वन्दे भारतमातरम्
✦ २. शब्दार्थ-सारणी (Word Meanings) (संस्कृत, हिन्दी व अंग्रेजी अर्थ)
✦ ३. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १ तः ४)
✦ ४. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ५ तः ८)
१. मूल पाठः एवं भावार्थः
बालकः: अम्ब! वयं विभिन्नेषु कार्यक्रमेषु, आकाशवाण्यां, शालायां च ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं बहुत्र शृणुमः। किन्तु अस्य अर्थं न जानीमः।
हिन्दी अर्थ: बालक - माँ! हम विभिन्न कार्यक्रमों में, रेडियो (आकाशवाणी) पर, और स्कूल में 'वन्दे मातरम्' गीत बहुत जगह सुनते हैं। किन्तु इसका अर्थ नहीं जानते।
बालिका: मातः! अस्य कः अर्थः? ‘इदं गीतं कः लिखितवान्’ इत्यपि मम जिज्ञासा अस्ति।
हिन्दी अर्थ: बालिका - माँ! इसका क्या अर्थ है? 'यह गीत किसने लिखा है' यह जानने की भी मेरी उत्सुकता है।
बालकः: मातः! इदं गीतं कस्यां भाषायाम् अस्ति?
हिन्दी अर्थ: बालक - माँ! यह गीत किस भाषा में है?
माता: पुत्रि! एतत् गीतं संस्कृतं बाङ्ग्ला च इति भाषाद्वये वर्तते।
हिन्दी अर्थ: माँ - बेटी! यह गीत संस्कृत और बांग्ला, इन दोनों भाषाओं में है।
बालकः: मातः! अस्मिन् गीते वर्ण्यः विषयः कः अस्ति?
हिन्दी अर्थ: बालक - माँ! इस गीत में वर्णित (बताने योग्य) विषय क्या है?
माता: पुत्र! अस्मिन् गीते भारतमातुः स्वरूपस्य रम्यं वर्णनम् अस्ति। वत्सौ! महान् देशभक्तः बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः १८८२ तमे वर्षे ‘आनन्दमठः’ इति नामकम् उपन्यासम् लिखितवान्। ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं तस्मिन् एव उपन्यासे वर्तते। ‘वन्दे मातरम्’ इत्यस्य अर्थः अस्ति यत् ‘अहं मातः वन्दनं करोमि’ इति।
हिन्दी अर्थ: माँ - बेटे! इस गीत में भारतमाता के स्वरूप का सुन्दर वर्णन है। बच्चों! महान देशभक्त बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1882 में 'आनन्दमठ' नामक उपन्यास लिखा था। 'वन्दे मातरम्' गीत उसी उपन्यास में है। 'वन्दे मातरम्' का अर्थ है 'हे माँ! मैं वंदना (प्रणाम) करता हूँ'।
एषा अस्माकं वत्सला भारतमाता। अहो अस्माकं भारतमातुः माहात्म्यम्! साक्षात् पर्वतराजः हिमालयः मुकुटरूपेण अस्याः मस्तके शोभते। अस्याः चरणौ प्रक्षालयति स्वयं रत्नाकरः समुद्रः। भारतभूमौ महेन्द्रः, मलयः, सह्यः, रैवतकः, विन्ध्यः, अरावलिः इत्यादयः श्रेष्ठाः पर्वताः विराजन्ते। अत्रैव गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धुः, ब्रह्मपुत्रः, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी इत्यादयः पवित्राः नद्यः प्रवहन्ति। नद्यः अपि अस्माकं मातरः इव।
हिन्दी अर्थ: यह हमारी स्नेहमयी भारतमाता है। अहो! हमारी भारतमाता की महिमा कितनी महान है! साक्षात् पर्वतों का राजा हिमालय मुकुट के रूप में इनके मस्तक पर सुशोभित है। स्वयं समुद्र (रत्नाकर) इनके चरणों को धोता है। भारत भूमि पर महेन्द्र, मलय, सह्याद्रि, रैवतक, विन्ध्याचल, अरावली आदि श्रेष्ठ पर्वत विराजमान हैं। यहीं पर गंगा, यमुना, सरस्वती, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि पवित्र नदियाँ बहती हैं। नदियाँ भी हमारी माताओं के समान ही हैं।
अयोध्या, मथुरा, हरिद्वारम्, काशी, काञ्ची, अवन्तिका, वैशाली, द्वारिका, पुरी, गया, प्रयागः, पाटलीपुत्रं, विजयनगरम्, इन्द्रप्रस्थं, सोमनाथः, अमृतसरः इत्यादीनि मङ्गलानि तीर्थक्षेत्राणि नगराणि च भारतभूमौ एव सुशोभन्ते। एतेषां तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयितुं विविधभ्यः प्रदेशेभ्यः असंख्याः जनाः आगच्छन्ति।
हिन्दी अर्थ: अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, काञ्ची, अवन्तिका (उज्जैन), वैशाली, द्वारिका, पुरी, गया, प्रयाग, पाटलिपुत्र (पटना), विजयनगर, इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली), सोमनाथ, अमृतसर आदि मंगलकारी तीर्थस्थल और नगर भारत भूमि पर ही सुशोभित हैं। इन तीर्थस्थलों की धूल (पवित्र मिट्टी) को मस्तक पर लगाने के लिए विभिन्न प्रदेशों से असंख्य लोग आते हैं।
बालकः: अम्ब! एतस्य गीतस्य किं वैशिष्ट्यम्?
