“NCERT Class 9 Sanskrit Manika – Chapter 2 ‘पाथेयम्’ का सम्पूर्ण सारांश, शब्दार्थ, व्याकरणिक विश्लेषण, अभ्यास प्रश्न-उत्तर (एकपदेन, पूर्णवाक्येन, पर्यायवाची, विलोम, रिक्तस्थान, श्लोकानुसार भावार्थ) यहाँ अत्यंत सुव्यवस्थित रूप में उपलब्ध हैं। Patheyam Class 9 Sanskrit Chapter 2 summary, meanings, translation, important questions, exam-oriented notes और PDF सामग्री छात्रों के अध्ययन हेतु सर्वोत्तम रूप से प्रस्तुत की गई है।”
Patheyam Class 9 Sanskrit Chapter 2 – Exercise Solutions, Question Answers | पाथेयम् अध्याय 2 सम्पूर्ण अभ्यास प्रश्न-उत्तर
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| Patheyam Class 9 Sanskrit Chapter 2 – Exercise Solutions, Question Answers | पाथेयम् अध्याय 2 सम्पूर्ण अभ्यास प्रश्न-उत्तर |
📘 Chapter 2 – पाथेयम् | अभ्यास प्रश्न-उत्तर
(Class 9 Sanskrit – Manika)
🔶 1. एकपदेन उत्तराणि (संस्कृतभाषया)
| क्रमांक | प्रश्न | उत्तर (एक पद) |
|---|---|---|
| (क) | पृथिव्यां कति रत्नानि ? | त्रीणि |
| (ख) | केषाम् उद्गमैः तरवः नसाः भवन्ति ? | फलानाम् |
| (ग) | के समृद्धिभिः अपि अनुद्धताः ? | सत्पुरुषाः |
| (घ) | परं भूषणं किम् ? | शीलम् |
| (ङ) | पयोदाः कैः भूरिविलम्बिनः ? | नवाम्बुभिः |
| (च) | कः कल्पितमेव जनयति ? | कल्पतरुः |
| (छ) | कस्मिन् परितुष्टे दारिद्रधनिभेदः नश्यति ? | मनसि |
🔶 2. पूर्णवाक्येन उत्तराणि
| प्रश्न | उत्तर (पूर्ण वाक्य) |
|---|---|
| (क) गौरवं कथं प्राप्यते ? | गौरवं दानात् प्राप्यते। |
| (ख) परोपकारिणां स्वभावः कीदृशः ? | परोपकारिणां स्वभावः नम्रः वर्तते। |
| (ग) शोकः किं किं नाशयति ? | शोकः धैर्यं, श्रुतं, सर्वं नाशयति। |
| (घ) दरिद्रः कः भवति ? | यस्य तृष्णा विशाला सः दरिद्रः भवति। |
| (ङ) कस्य किं विभूषणम् ? (त्रीणि) | ऐश्वर्यस्य – सुजनता; शौर्यस्य – वाक्संयमः; ज्ञानस्य – उपशमः। |
| (च) कः सर्वं प्रसूते ? | सतां संगः सर्वं प्रसूते। |
| (छ) कीदृशी भूमिः तोयं ददाति ? | खन्यमाना भूमिः तोयं ददाति। |
🔶 3. स्थूलाक्षरपदानी आधारं कृत्वा प्रश्नरचना
| मूलवाक्य | स्थूलाक्षरपदम् | प्रश्न |
|---|---|---|
| मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते। | पाषाणखण्डेषु | कुत्र / केषु ? |
| सद्धिः लीलया प्रोक्तं शिलालिखितमक्षरम्। | सद्धिः | कैः ? |
| मध्यमानात् काष्ठात् अग्निः जायते। | मध्यमानात् | किदृशात् ? |
| वैनतेयः अगच्छन् न गच्छति। | वैनतेयः | कः ? |
| ऐश्वर्यस्य विभूषणं सुजनता। | ऐश्वर्यस्य | कस्य ? |
| उत्साहवर्ता किञ्चिदसाध्यं नास्ति। | उत्साहवर्ता | केषां ? |
| शोकः धैर्यं नाशयति। | धैर्यं | किम् ? |
| महान् भवितुं सत्सङ्गतिः अपेक्षिता। | सत्सङ्गतिः | का ? |
🔶 4. यथानिर्देशम् उत्तराणि
