न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्
✦ २. गीतम् (कथा-रूपेण हिन्दी भावार्थ सहित)
✦ ३. शब्दार्थ-सारणी (Word Meanings)
✦ ४. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १-३)
✦ ५. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ४-७)
✦ ६. योग्यताविस्तरः एवं परियोजनाकार्यम्
१. पाठ-परिचयः
आचार्यः: प्रियच्छात्राः! एतत् चित्रं पश्यन्तु । चित्रे किं किम् अस्ति ?
हिन्दी अर्थ: प्यारे छात्रों! यह चित्र देखो। चित्र में क्या-क्या है?
छात्रः: महोदय ! चित्रे वृक्षः अस्ति ।
हिन्दी अर्थ: महोदय! चित्र में पेड़ है।
अन्यः छात्रः: महोदय ! शृगालः अस्ति । द्राक्षाफलानि अपि सन्ति ।
हिन्दी अर्थ: महोदय! सियार (लोमड़ी) है। अंगूर भी हैं।
आचार्यः: बहु सम्यक् । शृगालः किं करोति ?
हिन्दी अर्थ: बहुत अच्छा। सियार क्या कर रहा है?
छात्रः: आचार्य ! शृगालः द्राक्षाफलानि खादितुम् इच्छति, किन्तु न शक्नोति ।
हिन्दी अर्थ: आचार्य! सियार अंगूर खाना चाहता है, परन्तु खा नहीं पा रहा है (असमर्थ है)।
आचार्यः: अहो! भवन्तः कथं जानन्ति ?
हिन्दी अर्थ: अहो! आप लोग कैसे जानते हैं?
छात्रः: महोदय ! वयम् एतां कथां मातृभाषया श्रुतवन्तः ।
हिन्दी अर्थ: महोदय! हमने यह कहानी अपनी मातृभाषा में सुनी है।
आचार्यः: बहु समीचीनम् । तर्हि संस्कृतभाषायाम् एतां कथां गीतरूपेण गायामः अभिनयं च कुर्मः ।
हिन्दी अर्थ: बहुत ठीक। तो संस्कृत भाषा में इस कहानी को गीत रूप में गाते हैं और अभिनय करते हैं।
छात्राः: अस्तु आचार्य ! कृपया पाठयतु ।
हिन्दी अर्थ: ठीक है आचार्य! कृपया पढ़ाइए।
२. गीतम् - एकः शृगालः
एकः शृगालः वनं गच्छति ।
पिपासा, तस्य बुभुक्षा
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति
सः वनं गच्छति, सः वनं गच्छति ।
तत्र गच्छति, किमपि न लभते
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते
सः श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते
किं च करोति ? सः किं च करोति ?
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति
स्वेदः जायते, तृषा जायते
तस्य स्वेदः जायते, तृषा जायते
किं च पश्यति ? सः किं च पश्यति ?
किं च पश्यति ? सः किं च पश्यति ?
पश्यति द्राक्षालतां
सः पश्यति द्राक्षाफलम्
उपरि उपरि लतासु दृश्यते च तत्फलम्
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते
किं च करोति ? सः किं च करोति ?
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति
त्रिवारम् उत्पतति, पुनः पुनः उत्पतति
स्वेदः जायते, तस्य श्रमः जायते
किं कथयति ? सः किं कथयति ?
