संस्कृत श्लोक "अत्यम्बुपानाद्विषमाशनाच्च" का हिन्दी अनुवाद और विश्लेषण
🌸 जय श्रीराम सुप्रभातम् 🌸
आपके द्वारा प्रस्तुत यह श्लोक आयुर्वेद-सिद्धान्त को बहुत सुंदर ढंग से स्पष्ट करता है। आइए इसे व्यवस्थित रूप से देखें—
📜 श्लोक (संस्कृत मूल)
अत्यम्बुपानाद्विषमाशनाच्च
सन्धारणात्स्वप्नविपर्ययाच्च ।
कालेऽपि सात्म्यं लघु चापि भुक्त-
मन्नं च पाकं भजते नरस्य ।।
🔤 Transliteration (IAST)
atyambu-pānād-viṣamāśanāc ca
sandhāraṇāt-svapna-viparyayāc ca ।
kāle’pi sātmyam laghu cāpi bhukta-
mannaṃ ca pākaṃ bhajate narasya ॥
🇮🇳 हिन्दी अनुवाद
मनुष्य को अपच किन कारणों से होता है? —
- अत्यधिक जलपान करने से,
- अनियमित भोजन से,
- प्राकृतिक वेगों (मल-मूत्रादि) को रोकने से,
- अनियमित नींद-जागरण से।
परन्तु यदि आहार समय पर, हल्का और सात्म्य (शरीर के अनुकूल) हो, तो वह अल्प मात्रा में भी ठीक से पच जाता है।
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संस्कृत श्लोक "अत्यम्बुपानाद्विषमाशनाच्च" का हिन्दी अनुवाद और विश्लेषण |
🌍 English Translation
Indigestion arises due to:
- Excessive drinking of water,
- Irregular eating habits,
- Suppression of natural urges,
- Irregular sleep patterns.
But if the food is wholesome (sātmya), light (laghu), and taken at the proper time, then even a small quantity gets digested properly.
🪶 व्याकरणिक विश्लेषण
- अत्यम्बुपानात् – "अति + अम्बु + पान" → excessive drinking of water (पञ्चमी विभक्ति).
- विषमाशनात् – irregular food habits (समास: विषम + आशन).
- सन्धारणात् – suppression (esp. of natural urges).
- स्वप्नविपर्ययात् – irregularity in sleep.
- कालेऽपि – even when at the right time.
- सात्म्यं लघु – wholesome and light (food).
- भुक्तं मन्नं – the food that is eaten.
- पाकं भजते – becomes properly digested.
🧘 आधुनिक सन्दर्भ
यह श्लोक आज की जीवनशैली में भी पूरी तरह लागू होता है।
- आजकल लोग बहुत फास्ट-फूड खाते हैं, बिना समय का ध्यान दिए।
- अत्यधिक ठंडे पेय, या बार-बार पानी पीना भी पाचन-तन्त्र पर भार डालता है।
- मल-मूत्र, छींक, डकार जैसी प्राकृतिक क्रियाओं को रोकना पाचन-विघ्न का कारण है।
- देर रात तक जागना और अनियमित नींद लेना भी स्वास्थ्य नाशक है।
👉 इसीलिए आज भी डॉक्टर यही कहते हैं कि समय पर हल्का, सुपाच्य, सात्म्य आहार ही स्वस्थ जीवन का रहस्य है।
📖 नीति कथा / संवादात्मक दृष्टांत
👦 शिष्य: गुरुदेव! लोग कहते हैं कि हल्का खाना भी शक्ति देता है, यह कैसे सम्भव है?
👨🦳 गुरु: बेटा, भारी भोजन या असमय का भोजन, चाहे कितना ही पौष्टिक क्यों न हो, पचता नहीं और शरीर को विष जैसा कष्ट देता है।
👦 शिष्य: और हल्का?
👨🦳 गुरु: हल्का और समय पर खाया गया भोजन थोड़ी मात्रा में भी पूर्ण लाभ देता है — जैसे एक दीपक में उचित तेल और बत्ती हो तो वह पूरे कमरे को प्रकाशित कर देता है।
नीति: स्वास्थ्य का आधार संयमित, सात्म्य और समयानुकूल आहार है।
🌿 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य-सूत्र (श्लोक से प्रेरित आधुनिक हेल्थ गाइड) 🌿
कारण (श्लोकानुसार) | आधुनिक रूप (Lifestyle Mistakes) | दुष्परिणाम | उपाय (Solution) |
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अत्यम्बुपानम् (अत्यधिक जलपान) | बार-बार बिना प्यास के पानी पीना, भोजन के तुरंत बाद बहुत अधिक पानी | जठराग्नि मंद पड़ना, अपच | प्यास लगने पर ही जल पिएँ, भोजन के बाद तुरंत अधिक न पिएँ |
विषमाशनम् (अनियमित भोजन) | असमय खाना, फास्ट-फूड, ओवरईटिंग | गैस, अपच, मोटापा | निश्चित समय पर संतुलित, हल्का व ताजा भोजन करें |
सन्धारणम् (प्राकृतिक वेगों को रोकना) | पेशाब, मल, छींक, डकार आदि को रोकना | सिरदर्द, कब्ज, पाचन-दोष | प्राकृतिक वेगों को कभी न रोकें |
स्वप्नविपर्ययः (अनियमित निद्रा) | देर रात तक जागना, मोबाइल-स्क्रीन उपयोग, दिन में सोना | थकान, अपच, मानसिक तनाव | जल्दी सोना-जागना, 6–8 घंटे की नियमित नींद |
सात्म्यं लघु भोजनम् | शरीर के अनुकूल, सुपाच्य, हल्का भोजन | शीघ्र पचता, रोग निवारक | दाल, मूंग, हरी सब्ज़ियाँ, मौसमी फल |
✅ निष्कर्ष (Conclusion):
👉 "समय पर, अल्प मात्रा में, हल्का और सात्म्य भोजन — यही दीर्घायु और स्वास्थ्य का रहस्य है।"