अच् सन्धि (Swara Sandhi) in Sanskrit Grammar – Types, Rules with 50 Examples | अच् सन्धि के प्रकार एवं नियम

Sooraj Krishna Shastri
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अच् सन्धि (स्वर सन्धि) - विस्तृत विवेचन

संस्कृत व्याकरण में अच् सन्धि को ही स्वर सन्धि कहा जाता है, क्योंकि इसमें केवल स्वरों का मेल होता है। जब दो स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) परस्पर निकट आते हैं और उनके संयोग से नया स्वर या परिवर्तन उत्पन्न होता है, तो उसे अच् सन्धि कहा जाता है।

यह सन्धि संस्कृत उच्चारण की मधुरता और शब्दरचना की शुद्धता का आधार है।

Ach Sandhi Chart
अच् सन्धि के प्रकार एवं नियम

परिभाषा

“दो स्वर वर्णों के परस्पर मेल से उनमें होने वाले परिवर्तन को अच् सन्धि कहते हैं।”

अच् सन्धि के 7 प्रमुख भेद

1. दीर्घ सन्धि (Dīrgha Sandhi)

सूत्र: अकः सवर्णे दीर्घः नियम: “अक्” प्रत्याहार (अ, इ, उ, ऋ, लृ) के बाद यदि सवर्ण (सजातीय) स्वर आता है, तो दोनों के स्थान पर एक दीर्घ स्वर हो जाता है।
मेल (Combination) परिणाम उदाहरण
अ/आ + अ/आविद्या + आलयः → विद्यालयः
इ/ई + इ/ईकवि + ईशः → कवीशः
उ/ऊ + उ/ऊभानु + उदयः → भानूदयः
ऋ/ॠ + ऋ/ॠपितृ + ऋणम् → पितॄणम्

2. गुण सन्धि (Guṇa Sandhi)

सूत्र: आद् गुणः नियम: यदि अ या आ के बाद इ, उ, ऋ, लृ में से कोई स्वर आता है, तो दोनों के स्थान पर गुण स्वर (ए, ओ, अर्, अल्) हो जाता है।
मेल परिणाम उदाहरण
अ/आ + इ/ईगण + ईशः → गणेशः
अ/आ + उ/ऊमहा + उत्सवः → महोत्सवः
अ/आ + ऋ/ॠअर्देव + ऋषिः → देवर्षिः
अ/आ + लृअल्तव + लृकारः → तवल्कारः

3. वृद्धि सन्धि (Vṛddhi Sandhi)

सूत्र: वृद्धिरेचि नियम: यदि अ या आ के बाद ए, ओ, ऐ, औ में से कोई स्वर आता है, तो दोनों के स्थान पर वृद्धि स्वर (ऐ, औ) हो जाता है।
मेल परिणाम उदाहरण
अ/आ + ए/ऐसदा + एव → सदैव
अ/आ + ओ/औवन + ओषधिः → वनौषधिः

4. यण् सन्धि (Yaṇ Sandhi)

सूत्र: इको यणचि नियम: इ, उ, ऋ, लृ के बाद यदि कोई असमान स्वर आता है, तो इनके स्थान पर क्रमशः य्, व्, र्, ल् आदेश होते हैं।
मेल परिणाम उदाहरण
इ/ई + असमान स्वरय्इति + आदि → इत्यादि
उ/ऊ + असमान स्वरव्सु + आगतम् → स्वागतम्
ऋ/ॠ + असमान स्वरर्मातृ + आज्ञा → मात्राज्ञा
लृ + असमान स्वरल्लृ + आकृतिः → लाकृतिः

5. अयादि सन्धि (Ayādi Sandhi)

सूत्र: एचोऽयवायावः नियम: ए, ओ, ऐ, औ के बाद यदि कोई भी स्वर आता है, तो उनके स्थान पर क्रमशः अय, अव, आय, आव आदेश होते हैं।
मेल परिणाम उदाहरण
ए + स्वरअय्ने + अनम् → नयनम्
ओ + स्वरअव्पो + अनः → पवनः
ऐ + स्वरआय्गै + अकः → गायकः
औ + स्वरआव्पौ + अनः → पावनः

6. पूर्व रूप सन्धि (Pūrva Rūpa)

सूत्र: एङः पदान्तादति नियम: यदि पद के अन्त में ए या ओ हो और उसके बाद ह्रस्व 'अ' आए, तो 'अ' का लोप होकर अवग्रह (ऽ) लग जाता है।
  • 👉 रामोऽस्ति (रामः अस्ति → रामोऽस्ति)
  • 👉 गुरोऽहम् (गुरुः अहम् → गुरोऽहम्)

7. पर रूप सन्धि (Para Rūpa)