आम्लं द्राक्षाफलम् आम्लं द्राक्षाफलम्
इत्येवं कथयति, सः पलायते
इत्येवं कथयति, सः पलायते ।।
३. शब्दार्थ-सारणी (Word Meanings)
| संस्कृत शब्दः | संस्कृत-पर्यायः | हिन्दी अर्थः | English Meaning |
|---|---|---|---|
| शृगालः | लोमशा | लोमड़ी | Fox |
| वनम् | काननम् / अरण्यं | जंगल | Forest |
| पिपासा | पातुम् इच्छा | प्यास | Thirst |
| बुभुक्षा | भोक्तुम् इच्छा | भूख | Hunger |
| किमपि | यत्किञ्चित् | कुछ भी | Anything |
| इतोऽपि | अतः परम् अपि | और भी | More than this |
| लभते | प्राप्नोति | पाता है | Gets |
| श्रान्तः | क्लान्तः | थका हुआ | Tired |
| खिन्नः | दुःखितः | खेद से युक्त | Sad |
| जायते | भवति | होता है | Becomes |
| वामतः | वामभागे | बायीं ओर | Towards left |
| दक्षिणतः | दक्षिणभागे | दाहिनी ओर | Towards right |
| अग्रतः | अग्रभागे | आगे | In front |
| पृष्ठतः | पृष्ठभागे | पीछे | Behind |
| स्वेदः | घर्मः | पसीना | Sweat |
| तृषा | पिपासा | प्यास | Thirst |
| द्राक्षालताम् | द्राक्षाफलस्य वल्लीम् | अंगूर की बेल को | Grape-vine climber |
| उपरि | ऊर्ध्वभागे | ऊपर | Above |
| दृश्यते | अवलोक्यते | देखा जाता है | Seen |
| अनुक्षणम् | क्षणाभ्यन्तरे | उसी क्षण | Immediately |
| रसः | लालारसः / मुखस्रावः | लार | Saliva |
| एकवारम् | सकृत् | एक बार | Once |
| द्विवारम् | वारद्वयम् / द्विः | दो बार | Twice |
| उत्पतति | कूर्दते | कूदता है | Jumps |
| पुनः पुनः | भूयो भूयः | बार-बार | Frequently |
| कथयति | वदति | कहता है | Tells |
| आम्लम् | आम्लरसयुक्तम् | खट्टा | Sour |
| द्राक्षाफलम् | मृद्वीकाफलम् | अंगूर | Grapes |
| पलायते | अन्यत्र धावति | भाग जाता है | Runs away |
४. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १-३)
१. एकः शृगालः इति गीतस्य साभिनयं कक्षायां गानं कुर्वन्तु।
(हिन्दी: कक्षा में सभी छात्र अभिनय के साथ इस गीत का गान करें।)
२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन पदद्वयेन वा उत्तरं लिखन्तु—
(हिन्दी: नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक या दो शब्दों में लिखें—)
• (क) कः वनं गच्छति ? (कौन वन जाता है?) ➔ शृगालः
• (ख) शृगालः कां पश्यति ? (सियार क्या देखता है?) ➔ द्राक्षालताम्
• (ग) शृगालस्य मुखे किं जायते? (सियार के मुख में क्या आता है?) ➔ रसः
• (घ) द्राक्षालतायां शृगालः किं पश्यति ? (अंगूर की बेल पर सियार क्या देखता है?) ➔ द्राक्षाफलम्
• (ङ) द्राक्षाफलं कुत्र दृश्यते? (अंगूर कहाँ दिखाई देते हैं?) ➔ उपरि
• (च) किं शृगालः पुनः पुनः उत्पतति ? (क्या सियार बार-बार कूदता है?) ➔ आम् (हाँ)
• (छ) किं शृगालः द्राक्षाफलं प्राप्नोति ? (क्या सियार अंगूर प्राप्त करता है?) ➔ न (नहीं)
३. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु—
(हिन्दी: नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर पूरे वाक्यों में लिखें—)
• (क) शृगालः कथं वनं गच्छति ? (सियार कैसे वन जाता है?)
➔ शृगालः पिपासया बुभुक्षया च वनं गच्छति । (सियार प्यास और भूख से वन जाता है।)
• (ख) वनं गत्वा शृगालस्य किं जायते? (वन जाकर सियार को क्या होता है?)
➔ वनं गत्वा शृगालः श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते । (वन जाकर सियार थक जाता है और दुखी हो जाता है।)
• (ग) शृगालः द्राक्षाफलं कुत्र पश्यति ? (सियार अंगूर कहाँ देखता है?)
➔ शृगालः द्राक्षाफलम् उपरि उपरि लतासु पश्यति । (सियार अंगूरों को बेलों पर ऊपर देखता है।)
• (घ) द्राक्षाफलं दृष्ट्वा कस्य मुखे रस: जायते? (अंगूर देखकर किसके मुख में लार आती है?)
➔ द्राक्षाफलं दृष्ट्वा शृगालस्य मुखे रस: जायते । (अंगूर देखकर सियार के मुख में लार आती है।)
• (ङ) अन्ते शृगालः किं वदति ? (अंत में सियार क्या कहता है?)
