संस्कृत श्लोक "वरं मौनं कार्यं न च वचनमुक्तं यदनृतं" का हिन्दी अनुवाद और विश्लेषण

Sooraj Krishna Shastri
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संस्कृत श्लोक "वरं मौनं कार्यं न च वचनमुक्तं यदनृतं" का हिन्दी अनुवाद और विश्लेषण 

🌸 जय श्रीराम! सुप्रभातम् 🌸

 प्रस्तुत श्लोक अत्यन्त गहन नैतिक मर्यादा का उपदेश देता है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य को कौन-सी बातें जीवन में अपनानी चाहिए और कौन-सी बातों से दूर रहना चाहिए, भले ही उसका विकल्प देखने में कठिन या कष्टदायी क्यों न हो।


१. संस्कृत मूल

वरं मौनं कार्यं न च वचनमुक्तं यदनृतं
वरं क्लैब्यं पुंसां न च परकलत्राभिगमनम् ।
वरं प्राणत्यागो न च पिशुनवाक्येष्वभिरुचिः
वरं भिक्षाशित्वं न च परधनास्वादनसुखम् ॥


२. IAST Transliteration

varaṃ maunaṃ kāryaṃ na ca vacanam uktaṃ yad anṛtam |
varaṃ klaibyaṃ puṃsāṃ na ca para-kalatrābhigamanam ||
varaṃ prāṇatyāgo na ca piśuna-vākyeṣv abhiruciḥ |
varaṃ bhikṣāśitvaṃ na ca para-dhanāsvādana-sukham ||


३. पद-पद अर्थ

पद अर्थ
वरं उत्तम है / बेहतर है
मौनं मौन रहना
कार्यं करना
न च वचनम् उक्तं यद् अनृतम् असत्य वचन बोलना उचित नहीं
क्लैब्यम् नपुंसकत्व / दुर्बलता
पुंसाम् पुरुषों का
न च परकलत्राभिगमनम् परस्त्री-संग नहीं
प्राणत्यागः प्राण-त्याग (मृत्यु)
न च पिशुनवाक्येषु अभिरुचिः चुगली, निंदा में रुचि नहीं
भिक्षाशित्वम् भिक्षा मांगकर जीवनयापन
न च परधनास्वादनसुखम् दूसरों के धन से भोग का सुख नहीं

४. हिन्दी भावार्थ

असत्य बोलने से तो मौन रहना श्रेष्ठ है।
परस्त्री-गमन से तो पुरुष का नपुंसक होना भी बेहतर है।
दूसरों की निंदा करने के बजाय प्राण त्याग करना भी श्रेष्ठ है।
और दूसरों के धन का उपभोग करने के बजाय भिक्षा से जीवनयापन करना श्रेष्ठ है।

संस्कृत श्लोक "वरं मौनं कार्यं न च वचनमुक्तं यदनृतं" का हिन्दी अनुवाद और विश्लेषण
संस्कृत श्लोक "वरं मौनं कार्यं न च वचनमुक्तं यदनृतं" का हिन्दी अनुवाद और विश्लेषण 



५. English Translation

Better to remain silent than to speak untruth.
Better impotence for men than indulging in another’s wife.
Better death than delight in slander.
Better to live on alms than to enjoy another’s wealth.


६. व्याकरणिक दृष्टि से

  • वरं → indeclinable (अव्यय), meaning “better / preferable”.
  • मौनं कार्यं → मौनं (neuter singular, nominative), कार्यं (gerundive, “should be done”).
  • अनृतं → न + ऋत (truth), अर्थात् "untruth".
  • पिशुनवाक्येषु → पिशुन (slanderous), वाक्येषु (locative plural).
  • भिक्षाशित्वम् → abstract noun “state of begging”.

७. नीतिशिक्षा

  1. सत्य का महत्व – असत्य बोलने से तो चुप रहना कहीं श्रेष्ठ है।
  2. स्त्री-धर्म पालन – परस्त्री-संग सबसे बड़ा अधर्म है।
  3. निंदा से दूरी – अपवाद व चुगली में रुचि रखना आत्मा का पतन है।
  4. धन पर दृष्टि – दूसरों के धन का उपभोग करने से तो भिक्षाटन करना भी उत्तम है।

८. आधुनिक सन्दर्भ

  • सोशल मीडिया और राजनीति में असत्य प्रचार और निंदा की प्रवृत्ति आम है। शास्त्र कहता है – असत्य बोलने की अपेक्षा मौन श्रेष्ठ है।
  • चरित्र की मर्यादा – परस्त्री-गमन को शास्त्र सबसे बड़ा दोष मानते हैं।
  • आर्थिक जीवन – भ्रष्टाचार या दूसरों की सम्पत्ति पर दृष्टि डालने से, ईमानदारी से साधारण जीवन यापन करना उत्तम है।

९. कथा-सूत्र

प्राचीनकाल में एक साधु ने राजा को उपदेश दिया:
“राजन्! यदि असत्य बोलना पड़े तो मौन रहना श्रेष्ठ है। यदि अधर्म करना पड़े तो मृत्यु भी उत्तम है। यदि परधन या परस्त्री पर दृष्टि पड़े तो संन्यासी का भिक्षा-जीवन भी श्रेष्ठ है।”
राजा ने कहा: “ऐसा जीवन कठिन है।”
साधु ने उत्तर दिया: “कठिन है, पर यही धर्म और सच्चा सुख है।”


१०. सार-सूत्र

👉 मौन > असत्य
👉 नपुंसकता > परस्त्री-संग
👉 मृत्यु > निंदा
👉 भिक्षाटन > परधन-भोग

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