“Class 9 Sanskrit Manika Chapter 11 – ‘Bharatenaasti Me Jeevanam Jeevanam’ का सम्पूर्ण सार, अभ्यास प्रश्न-उत्तर, एकपदेन उत्तर, पूर्णवाक्य, शब्दार्थ, श्लोकपूर्ति, व्याकरण, एवं महत्वपूर्ण अभ्यास यहाँ सरल भाषा में उपलब्ध है। परीक्षा के लिए सर्वोत्तम और व्यवस्थित हिंदी–English मिश्रित Notes तथा Solutions पढ़ें।”
Bharatenaasti Me Jeevanam Jeevanam – Class 9 Sanskrit Chapter 11 Notes, Questions Answers | भारतेनास्ति मे जीवनं जीवनम् समाधान
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| Bharatenaasti Me Jeevanam Jeevanam – Class 9 Sanskrit Chapter 11 Notes, Questions Answers | भारतेनास्ति मे जीवनं जीवनम् समाधान |
📘 Chapter 11 – भारतेनास्ति मे जीवनं जीवनम्
अभ्यास प्रश्न-उत्तर
🔷 1. एकपदेन उत्तरं लिखत
| क्रम | प्रश्न | उत्तर (एकपदेन) |
|---|---|---|
| (क) | मम भारतं कुत्र भाति ? | भूतले |
| (ख) | भारतं कस्य हासप्रभया पूरितम् ? | शुभ्रहैमाद्रिहासप्रभया |
| (ग) | धरण्यां किं मोदताम् ? | भारतम् |
| (घ) | मम अखिलं चेष्टितं कस्मै अर्पितं ? | भारताय |
| (ङ) | अन: कोऽपि कां न व्रजेत् ? | दीनताम् / हीनताम् |
| (च) | भारतं कया लालितं वर्तते ? | सत्कलया |
| (छ) | अहं किं नित्यमेव स्मरामि ? | भारतम् |
| (ज) | भारतं जगत् कीदृशैः चरित्रैः पावयति ? | विश्ववन्द्यैः |
🔷 2. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत
|(क)| अस्मिन् पाठे केषां पर्वतानाम् उल्लेखः अस्ति ?
➡ अस्मिन् पाठे विन्ध्य-सह्य-नील-अर्बुद-अरावली पर्वतानाम् उल्लेखः अस्ति।
|(ख)| भारतस्य पञ्चनदीनां नामानि लिखत।
➡ भारतस्य पञ्चनदीनां नामानि जाह्नवी, चन्द्रभागा, तुङ्गभद्रा, विपाशा, भानुजा (यमुना) च।
|(ग)| भारतदेशः संसारं कैः पावयति ?
➡ भारतदेशः संसारं विश्ववन्द्यैः चरित्रैः पावयति।
|(घ)| भारतं कैः झङ्कृतं वर्तते ?
➡ भारतं भारतीवल्लकीझङ्कृतैः झङ्कृतं वर्तते।
|(ङ)| मम भारतं कैः अन्वितं वर्तते ?
➡ मम भारतं धर्मार्थकाममोक्ष-भक्तिभाव-ज्ञानकर्मभिः अन्वितं वर्तते।
🔷 3. स्थूलाङ्कितपदानि आधारीकृत्य प्रश्ननिर्माणम्
| वाक्य | प्रश्न |
|---|---|
| मम भारतं पर्वतश्रेणिभिः सम्पूजितम्। | काभिः ? |
| भारते गङ्गायमुनादयः नद्यः। | काः ? |
| भारतं सत्कलाभिः लालितम्। | काभिः ? |
| भारतं विश्वं कुटुम्बवत् आलोकयति। | किम् ? |
| भिन्नाः संस्कृतयः सन्ति। | काः ? |
| जनाः अनेकमार्गैः प्रभुम् आराधयन्ति। | कैः ? |
| जनाः व्याधिना पीडिताः न भवेयुः। | केन ? |
| भारतेन मह्यं प्रेरणाः। | कस्मै ? |
| अहं अनेककर्माणि कुर्वन्। | कानि ? |
| चेष्टितानि भारताय अर्पितानि। | कस्मै ? |
🔷 4. यथानिर्देशम् उत्तरत
|(क)| क्रियापदम् — भाति
|(ख)| 'राजताम्' क्रिया का कर्ता — भारतम्
|(ग)| ‘मम’ अर्थे प्रयुक्तं पदम् — मे
|(घ)| ‘यदा-कदा’ का विलोम — नित्यम्
|(ङ)| ‘चेष्टितम्’ का विशेषण — अखिलम्
|(च)| ‘मामकम्’ पदस्य विशेष्य — भारतम्
🔷 5. अर्थत्रयात् सर्वोचितम् अर्थः
| वाक्य | सही अर्थ |
|---|---|
| भारतं वर्तते मे परं सम्बलम् | (iii) भारतं मम परमः आश्रयः अस्ति। |
| नात्र कोऽपि व्रजेत् दीनताम् | (i) अस्मिन् भारते कोऽपि नरः दीनः न भवेत्। |
| येन मां प्रदत्ताः शुभाः प्रेरणाः | (ii) भारतं मह्यं सदा शोभनाः प्रेरणाः ददाति। |
🔷 6. विशेषण-विशेष्य पदानि (Matching)
| विशेषणम् | विशेष्यम् |
|---|---|
| पावनम् | विश्वबन्धुत्वम् |
| सम्बलम् | भारतम् |
| एकम् | प्रभुम् |
| अखिलम् | चेष्टितम् |
| केनचित् | व्याधिना |
| विश्ववन्द्यैः | चरित्रैः |
🔷 7. शब्दार्थ मेलनम्
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अनारतम् | सततम् |
| भानुजा | यमुना |
| सौहित्यभूः | संवर्धनस्थली |
| वल्लकी | वीणा |
| भासितम् | प्रकाशितम् |
| पावितम् | पवित्रीकृतम् |
🔷 8. श्लोकपङ्क्ती पूरणम्
(क) विश्वमेकं कुटुम्बं समालोकयत्।
(ख) वेदभा भाषितं सत्कला लालितम्।
(ग) अर्बुद अरावली श्रेणि सम्पूजितम्।
(घ) जाह्रवी चन्द्रभागा जलैः पूरितम्।
(ङ) भूतले भाति मे अनारतं भारतम्।
🔷 9. शतृप्रत्ययान्तपदैः अन्वयपूरणम्
➡ पावनं विश्वबन्धुत्वम् उद्घोषयन्
➡ विश्ववन्द्यैः चरित्रैः जगत् पावयन्
➡ विश्वम् एकं कुटुम्बकम् समालोकयन्
➡ मे भारतम् भूतले अनारतं भाति।
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