संस्कृत व्याकरण: विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi) के नियम, प्रकार और 50 उदाहरणों सहित विस्तृत व्याख्या

Sooraj Krishna Shastri
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संस्कृत व्याकरण: विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi)

विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi) संस्कृत व्याकरण की एक प्रमुख सन्धि है जिसमें विसर्ग (ः) के स्थान पर विभिन्न परिवर्तन जैसे स्, श्, ष्, ओ, र् अथवा लोप होते हैं।

इस लेख में विसर्ग सन्धि की परिभाषा, नियम, सूत्र, चारों मुख्य प्रकार — सत्व सन्धि, उत्व सन्धि, रत्व सन्धि तथा विसर्ग लोप सन्धि — को सरल भाषा में समझाया गया है। साथ ही 50 सटीक उदाहरणों की सारणी द्वारा इसे अत्यंत उपयोगी बनाया गया है।

Visarga Sandhi Rules Chart
विसर्ग सन्धि के नियम, प्रकार और उदाहरण

परिभाषा (Definition)

जब विसर्ग (ः) के बाद कोई स्वर या व्यंजन आता है और उस मेल से विसर्ग में विकार (परिवर्तन) होता है, तो उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं।

विसर्ग सन्धि के प्रमुख भेद

१. सत्व सन्धि (Satva Sandhi)

सूत्र: विसर्जनीयस्य सः नियम: यदि विसर्ग (ः) के बाद खर् प्रत्याहार (वर्गों के 1, 2 वर्ण तथा श्, ष्, स्) में से कोई वर्ण आता है, तो विसर्ग स् (सकार) में परिवर्तित हो जाता है।
क्रम स्थिति परिणामी परिवर्तन उदाहरण
यदि स् के बाद च्, छ् आएश् (श्चुत्व)रामः + चिनोति → रामश्चिनोति
यदि स् के बाद ट्, ठ् आएष् (ष्टुत्व)धनुः + टङ्कारः → धनुष्टङ्कारः
अन्य स्थितियों में स्स् यथावत्नमः + कारः → नमस्कारः

२. उत्व सन्धि (Utva Sandhi)

यह सन्धि दो चरणों में होती है — (क) रुत्व और (ख) उत्व।
(क) रुत्व (Rutva) - सूत्र: ससजुषो रुः नियम: यदि पद के अन्त में स् या सजुष् का स् हो, तो वह रु (र्) में परिवर्तित हो जाता है。
उदाहरण: रामस् → रामरु → रामः
(ख) उत्व (Utva) नियम १ (अतो रोरप्लुतादप्लुते): यदि विसर्ग के दोनों ओर 'अ' हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है और बाद वाला 'अ' अवग्रह (ऽ) बन जाता है。
उदाहरण: शिवः + अर्च्यः → शिवोऽर्च्यः

नियम २ (हशि च): यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और बाद में हश् प्रत्याहार (3, 4, 5 वर्ण या य, र, ल, व, ह) हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है。
उदाहरण: मनः + हरः → मनोहरः

३. विसर्ग लोप सन्धि (Visarga Lopa)

(क) ‘आ’ के बाद विसर्ग लोप:
यदि विसर्ग से पहले हो और बाद में कोई स्वर या हश् प्रत्याहार हो, तो विसर्ग का लोप हो जाता है。
उदाहरण: रामाः + इति → रामा इति
(ख) अन्य विसर्ग लोप - सूत्र: एषोऽमसि नियम: यदि विसर्ग से पहले सः / एषः हो और बाद में 'अ' के अलावा कोई अन्य वर्ण आए, तो विसर्ग का लोप हो जाता है。
उदाहरण: एषः + पुरुषः → एष पुरुषः

४. रत्व सन्धि (Ratva Sandhi)

सूत्र: खरवसानयोर्विसर्जनीयः / रो रि नियम: यदि विसर्ग से पहले 'अ, आ' के अलावा कोई अन्य स्वर हो और बाद में कोई स्वर या हश् प्रत्याहार हो, तो विसर्ग र् (रेफ) में बदल जाता है।
क्रम उदाहरण परिणाम
मुनिः + अयम्मुनिरयम्
गुरुः + जयतिगुरुर्जयति
विशेष स्थिति (रो रि): यदि दो र् साथ आएं, तो पूर्व र् का लोप और उससे पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है。
उदाहरण: पुनर् + रमते → पुना रमते

🌿 सारांश (Summary Table)

क्रम सन्धि का नाम सूत्र परिवर्तन उदाहरण
सत्व सन्धिविसर्जनीयस्य सःविसर्ग → स्/श्/ष्धनुष्टङ्कारः
उत्व सन्धिससजुषो रुः, हशि चविसर्ग → ओमनोहरः
विसर्ग लोपएषोऽमसिविसर्ग लोपएष पुरुषः
रत्व सन्धिखरवसानयोर्विसर्जनीयःविसर्ग → र्मुनिरयम्

