Parastrigaman Yoga in Astrology | परस्त्रीगमन योग के कारण और उपाय

Sooraj Krishna Shastri
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Parastrigaman Yoga in Astrology | परस्त्रीगमन योग के कारण और उपाय

जानिए Parastrigaman Yoga in Astrology का विस्तृत विश्लेषण। परस्त्रीगमन योग के ग्रह-स्थिति, कारण, प्रभाव और निवारण उपाय। Complete guide on extramarital tendencies in Kundli.

यहां परस्त्रीगमन योग" से सम्बन्धित श्लोक और ज्योतिषीय विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसे मैं व्यवस्थित, स्पष्ट एवं विस्तारपूर्वक रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ—


🌺 परस्त्रीगमन योग (Parastrigaman Yoga in Astrology)

ज्योतिष शास्त्र में वर्णित है कि यदि किसी जातक की जन्मकुण्डली में कुछ विशेष योग बनें, तो उसमें परस्त्रीगमन की प्रवृत्ति प्रबल हो जाती है। यह प्रवृत्ति वैवाहिक जीवन में असंतोष, चरित्रहीनता अथवा दाम्पत्य सुख में बाधा उत्पन्न कर सकती है।


🔱 शास्त्रीय आधार (श्लोक)

श्लोक
शुक्रज्ञौद्युनगौ तथा दशमगौ स्यात्पुश्चलोऽसृक्सितौ
खेऽस्ते वा परदारगः कुजसितौ तुर्येचखे पुश्चलः। 
मन्देनेन्दुत आस्फुजित्सुखगतः स्वस्थोऽपि वा पुश्चलः
खेचाद्ये ज्ञसिातार्कजा अथदिने स्वर्धेसितः पुश्चलः।।

भावार्थ

  • जब शुक्र और बुध सप्तम (7वें) अथवा दशम (10वें) भाव में एक साथ हों।
  • जब मंगल और शुक्र एक साथ सप्तम अथवा दशम भाव में स्थित हों।
  • जब मंगल और शुक्र चतुर्थ (4) और दशम (10) में आमने-सामने हों।
  • चन्द्रकुण्डली में यदि शनि और शुक्र चतुर्थ अथवा दशम भाव में एक साथ हों।
  • लग्न या दशम भाव में यदि बुध, शुक्र और शनि एक साथ हों।
  • यदि शुक्र शुभ, स्वक्षेत्री (अपने घर में) हो और दिन के समय जन्म हुआ हो।

तो ऐसे जातक में परस्त्रीगमन की प्रवृत्ति देखी जाती है।

Parastrigaman Yoga in Astrology | परस्त्रीगमन योग के कारण और उपाय
Parastrigaman Yoga in Astrology | परस्त्रीगमन योग के कारण और उपाय



🌸 मुख्य संयोजन (Astrological Combinations)

1. शुक्र-बुध संयोग

  • सप्तम या दशम भाव में हों → जातक आकर्षक व्यक्तित्व वाला होता है और स्त्रियों की ओर विशेष झुकाव रखता है।

2. मंगल-शुक्र संयोग

  • सप्तम/दशम भाव में साथ हों → कामुकता और दाम्पत्य असंतोष बढ़ाता है।
  • चतुर्थ-दशम (4-10) में आमने-सामने हों → वैवाहिक जीवन में विचलन और परस्त्री-संपर्क का योग।

3. शनि-शुक्र संयोग (चन्द्रकुण्डली में)

  • चतुर्थ या दशम भाव में हों → स्त्रियों से गुप्त संबंध अथवा विवाहेतर आकर्षण।

4. बुध-शुक्र-शनि संयोग

  • प्रथम (लग्न) अथवा दशम भाव में हों → समाज में दिखावा, छिपे संबंध और परस्त्री से सम्पर्क।

5. शुभ, स्वक्षेत्री शुक्र + दिन का जन्म

  • ऐसे में स्त्रीसुख अधिक मिलता है, लेकिन संयम की कमी होने पर परस्त्री की ओर प्रवृत्ति।

🔮 विशेष टिप्पणी

  • शुक्र: भोग, स्त्रीसुख और आकर्षण का कारक।
  • मंगल: कामवासना, आवेग और तृष्णा का प्रतीक।
  • बुध: चतुराई, कुटिलता और अवसरवादी प्रवृत्ति देता है।
  • शनि: गुप्त, असामाजिक या परोक्ष संबंधों को बढ़ाता है।

जब ये ग्रह संयोजन बनाते हैं, तो जातक में परस्त्रीगमन की प्रवृत्ति तीव्र होती है।


🌿 निवारण

यदि कुण्डली में ऐसे योग बनते हों, तो जातक को—

  • ब्रह्मचर्य का पालन करने का प्रयास करना चाहिए।
  • श्रीशुक्र स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम, या चण्डीपाठ का नियमित पाठ।
  • समाज व परिवार की मर्यादाओं का पालन करना।
  • संयम और सदाचरण का अभ्यास।


📊 परस्त्रीगमन योग – सारणी रूप में

क्रम ग्रह-स्थिति / योग भाव (House) फल / परिणाम
1 शुक्र + बुध साथ सप्तम (7) या दशम (10) स्त्रियों के प्रति आकर्षण, परस्त्री संबंध की प्रवृत्ति
2 मंगल + शुक्र साथ सप्तम (7) या दशम (10) कामुकता, दाम्पत्य असंतोष, परस्त्री-संपर्क
3 मंगल ↔ शुक्र (आमने-सामने) चतुर्थ (4) – दशम (10) गुप्त संबंध, वैवाहिक विचलन
4 शनि + शुक्र (चन्द्रकुण्डली) चतुर्थ (4) या दशम (10) गुप्त या विवाहेतर संबंध
5 बुध + शुक्र + शनि साथ प्रथम (लग्न) या दशम (10) समाज में दिखावा, छिपे हुए प्रेम-संबंध
6 शुभ, स्वक्षेत्री शुक्र + दिन का जन्म स्त्री-सुख अधिक, पर संयमहीनता से परस्त्री आकर्षण

🪔 सारांश

  • शुक्र = स्त्री, भोग, आकर्षण
  • मंगल = वासना, आवेग
  • बुध = कुटिलता, अवसरवादी दृष्टि
  • शनि = गुप्त व असामाजिक प्रवृत्ति

जब ये ग्रह विशेष भावों में मिलकर योग बनाते हैं, तो जातक परस्त्रीगमन प्रवृत्ति का शिकार हो सकता है।

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