामस्त्रायते | विसर्ग → स् |
| 4 | सत्व (श्) | रामः + चिनोति | रामश्चिनोति | स् → श् (श्चुत्व) |
| 5 | सत्व (श्) | कः + चित् | कश्चित् | स् → श् (श्चुत्व) |
| 6 | सत्व (श्) | हरिः + शेते | हरिश्शेते | स् → श् (श्चुत्व) |
| 7 | सत्व (श्) | पुनः + च | पुनश्च | स् → श् (श्चुत्व) |
| 8 | सत्व (ष्) | धनुः + टङ्कारः | धनुष्टङ्कारः | स् → ष् (ष्टुत्व) |
| 9 | सत्व (ष्) | कः + टीकते | कष्टीकते | स् → ष् (ष्टुत्व) |
| 10 | सत्व (ष्) | निः + ठुरः | निष्ठुरः | स् → ष् (ष्टुत्व) |
| 11 | सत्व (श्) | तपः + चर्या | तपश्चर्या | विसर्ग → श् |
| उत्व सन्धि (विसर्ग → ओ / ओऽ) | ||||
| 12 | उत्व (ओऽ) | सः + अयम् | सोऽयम् | अ + : + अ → ओऽ |
| 13 | उत्व (ओऽ) | कः + अपि | कोऽपि | अ + : + अ → ओऽ |
| 14 | उत्व (ओऽ) | देवः + अयम् | देवोऽयम् | अ + : + अ → ओऽ |
| 15 | उत्व (ओ) | मनः + हरः | मनोहरः | अ + : + हश् → ओ |
| 16 | उत्व (ओ) | यशः + दानम् | यशोदानम् | अ + : + हश् → ओ |
| 17 | उत्व (ओ) | वयः + वृद्धः | वयोवृद्धः | अ + : + हश् → ओ |
| 18 | उत्व (ओ) | तापः + अग्निः | तापोऽग्निः | अ + : + अ → ओऽ |
| 19 | उत्व (ओ) | बालः + गच्छति | बालो गच्छति | अ + : + ग → ओ |
| 20 | उत्व (ओ) | शिष्यः + हसति | शिष्यो हसति | अ + : + हश् → ओ |
| रत्व सन्धि (विसर्ग → र्) | ||||
| 21 | रत्व | मुनिः + अयम् | मुनिरयम् | इ + : + अ → इर्अ |
| 22 | रत्व | हरिः + आगच्छति | हरिरागच्छति | इ + : + आ → इर्आ |
| 23 | रत्व | गुरुः + वदति | गुरुर्वदति | उ + : + व → उर् |
| 24 | रत्व | वधूः + इयम् | वधूरियम् | ऊ + : + इ → ऊर् |
| 25 | रत्व | ज्योतिः + वेदः | ज्योतिर्वेदः | इ + : + व → इर् |
| 26 | रत्व | निः + धनः | निर्धनः | इ + : + ध → इर् |
| 27 | रत्व | दुः + जनः | दुर्जनः | उ + : + ज → उर् |
| 28 | रत्व | आशीः + वादः | आशीर्वादः | ई + : + व → ईर् |
| रत्व (रो रि → दीर्घ) | ||||
| 29 | रो रि | पुनर् + रमते | पुना रमते | र् + र् → ा |
| 30 | रो रि | हरिर् + रम्यः | हरी रम्यः | र् + र् → ी |
| विसर्ग लोप सन्धि | ||||
| 31 | लोप | देवाः + गच्छन्ति | देवा गच्छन्ति | आ + हश् → लोप |
| 32 | लोप | छात्राः + एते | छात्रा एते | आ + स्वर → लोप |
| 33 | लोप | बालाः + यान्ति | बाला यान्ति | आ + हश् → लोप |
| 34 | लोप | नरः + हसति | नर हसति | अ + हश् → लोप |
| 35 | लोप | सः + इच्छति | स इच्छति | स + स्वर → लोप |
| 36 | लोप | एषः + विष्णुः | एष विष्णुः | एष + व्यंजन → लोप |
| 37 | लोप | ते + नराः | ते नराः | ए + व्यंजन → लोप |
| 38 | लोप | त्वम् + असि | त्वमसि | म् लोप (विशेष) |
| अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण | ||||
| 39 | सत्व (श्) | तपः + चर्या | तपश्चर्या | विसर्ग → श् |
| 40 | सत्व (ष्) | चतुः + षष्टिः | चतुष्षष्टिः | विसर्ग → ष् |
| 41 | उत्व (ओ) | पुरः + हितः | पुरोहितः | अ + : + हश् → ओ |
| 42 | उत्व (ओ) | तेजः + मयम् | तेजोमयम् | अ + : + हश् → ओ |
| 43 | रत्व | प्रातः + उत्थाय | प्रातरुत्थाय | अ ≠ आ → र् |
| 44 | रत्व | चक्षुः + दुःखम् | चक्षुर्दुःखम् | उ + : + हश् → उर् |
| 45 | लोप | छात्रौ + गच्छतः | छात्रौ गच्छतः | ओ + व्यंजन → लोप |
| 46 | सत्व (स्) | दुः + तरम् | दुस्तरम् | विसर्ग → स् |
| 47 | सत्व (श्) | निः + छलः | निश्छलः | विसर्ग → श् |
| 48 | उत्व (ओ) | रामः + जयति | रामो जयति | अ + : + हश् → ओ |
| 49 | रत्व | निः + आकारः | निराकारः | इ + : + आ → इर्आ |
| 50 | लोप | कृष्णाः + अत्र | कृष्णा अत्र | आ + स्वर → लोप |
संस्कृत व्याकरण में विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi in Sanskrit) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। विद्यार्थी जब Sanskrit Grammar for Beginners का अध्ययन करते हैं, तब वे विसर्ग सन्धि के प्रकार, उसके नियम (विसर्ग सन्धि नियम संस्कृत व्याकरण) और उसके उदाहरण (विसर्ग सन्धि उदाहरण सहित) को समझना चाहते हैं। इस विषय के अंतर्गत Hal Sandhi, Ach Sandhi और Visarga Sandhi Difference को जानना भी उपयोगी होता है। लेख में दी गई Visarga Sandhi Table (50 Examples) से सन्धि के विविध रूपों को सरलता से समझा जा सकता है। यह अध्ययन सामग्री Sanskrit Grammar Sandhi Rules के अंतर्गत आने वाले सभी नियमों को स्पष्ट करती है।