हिन्दी अर्थ: बालक - माँ! इस गीत की क्या विशेषता है?
माता: बालौ! स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने सर्वे देशभक्ताः एतत् गीतं मन्त्रम् इव गायन्ति स्म। सम्प्रति अपि इदं गीतं श्रुत्वा गीत्वा च वयं सर्वे भारतीयाः प्रेरिताः भवामः।
हिन्दी अर्थ: माँ - बच्चों! स्वतंत्रता आन्दोलन में सभी देशभक्त इस गीत को मंत्र की तरह गाते थे। आज भी इस गीत को सुनकर और गाकर हम सभी भारतीय प्रेरित होते हैं।
बालिका: मातः! ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतस्य अर्थः इतिहासः च कियान् महान् अस्ति खलु! अम्ब! आवाम् अस्माकं राष्ट्रध्वजस्य विषये अपि किञ्चित् ज्ञातुम् इच्छावः।
हिन्दी अर्थ: बालिका - माँ! 'वन्दे मातरम्' गीत का अर्थ और इतिहास सचमुच कितना महान है! माँ! हम दोनों हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विषय में भी कुछ जानना चाहते हैं।
माता: साधु, अधुना वयं भारतमातुः त्रिवर्णध्वजस्य च विषये जानीमः।
हिन्दी अर्थ: माँ - बहुत अच्छा, अब हम भारतमाता के तिरंगे झंडे के विषय में जानेंगे।
भारतमातुः हस्ते विलसति त्रिवर्णयुतः राष्ट्रध्वजः। अहो अस्य शोभा! अस्मिन् राष्ट्रध्वजे केशरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः विराजन्ते। ध्वजस्य मध्ये सुन्दरं नीलवर्णं चक्रमपि शोभते। ध्वजे विराजमानाः वर्णाः चक्रं च विशिष्टं सन्देशं प्रयच्छन्ति।
हिन्दी अर्थ: भारतमाता के हाथ में तीन रंगों वाला राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) सुशोभित है। अहो इसकी शोभा! इस राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया, सफेद और हरा रंग विराजमान हैं। ध्वज के बीच में एक सुन्दर नीले रंग का चक्र भी सुशोभित है। ध्वज में विराजमान रंग और चक्र एक विशेष संदेश देते हैं।
त्रिवर्णध्वजस्य ऊर्ध्वभागे विराजते केशरवर्णः। एषः वर्णः त्यागपरम्परायाः शौर्यपरम्परायाः च सूचकः अस्ति। ये भारतमातुः आजीवनं सेवां कृतवन्तः, देशस्य स्वतन्त्रतां प्राप्तुं सङ्घर्षं स्वप्राणान् अर्पितवन्तः च, तेषां वीराणां बलिदानं सूचयति एषः वर्णः। ‘जयतु सैनिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थित: अयं केशरवर्णः।
हिन्दी अर्थ: तिरंगे झंडे के सबसे ऊपरी भाग में केसरिया रंग विराजमान है। यह रंग त्याग की परम्परा और शूरवीरता (बहादुरी) का सूचक है। जिन्होंने भारतमाता की जीवन भर सेवा की, देश की स्वतंत्रता पाने के लिए संघर्ष में अपने प्राण अर्पित कर दिए, उन वीरों के बलिदान को यह रंग सूचित करता है। झंडे में स्थित यह केसरिया रंग हमें 'जय जवान' (सैनिकों की जय हो) कहने की प्रेरणा देता है।
