NCERT Class 9 Sanskrit Manika Chapter 3 – Vijayatam Swadeshah का सम्पूर्ण समाधान यहाँ प्राप्त करें। सभी अभ्यास प्रश्न उत्तर, विलोम, पर्यायवाची, कारक, विशेषण, प्रश्न निर्माण, भावार्थ, कथाक्रम, व्याकरण बिंदुओं सहित विस्तृत और सटीक समाधान। विद्यार्थी, शिक्षक और परीक्षा तैयारी के लिए सर्वोत्तम Study Material।
Class 9 NCERT Sanskrit Vijayatam Swadeshah Chapter 3 के सभी अभ्यास प्रश्न—एकपदी उत्तर, पूर्णवाक्य, कारक चिन्ह, विलोम, विशेषण, मिलान, वक्ता-श्रोता, भाव सम्मिलन और कथाक्रम—सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत। Board Exam के लिए Best Sanskrit Notes, Easy & Accurate Answers.
Vijayatam Swadeshah Class 9 Sanskrit Chapter 3 – Question Answers | विजयतां स्वदेशः अभ्यास प्रश्न उत्तर
![]() |
| Vijayatam Swadeshah Class 9 Sanskrit Chapter 3 – Question Answers | विजयतां स्वदेशः अभ्यास प्रश्न उत्तर |
📘 Chapter 3 – विजयतां स्वदेशः
अभ्यास–कार्य
1. एकपदेन उत्तराणि लिखत
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| (क) प्रतापः कां रक्षितुम् असमर्थः आसीत् ? | मातृभूमिम् |
| (ख) कः दीर्घनिःश्वसिति ? | महाराणा प्रतापः |
| (ग) प्रतापं निराशं दृष्ट्वा के दुःखीयन्ति ? | भिल्लाः |
| (घ) सैनिकः स्वचक्षुषा किं द्रष्टुं न शक्रोति ? | स्वदेशदुर्दशाम् |
| (ङ) कीदृशे देशे जीवनं नरकायते ? | परतन्त्रे |
| (च) आत्मघातिनो जनाः कीदृशान् लोकान् व्रजन्ति ? | असूर्यान् |
| (छ) धनराशिं कः आनयति ? | भामाशाहः |
2. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| (क) प्रतापः किं श्रुत्वा लज्जाम् अनुभवति ? | प्रतापः जयघोषं श्रुत्वा लज्जाम् अनुभवति। |
| (ख) कैः देशस्य उपकारः क्रियते ? | वीरैः धीरैः देशस्य उपकारः क्रियते। |
| (ग) स्वतन्त्रतायाः उपायाः कथं चिन्तनीयाः ? | स्वतन्त्रतायाः उपायाः धैर्येण चिन्तनीयाः। |
| (घ) प्रतापः किमर्थं पर्याकुलः आसीत् ? | प्रतापः धनसेनयोः अभावे देशरक्षणाय पर्याकुलः आसीत्। |
| (ङ) परतन्त्रतायाः शृङ्खलाः कथं त्रोटनीयाः ? | परतन्त्रतायाः शृङ्खलाः स्वकीयैः लौहबाहुभिः त्रोटनीयाः। |
| (च) किं किं धन्यम् ? | राणा धन्यः, मन्त्री धन्यः, द्वयोः मेलनं धन्यम्, वयं सर्वे धन्याः, समयः धन्यः, पुण्यं दर्शनं च धन्यम् अस्ति। |
3. स्थूलपदानि दृष्ट्वा प्रश्ननिर्माणम्
| वाक्य | स्थूलपद | निर्मितः प्रश्नः |
|---|---|---|
| विचारमग्नः महाराणा प्रतापः शिलायाम् उपविष्टः आसीत्। | शिलायाम् | कुत्र |
| सर्वे भटाः देशरक्षायै बद्धपरिकराः आसन्। | देशरक्षायै | कस्यै |
| भिल्लाः मातृभूमेः दुर्दशां न द्रष्टुं शक्नुवन्ति। | मातृभूमेः | कस्याः |
| भामाशाहः धनराशिम् आदाय आगच्छति। | भामाशाहः | कः |
| परतन्त्रे देशे जीवनं नरकायते। | परतन्त्रे | कीदृशे |
| वीरगत्या मरणमेव कल्याणप्रदं भवति। | वीरगत्या | कया |
4. यथानिर्देशम् उत्तरत