➔ अन्ते शृगालः "आम्लं द्राक्षाफलम् आम्लं द्राक्षाफलम्" इति वदति । (अंत में सियार कहता है कि अंगूर खट्टे हैं।)
५. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ४-७)
अत्र इदम् अवधेयम् (यहाँ यह ध्यान दें)
अस्मिन् पाठे जायते, लभते, पलायते इति एतादृशानि क्रियापदानि सन्ति ।
एतादृशानां क्रियापदानां रूपाणि लट्-लकारे कथं भवन्ति इति पश्यामः -
(हिन्दी: इस पाठ में 'जायते, लभते, पलायते' जैसी क्रियाएँ आई हैं। इनके रूप लट्-लकार (वर्तमान काल) में कैसे चलते हैं, आइए देखते हैं -)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमः पुरुषः | लभते | लभेते | लभन्ते |
| मध्यमः पुरुषः | लभसे | लभेथे | लभध्वे |
| उत्तमः पुरुषः | लभे | लभावहे | लभामहे |
४. मञ्जूषां दृष्ट्वा रिक्तस्थानेषु उचितक्रियापदानि लिखन्तु:
(हिन्दी: उचित क्रियापदों को लिखकर तालिका पूरी करें:)
(क) वन्द् धातुः (वन्दना करना)
| वन्दते | वन्देते | वन्दन्ते |
| वन्दसे | वन्देथे | वन्दध्वे |
| वन्दे | वन्दावहे | वन्दामहे |
(ख) पलाय् धातुः (भागना)
| पलायते | पलायेते | पलायन्ते |
| पलायसे | पलायेथे | पलायध्वे |
| पलाये | पलायावहे | पलायामहे |
(ग) जन् धातुः (उत्पन्न होना/होना - जायते)
| जायते | जायेते | जायन्ते |
| जायसे | जायेथे | जायध्वे |
| जाये | जायावहे | जायामहे |
५. उदाहरणानुसारम् एकवचनरूपं दृष्ट्वा द्विवचन-बहुवचनरूपाणि लिखन्तु:
(हिन्दी: उदाहरण के अनुसार एकवचन को देखकर द्विवचन और बहुवचन रूप लिखें:)
• कम्प् (कम्पते) ➔ कम्पेते ➔ कम्पन्ते
• वर्ध् (वर्धते) ➔ वर्धेते ➔ वर्धन्ते
• वर्त् (वर्तसे) ➔ वर्तेथे ➔ वर्तध्वे
• प्र + काश् (प्रकाशते) ➔ प्रकाशेते ➔ प्रकाशन्ते
• वन्द् (वन्दे) ➔ वन्दावहे ➔ वन्दामहे
• याच् (याचते) ➔ याचेते ➔ याचन्ते
• लज्ज् (लज्जसे) ➔ लज्जेथे ➔ लज्जध्वे
• वीक्ष् (वीक्षते) ➔ वीक्षेते ➔ वीक्षन्ते
• सेव् (सेवे) ➔ सेवावहे ➔ सेवांमहे
• वन्द् (वन्दसे) ➔ वन्देथे ➔ वन्दध्वे
• शुभ् (शोभते) ➔ शोभेते ➔ शोभन्ते
६. उदाहरणानुसारं वाक्यद्वयं लिखन्तु:
(हिन्दी: उदाहरण के अनुसार दो-दो वाक्य बनाएँ:)
यथा – शत्रुः (पलाय्) ➔ शत्रुः पलायते
चोराः (पलाय्) ➔ चोराः पलायन्ते
• (क) वृक्षः (वर्ध्) ➔ वृक्षः वर्धते
बालाः (वर्ध्) ➔ बालाः वर्धन्ते
• (ख) छात्रः (वन्द्) ➔ छात्रः वन्दते
भक्ताः (वन्द्) ➔ भक्ताः वन्दन्ते
• (ग) वैद्यः (वीक्ष्) ➔ वैद्यः वीक्षते
प्रेक्षकाः (वीक्ष्) ➔ प्रेक्षकाः वीक्षन्ते
• (घ) कर्मचारी (सेव्) ➔ कर्मचारी सेवते
महिलाः (सेव्) ➔ महिलाः सेवन्ते