📘 विसर्ग सन्धि के 50 उदाहरण

क्र. सन्धि का भेद विच्छेद (Split) सन्धि (Join) नियम / परिणाम
सत्व सन्धि (विसर्ग → स्, श्, ष्)
1सत्व (स्)नमः + कारःनमस्कारःविसर्ग → स्
2सत्व (स्)कः + तरतिकस्तरतिविसर्ग → स्
3सत्व (स्)रामः + त्रायतेरामस्त्रायतेविसर्ग → स्
4सत्व (श्)रामः + चिनोतिरामश्चिनोतिस् → श् (श्चुत्व)
5सत्व (श्)कः + चित्कश्चित्स् → श् (श्चुत्व)
6सत्व (श्)हरिः + शेतेहरिश्शेतेस् → श् (श्चुत्व)
7सत्व (श्)पुनः + चपुनश्चस् → श् (श्चुत्व)
8सत्व (ष्)धनुः + टङ्कारःधनुष्टङ्कारःस् → ष् (ष्टुत्व)
9सत्व (ष्)कः + टीकतेकष्टीकतेस् → ष् (ष्टुत्व)
10सत्व (ष्)निः + ठुरःनिष्ठुरःस् → ष् (ष्टुत्व)
11सत्व (श्)तपः + चर्यातपश्चर्याविसर्ग → श्
उत्व सन्धि (विसर्ग → ओ / ओऽ)
12उत्व (ओऽ)सः + अयम्सोऽयम्अ + : + अ → ओऽ
13उत्व (ओऽ)कः + अपिकोऽपिअ + : + अ → ओऽ
14उत्व (ओऽ)देवः + अयम्देवोऽयम्अ + : + अ → ओऽ
15उत्व (ओ)मनः + हरःमनोहरःअ + : + हश् → ओ
16उत्व (ओ)यशः + दानम्यशोदानम्अ + : + हश् → ओ
17उत्व (ओ)वयः + वृद्धःवयोवृद्धःअ + : + हश् → ओ
18उत्व (ओ)तापः + अग्निःतापोऽग्निःअ + : + अ → ओऽ
19उत्व (ओ)बालः + गच्छतिबालो गच्छतिअ + : + ग → ओ
20उत्व (ओ)शिष्यः + हसतिशिष्यो हसतिअ + : + हश् → ओ
रत्व सन्धि (विसर्ग → र्)
21रत्वमुनिः + अयम्मुनिरयम्इ + : + अ → इर्अ
22रत्वहरिः + आगच्छतिहरिरागच्छतिइ + : + आ → इर्आ
23रत्वगुरुः + वदतिगुरुर्वदतिउ + : + व → उर्
24रत्ववधूः + इयम्वधूरियम्ऊ + : + इ → ऊर्
25रत्वज्योतिः + वेदःज्योतिर्वेदःइ + : + व → इर्
26रत्वनिः + धनःनिर्धनःइ + : + ध → इर्
27रत्वदुः + जनःदुर्जनःउ + : + ज → उर्
28रत्वआशीः + वादःआशीर्वादःई + : + व → ईर्
रत्व (रो रि → दीर्घ)
29रो रिपुनर् + रमतेपुना रमतेर् + र् → ा
30रो रिहरिर् + रम्यःहरी रम्यःर् + र् → ी
विसर्ग लोप सन्धि
31लोपदेवाः + गच्छन्तिदेवा गच्छन्तिआ + हश् → लोप
32लोपछात्राः + एतेछात्रा एतेआ + स्वर → लोप
33लोपबालाः + यान्तिबाला यान्तिआ + हश् → लोप
34लोपनरः + हसतिनर हसतिअ + हश् → लोप
35लोपसः + इच्छतिस इच्छतिस + स्वर → लोप
36लोपएषः + विष्णुःएष विष्णुःएष + व्यंजन → लोप
37लोपते + नराःते नराःए + व्यंजन → लोप
38लोपत्वम् + असित्वमसिम् लोप (विशेष)
अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण
39सत्व (श्)तपः + चर्यातपश्चर्याविसर्ग → श्
40सत्व (ष्)चतुः + षष्टिःचतुष्षष्टिःविसर्ग → ष्
41उत्व (ओ)पुरः + हितःपुरोहितःअ + : + हश् → ओ
42उत्व (ओ)तेजः + मयम्तेजोमयम्अ + : + हश् → ओ
43रत्वप्रातः + उत्थायप्रातरुत्थायअ ≠ आ → र्
44रत्वचक्षुः + दुःखम्चक्षुर्दुःखम्उ + : + हश् → उर्
45लोपछात्रौ + गच्छतःछात्रौ गच्छतःओ + व्यंजन → लोप
46सत्व (स्)दुः + तरम्दुस्तरम्विसर्ग → स्
47सत्व (श्)निः + छलःनिश्छलःविसर्ग → श्
48उत्व (ओ)रामः + जयतिरामो जयतिअ + : + हश् → ओ
49रत्वनिः + आकारःनिराकारःइ + : + आ → इर्आ
50लोपकृष्णाः + अत्रकृष्णा अत्रआ + स्वर → लोप

संस्कृत व्याकरण में विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi in Sanskrit) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। विद्यार्थी जब Sanskrit Grammar for Beginners का अध्ययन करते हैं, तब वे विसर्ग सन्धि के प्रकार, उसके नियम (विसर्ग सन्धि नियम संस्कृत व्याकरण) और उसके उदाहरण (विसर्ग सन्धि उदाहरण सहित) को समझना चाहते हैं। इस विषय के अंतर्गत Hal Sandhi, Ach Sandhi और Visarga Sandhi Difference को जानना भी उपयोगी होता है। लेख में दी गई Visarga Sandhi Table (50 Examples) से सन्धि के विविध रूपों को सरलता से समझा जा सकता है। यह अध्ययन सामग्री Sanskrit Grammar Sandhi Rules के अंतर्गत आने वाले सभी नियमों को स्पष्ट करती है।

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