| प्रश्न | अपेक्षित उत्तर |
|---|---|
| (क) ‘पिपीलकः’ इति कर्तृपदस्य क्रियापदं ? | याति |
| (ख) ‘मित्रम्’ इति पदस्य विलोमपदं ? | रिपुः |
| (ग) कर्तृपदम् – ‘मार्गारब्धाः सर्वयत्नाः फलन्ति’ ? | सर्वयत्नाः |
| (घ) ‘विशाला’ इति पदस्य विशेष्यपदं ? | तृष्णा |
| (ङ) विशेषणम् – ‘भूमिस्तोयं खन्यमाना ददाति’ ? | खन्यमाना |
| (च) ‘मेघानाम्’ इति पदस्य पर्यायः ? | पयोदानाम् |
🔶 5. विपरीतार्थकशब्दानां मेलनम्
| शब्द | उसका विलोम |
|---|---|
| अर्थवान् | दरिद्रः |
| उच्चैः | अधः |
| तृष्णा | परितोषः |
| सज्जनः | दुर्जनः |
| वल्कलैः | दुकूलैः |
| शोकः | हर्षः |
| रिपुः | मित्रम् |
🔶 6. द्वे शुद्धे पर्यायपदे चित्वा
| शब्द | शुद्ध पर्याय (दो) |
|---|---|
| तरुः | वृक्षः, महीरुहः |
| पयोदः | मेषः, वारिदः |
| पयोधिः | उदधिः, जलधिः |
| आपः | जलम्, वारि |
| भूमिः | पृथ्वी, वसुन्धरा |
🔶 7. सूक्तस्य शुद्धार्थचयनम्
| सूक्ति | उचितार्थः |
|---|---|
| (क) सद्धिस्तु लीलया… | (iii) सज्जनाः यत् किञ्चित् सामान्येन अपि कथयन्ति तत् पाषाणे लिखितम् इव भवति। |
| (ख) मार्गारब्धाः… | (ii) उचितमार्गे आरब्धाः चेष्टाः एव फलदायिकाः भवन्ति। |
| (ग) अगच्छन् वैनतेयः… | (iii) तीव्रगामी अपि यदि न चलति तर्हि पदमपि न गच्छति। |
🔶 8. भावानुसारं श्लोकपङ्क्तयः
| भावः | संबंधित श्लोकपंक्ति |
|---|---|
| दानम् | गौरवं प्राप्यते दानात्… |
| उत्साहः | सोत्साहानां नास्त्यसाध्यं नराणाम्। |
| सन्तोषः | वयमिह परितुष्टाः वल्कलैः त्वं दुकूलैः। |
| क्षमा | क्षमा बलवतां भूषणम्। |
| सत्सङ्गतिः | सतां हि सङ्गः सकलं प्रसूते। |
| परोपकारः | स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्। |
| शीलम् | सर्वेषामपि सर्वकारणमिदं शीलं परं भूषणम्। |
🔶 9. रिक्तस्थानपूरणम्
| वाक्य | पूरित रूप |
|---|---|
| अनुद्धताः … समृद्धिभिः। | अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः। |
| पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि … सुभाषितम्। | पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम्, अन्नम् सुभाषितम्। |
| सोत्साहानां नराणां नास्ति … | सोत्साहानां नराणां नास्ति असाध्यम्। |
| नास्ति … रिपुः। | नास्ति शोकसमः रिपुः। |
| स्थितिरुच्चैः … अधः स्थितिः… | स्थितिरुच्चैः पयोदानाम्, अधः स्थितिः पयोधीनाम्। |
| वयमिह परितुष्टाः … त्वम् … | वयमिह परितुष्टाः वल्कलैः, त्वम् दुकूलैः। |
| सद्धिः लीलया प्रोक्तं … | सद्धिः लीलया प्रोक्तं शिलालिखितमक्षरम्। |
🔶 10. अन्वयपूरणम् (अत्यंत व्यवस्थित)
तरवः फलाद्गमैः नम्राः भवन्ति,
घनाः नवाम्बुभिः भूरिविलम्बिनः भवन्ति,
सत्पुरुषाः समृद्धिभिः अपि अनुद्धताः भवन्ति,
परोपकारिणाम् एष एव स्वभावः भवति।
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