• (ङ) वृक्षः (कम्प्) ➔ वृक्षः कम्पते
रुग्णाः (कम्प्) ➔ रुग्णाः कम्पन्ते
७. उदाहरणं दृष्ट्वा वाक्यानि उचितरूपैः पूरयन्तु:
(हिन्दी: उचित धातु रूप का प्रयोग करके वाक्यों को पूरा करें:)
• (क) शुनकं दृष्ट्वा बालकस्य भयं (जाय्) ➔ शुनकं दृष्ट्वा बालकस्य भयं जायते ।
• (ख) मूषकः मार्जारं दृष्ट्वा (पलाय्) ➔ मूषकः मार्जारं दृष्ट्वा पलायते ।
• (ग) रात्रिकाले मार्गदीपाः (प्रकाश) ➔ रात्रिकाले मार्गदीपाः प्रकाशन्ते ।
• (घ) अहं देवं (वन्द्) ➔ अहं देवं वन्दे ।
• (ङ) त्वं किमर्थं (लज्ज्) ➔ त्वं किमर्थं लज्जसे ।
• (च) वयं देशं (सेव्) ➔ वयं देशं सेवामहे ।
६. योग्यताविस्तरः एवं परियोजनाकार्यम्
✦ योग्यताविस्तर: (श्लोकाः)
श्लोकान् उच्चैः पठन्तु, अर्थम् अवगच्छन्तु च। (श्लोकों को जोर से पढ़ें और अर्थ समझें।)
प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः ।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति ।।१।।
हिन्दी अर्थ: नीच (निम्न श्रेणी के) लोग विघ्न (बाधा) के डर से कार्य आरम्भ ही नहीं करते। मध्यम श्रेणी के लोग कार्य आरम्भ करके विघ्न आने पर बीच में ही रुक जाते हैं। परन्तु उत्तम (श्रेष्ठ) लोग बार-बार विघ्नों द्वारा रोके जाने पर भी आरम्भ किए गए कार्य को नहीं छोड़ते।
गच्छन् पिपीलको याति योजनानां शतान्यपि ।
अगच्छन् वैनतेयोऽपि पदमेकं न गच्छति ।।२।।
हिन्दी अर्थ: चलती हुई चींटी (निरन्तर प्रयास करने पर) सैकड़ों योजन की दूरी पार कर लेती है। परन्तु न चलता हुआ गरुड़ (तेज उड़ने वाला पक्षी) एक कदम भी आगे नहीं जा पाता।
✦ परियोजनाकार्यम्
त्वं जीवने कदाचित् अभीष्टं वस्तु न लभसे। कदाचित् तव लक्ष्यपूर्तिः न भवति । तदा त्वं किं करोषि, किं च चिन्तयसि इति संस्कृतभाषया / स्वभाषया प्रसङ्गसहितं लिख।
(हिन्दी: तुम जीवन में कभी इच्छित वस्तु नहीं पाते हो। कभी तुम्हारा लक्ष्य पूरा नहीं होता है। तब तुम क्या करते हो और क्या सोचते हो, इसे संस्कृत या अपनी भाषा में प्रसंग सहित लिखो।)
कार्यकलापः
मुखेन द्राक्षाफलस्य ग्रहणम् – इति क्रीडां कारयामः । उपरि रज्ज्वा फलस्य मधुरस्य वा बन्धनं कृत्वा तस्याः आकर्षण-शिथिलीकरणैः अध्यापकः क्रीडाङ्गणे क्रीडां कारयति । छात्राः मुखस्य साहाय्येन ग्रहीतुं प्रयत्नं कुर्वन्ति ।
(हिन्दी: 'मुँह से अंगूर पकड़ना' - यह खेल करवाएँ। ऊपर रस्सी से किसी फल या मिठाई को बाँधकर उसे खींचने और ढीला छोड़ने के द्वारा अध्यापक खेल के मैदान में यह खेल कराएँ। छात्र (बिना हाथ लगाए) केवल मुँह की सहायता से उसे पकड़ने का प्रयास करें।)