सूत्र: एङि पररूपम् नियम: यदि अकारान्त उपसर्ग (प्र, उप आदि) के बाद ए/ओ वाली धातु आए, तो दोनों मिलकर पर स्वर (ए/ओ) हो जाते हैं।
  • 👉 प्र + एजते → प्रेजते
  • 👉 उप + ओषति → उपोषति

🔹 सारांश (Quick Summary)

सन्धि प्रकार सूत्र उदाहरण
दीर्घअकः सवर्णे दीर्घःविद्यालयः
गुणआद् गुणःगणेशः
वृद्धिवृद्धिरेचिसदैव
यण्इको यणचिस्वागतम्
अयादिएचोऽयवायावःनयनम्
पूर्व रूपएङः पदान्तादतिरामोऽस्ति
पर रूपएङि पररूपम्उपोषति

📘 अच् सन्धि के 50 उदाहरण

क्र. भेद विच्छेद (Split) सन्धि (Join) नियम
1दीर्घदैत्य + अरिःदैत्यारिःअ + अ = आ
2दीर्घपुस्तक + आलयःपुस्तकालयःअ + आ = आ
3दीर्घविद्या + अर्थीविद्यार्थीआ + अ = आ
4दीर्घमहा + आशयःमहाशयःआ + आ = आ
5दीर्घकवि + इन्द्रःकवीन्द्रःइ + इ = ई
6दीर्घगिरि + ईशःगिरीशःइ + ई = ई
7दीर्घमही + इन्द्रःमहीन्द्रःई + इ = ई
8दीर्घनदी + ईशःनदीशःई + ई = ई
9दीर्घभानु + उदयःभानूदयःउ + उ = ऊ
10दीर्घलघु + ऊर्मिःलघूर्मिःउ + ऊ = ऊ
11दीर्घवधू + उत्सवःवधूत्सवःऊ + उ = ऊ
12दीर्घपितृ + ऋणम्पितॄणम्ऋ + ऋ = ॠ
13गुणसुर + इन्द्रःसुरेन्द्रःअ + इ = ए
14गुणगण + ईशःगणेशःअ + ई = ए
15गुणमहा + इन्द्रःमहेन्द्रःआ + इ = ए
16गुणमहा + ईशःमहेशःआ + ई = ए
17गुणहित + उपदेशःहितोपदेशःअ + उ = ओ
18गुणजल + ऊर्मिःजलोर्मिःअ + ऊ = ओ
19गुणमहा + उत्सवःमहोत्सवःआ + उ = ओ
20गुणनव + ऊढानवोढाअ + ऊ = ओ
21गुणदेव + ऋषिःदेवर्षिःअ + ऋ = अर्
22गुणमहा + ऋषिःमहर्षिःआ + ऋ = अर्
23गुणतव + लृकारःतवल्कारःअ + लृ = अल्
24वृद्धिएक + एकम्एकैकम्अ + ए = ऐ
25वृद्धिसदा + एवसदैवआ + ए = ऐ
26वृद्धितव + ऐश्वर्यम्तवैश्वर्यम्अ + ऐ = ऐ
27वृद्धिमहा + ऐरावतःमहैरावतःआ + ऐ = ऐ
28वृद्धिवन + ओषधिःवनौषधिःअ + ओ = औ
29वृद्धिकृष्ण + औत्सुक्यम्कृष्णौत्सुक्यम्अ + औ = औ
30वृद्धिमहा + औषधम्महौषधम्आ + औ = औ
31यण्इति + आदिइत्यादिइ → य्
32यण्प्रति + उत्तरम्प्रत्युत्तरम्इ → य्
33यण्नदी + अम्बुनद्यम्बुई → य्
34यण्सु + आगतम्स्वागतम्उ → व्
35यण्अनु + अयःअन्वयःउ → व्
36यण्पितृ + आज्ञापित्राज्ञाऋ → र्
37यण्मातृ + उपदेशःमात्रुपदेशःऋ → र्
38यण्लृ + आकृतिःलाकृतिःलृ → ल्
39अयादिने + अनम्नयनम्ए → अय
40अयादिशे + अनम्शयनम्ए → अय
41अयादिभो + अनम्भवनम्ओ → अव
42अयादिपो + इत्रम्पवित्रम्ओ → अव
43अयादिगै + अकःगायकःऐ → आय्
44अयादिनै + इकीनायिकीऐ → आय्
45अयादिपौ + अकःपावकःऔ → आव्
46अयादिनौ + इकःनाविकःऔ → आव्
47पूर्वरूपको + अपिकोऽपिओ + अ → ओऽ
48पूर्वरूपवृक्षे + अस्मिन्वृक्षेऽस्मिन्ए + अ → एऽ
49पररूपप्र + एजतेप्रेजतेअ + ए → ए (पर)
50पररूपउप + ओषतिउपोषतिअ + ओ → ओ (पर)

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