“NCERT Class 6 Sanskrit Chapter 11 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि | Subhashitani के सभी अभ्यास प्रश्न उत्तर, एक-पद, एक-वाक्य, चित्र-वर्णन, तालिकाएँ, सुभाषित पूर्ति, शब्दार्थ, सारांश और worksheet यहाँ सुव्यवस्थित रूप में उपलब्ध हैं। परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी सामग्री।”
Class 6 Deepakam Chapter 11 – prithivyam trini ratnani | Full Notes, Questions Answers
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| Class 6 Deepakam Chapter 11 – prithivyam trini ratnani | Full Notes, Questions Answers |
📘 अध्याय 11 – पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि
🟦 अभ्यास-कार्यम्
१. सुभाषित-पठन अभ्यास
एतानि सुभाषितानि — उच्चैः पठन्तु, स्मरन्तु, लिखन्तु।
२. एकपदेन उत्तराणि लिखन्तु
(नीचे दिए प्रश्नों का उत्तर एक पद में लिखें)
| क्रमांक | प्रश्न | उत्तरम् |
|---|---|---|
| (क) | पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति? | त्रीणि |
| (ख) | अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति? | लघुचेतसाम् |
| (ग) | कार्याणि केन सिध्यन्ति? | उद्यमेन |
| (घ) | विद्या किं ददाति? | विनयम् |
| (ङ) | जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी? | स्वर्गात् |
| (च) | लङ्का कीदृशी आसीत्? | स्वर्णमयी |
३. एकवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु
| प्रश्न | उत्तरम् |
|---|---|
| (क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि? | पृथिव्यां जलम् अन्नम् सुभाषितं च त्रीणि रत्नानि सन्ति। |
| (ख) उदारचरितानां भावः कः? | उदारचरितानां वसुधैव कुटुम्बकम् भवति। |
| (ग) मृगाः स्वयमेव कस्य मुखे न प्रविशन्ति? | मृगाः स्वयमेव सुप्तस्य सिंहस्य मुखे न प्रविशन्ति। |
| (घ) अभिवादनशीलस्य नित्यं कानि वर्धन्ते? | अभिवादनशीलस्य नित्यं आयुः विद्या यशः बलं च वर्धन्ते। |
| (ङ) मनुष्यः धनात् किम् आप्नोति? | मनुष्यः धनात् धर्मम् आप्नोति। |
| (च) परहस्तगतं धनं का उपयोगाय न भवति? | परहस्तगतं धनम् उत्पन्नेषु कार्येषु उपयोगाय न भवति। |
४. चित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि रचयन्तु
(क)
- वृक्षः छायां यच्छति।
- छाया शीतला भवति।
- वयं छायायां विश्रामं कुर्मः।
(ख)
- वृक्षः कर्कदम् यच्छति।
- कर्कदः उपयोगाय भवति।
- वयम् कर्कदेषु लिखामः।
(ग)
- वृक्षः काष्ठं यच्छति।
- काष्ठम् इन्धनाय भवति।
- भवननिर्माणे काष्ठस्य आवश्यकता भवति।
(घ)
- वृक्षः शुद्धं वायुं यच्छति।
- अनेन पर्यावरणस्य शुद्धिः भवति।
- शुद्धेन वायुना वयं स्वस्थाः भवामः।
(ङ)
- वृक्षः पुष्पाणि यच्छति।
- पुष्पाणि सुगन्धं प्रसारयन्ति।
- पुष्पाणां माला निर्मीयते।
५. ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति लिखन्तु
| प्रश्न | उत्तरम् |
|---|---|
| (क) त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नं पाषाणः च सन्ति? | न |
| (ख) किं धर्मेण सुखं प्राप्यते? | आम् |
| (ग) किं विद्या विनयं ददाति? | आम् |
| (घ) किम् अभिवादनशीलस्य विद्या वर्धते? | आम् |
| (ङ) किम् उद्यमेन कार्याणि नश्यन्ति? | न |
| (च) किं जन्मभूमि स्वर्गात् गरीयसी भवति? | आम् |
६. चित्रे दर्शितस्य नाम-लिङ्गम्
| नाम | लिङ्गम् |
|---|---|
| पुष्पम् | नपुंसकलिङ्गम् |
| सिंहः | पुल्लिङ्गम् |
| फलम् | नपुंसकलिङ्गम् |
| महिला | स्त्रीलिङ्गम् |
| छाया | स्त्रीलिङ्गम् |
| पुस्तकानि | नपुंसकलिङ्गम् |
७. सुभाषितं पूरयन्तु (वलये पदानि लिखित्वा)
विद्या ददाति विनयम्। विनयात् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनम् आप्नोति। धनात् धर्मम्। ततः सुखम्।
८. निर्देशानुसार पदानि लिखन्तु
(क) प्रथमान्त–पुल्लिङ्गपदानि
- उद्यमः
- विनयः
- निजः
- पराक्रमः
(ख) प्रथमान्त–स्त्रीलिङ्गपदानि
- वसुधा
- जननी
- विद्या
- बुद्धिः
- शक्तिः
(ग) प्रथमान्त–नपुंसकलिङ्गपदानि
- साहसम्
- धैर्यम्
- पत्रम्
- मूलम्
- धनम्
९. रिक्तस्थानानि पूरयन्तु
| प्रश्न | पूरक उत्तर |
|---|---|
| (क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि ______ सुभाषितम्। | जलम् अन्नम् |
| (ख) उदारचरितानां तु ______ कुटुम्बकं भवति। | वसुधैव |
| (ग) उद्यमेन हि ______ सिद्ध्यन्ति। | कार्याणि |
| (घ) अभिवादनशीलस्य वृद्धोपसेविनः ______ वर्धन्ते। | चत्वारि आयुः–विद्या–यशो–बलम् |
| (ङ) उद्यमः ______ पराक्रमः। | साहसं धैर्यं बुद्धिः वर्तन्ते |
| (च) विद्या ______ ददाति। | विनयम् |
| (छ) जननी जन्मभूमिश्च ______ गरीयसी भवति। | स्वर्गादपि |
१०. चित्राणि दृष्ट्वा उचितान् श्लोकांशान् लिखन्तु
| चित्र | उपयुक्त श्लोकांशः |
|---|---|
| (क) | उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि। |
| (ख) | पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम् अन्नम् सुभाषितम्। |
| (ग) | जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। |
| (घ) | पात्रत्वाद् धनम् आप्नोति। |
| (ङ) | उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्। |
Class 6 Sanskrit (Deepakam 1)
कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् भाग 1 (NCERT Solutions)
पाठ 1: वयं वर्णमालां पठामः
पाठ 2: एषः कः ? एषा का ? एतत् किम् ?
पाठ 3: अहं च त्वं च
पाठ 4: अहं प्रातः उत्तिष्ठामि
पाठ 5: शूराः वयं धीराः वयम्
पाठ 6: सः एव महान् चित्रकारः
पाठ 7: अतिथिदेवो भव
पाठ 8: बुद्धिः सर्वार्थसाधिकाः
पाठ 9: यो जानाति सः पण्डितः
पाठ 10: त्वम् आपणं गच्छ
पाठ 11: पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि
पाठ 12: आलस्यं हि मनुष्याणां ...
पाठ 13: सङ्ख्यागणना ननु सरला
पाठ 14: माधवस्य प्रियम् अङ्गम्
पाठ 15: वृक्षाः सत्पुरुषाः इव
नोट: जिस पाठ का हल देखना है, उस पर क्लिक करें।

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