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| (क) कर्तृपदम् ? | सहचराः |
| (ख) क्रियापदम् ? | लज्जयसे |
| (ग) "कीदृशः" इत्यस्य विशेष्यम् ? | समयः |
| (घ) 'कुत्र' अर्थे प्रयुक्तं पदम् ? | क्व |
| (ङ) 'स्वतन्त्रे' का विलोमपदम् ? | परतन्त्रे |
| (च) 'खङ्गेन' का विशेषणपद ? | मदीयेन |
5. पाठात् विलोमपदानि
| पदम् | विलोमपदम् |
|---|---|
| धन्यम् | अधन्यम् |
| दयालुः | निष्ठुरः |
| प्रसीदति | दुःखीयति |
| आत्मरक्षाम् | आत्मघातम् |
| परकीयैः | स्वकीयैः |
| मदीया | त्वदीया |
| याति | आयाति |
6. मञ्जूषातः विशेषणपदानि
मञ्जूषा – (मदीयेन, सङ्कटापन्ने, मेवाडमन्त्री, असूर्यान, स्वकीयैः, अटवीवासिनः, देशभक्तः)
| रिक्त स्थान | उत्तर |
|---|---|
| (क) ………… प्रतापः | देशभक्तः |
| (ख) ………… भामाशाहः | मेवाडमन्त्री |
| (ग) ………… काले | सङ्कटापन्ने |
| (घ) ………… खङ्गेन | मदीयेन |
| (ङ) ………… शिक्षा | अटवीवासिनः |
| (च) ………… लोकान् | असूर्यान |
| (छ) ………… लौहबाहुभिः | स्वकीयैः |
7. वक्ता–श्रोता निर्दिष्टः
| वाक्य | वक्ता | श्रोता |
|---|---|---|
| विजयतां महाराजः। | राजपुत्रः | प्रतापः |
| कथं मां लज्जयसे ? | प्रतापः | राजपुत्रः |
| स्वामिभाग्यानाम् अनुगन्तारो वयम्। | भटः | प्रतापः |
| मदीयेनैव खङ्गेन जहि माम्। | एकः सैनिकः | प्रतापः |
| नाहं दत्तां सम्पत्तिं पुनः आददामि। | प्रतापः | भामाशाहः |
| गृह्यतां भगवन्। देशं धर्मं च रक्षितुम्। | भामाशाहः | प्रतापः |
8. वाक्यानि – भावानां सम्मेलनम्
| वाक्य | भावः |
|---|---|
| अलं मम एतेन जीवितेन। | निराशा |
| वीरैः धीरैः बहु उपकृतं देशस्य। | धैर्यम् |
| आत्मघातिनो जनाः असूर्यान् लोकान् व्रजन्ति। | ग्लानिः |
| त्रोट्यतां पारतन्त्र्यशृङ्खला स्वकीयैः बहुभिः। | ओजः |
| धैर्येण स्वतन्त्रतायाः उपायाः चिन्तनीयाः। | उत्साहः |
9. कथाक्रमानुसारं वाक्यानि पुनर्लिखत
सही क्रम —
- महाराणा प्रतापः अरण्ये विचारमग्नः शिलायाम् उपविष्टः अस्ति।
- सः सेनायाः भोजनसामग्रयाः अभावेन खिन्नः अस्ति।
- अधुना सः स्वकीयैः प्राणैरेव स्वदेशं स्वतन्त्रं कर्तुम् इच्छति।
- सहचराः प्रतापस्य स्थितिं दृष्ट्वा व्याकुलाः भवन्ति।
- तदैव कश्चित् मेवाडराजपुत्रः तत्र प्रविशति।
- सः राजपुत्रः प्रतापस्य जयघोषं करोति।
- जयघोषं श्रुत्वा प्रतापः कथयति— “अयि भ्रातः! कथं जयघोषं कृत्वा मां लज्जयसे?”
- तदा राजपुत्रः वदति— “स्वदेशं स्वाधीनं कर्तुं भवता किं न सोढम्? विजेष्यते ननु भवान्।”
Vijayatam Swadeshah Class 9
Class 9 Sanskrit Chapter 3 Question Answers
विजयतां स्वदेशः प्रश्न उत्तर
Sanskrit Manika Class 9 Chapter 3 Solutions
Vijayatam Swadeshah Summary in Hindi
NCERT Sanskrit Class 9 Notes
Sanskrit Chapter 3 Vijayatam Swadeshah exercise
विजयतां स्वदेशः शब्दार्थ
Class 9 Sanskrit question answer pdf
Sanskrit Manika अध्याय 3 समाधान