मध्ये स्थितः श्वेतवर्णः शान्तेः सत्यस्य च द्योतकः अस्ति। अणुशास्त्रे, सङ्गणकशास्त्रे, चिकित्साशास्त्रे, अन्तरिक्षशास्त्रे, आयुधशास्त्रे इत्यादिषु विज्ञानस्य विभिन्नेषु क्षेत्रेषु भारतीयैः वैज्ञानिकैः महत् यशः प्राप्तम् अस्ति। वैज्ञानिकानां तत् धवलं यशः धवलवर्णरूपेण राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति। भारतीयं विज्ञानं शान्तिं प्रगतिं सुरक्षां च परिपोषयति। ‘जयतु वैज्ञानिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजमध्यस्थः अयं धवलवर्णः।
हिन्दी अर्थ: बीच में स्थित सफेद रंग शांति और सत्य का प्रतीक है। परमाणु विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, चिकित्सा, अंतरिक्ष और हथियार निर्माण आदि विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय वैज्ञानिकों ने महान यश प्राप्त किया है। वैज्ञानिकों का वह उज्ज्वल (सफेद) यश झंडे के बीच में सफेद रंग के रूप में सुशोभित है। भारतीय विज्ञान शांति, प्रगति और सुरक्षा को बढ़ावा देता है। झंडे के बीच में स्थित यह सफेद रंग हमें 'जय विज्ञान' कहने की प्रेरणा देता है।
कृषकबान्धवाः अस्माकं भारतभूमिं सर्वदा स्व-स्वेदबिन्दुभिः सिञ्चन्ति। एतेषां परिश्रमेण एव भारतभूमिः हरितवर्णमयी समृद्धा सस्यश्यामला च सञ्जाता। भारतमातुः समृद्धेः एषा आभा हरितवर्णरूपेण अस्माकं राष्ट्रध्वजे विराजते। ‘जयतु कृषकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थितः एषः हरितवर्णः।
हिन्दी अर्थ: हमारे किसान भाई भारत भूमि को हमेशा अपने पसीने की बूंदों से सींचते हैं। उनके परिश्रम से ही भारत भूमि हरे रंग से भरी, समृद्ध और फसलों से हरी-भरी (सस्यश्यामला) हुई है। भारतमाता की समृद्धि की यह चमक हरे रंग के रूप में हमारे राष्ट्रीय ध्वज (निचले हिस्से) में विराजमान है। झंडे में स्थित यह हरा रंग हमें 'जय किसान' कहने की प्रेरणा देता है।
ध्वजे विराजमानस्य घननीलवर्णस्य चक्रस्य नाम धर्मचक्रम् इति। अस्मिन् चक्रे चतुर्विंशतिः अराः सन्ति। एतत् चक्रं ‘चलनीयं कर्तव्यपथे वै, न विरम, सततं चल’ इति भावं बोधयति। सूर्यः विरामं विना नित्यं सञ्चरति। नदी कष्टानि सहमाना अपि ध्येयं प्रति नित्यं प्रवहति। इदं चक्रं ‘जीवने श्रान्तेः, आलस्यस्य प्रमादस्य च स्थानं न भवतु’ इति सन्देशं प्रयच्छति।
हिन्दी अर्थ: ध्वज में विराजमान गहरे नीले रंग के चक्र का नाम 'धर्मचक्र' (अशोक चक्र) है। इस चक्र में चौबीस (24) तीलियाँ (Spokes) हैं। यह चक्र "कर्तव्य के मार्ग पर हमेशा चलते रहो, रुको मत, निरंतर चलो" का भाव सिखाता है। सूर्य बिना रुके हमेशा चलता रहता है। नदी कष्टों को सहते हुए भी अपने लक्ष्य की ओर हमेशा बहती रहती है। यह चक्र संदेश देता है कि ‘जीवन में थकान, आलस्य और असावधानी (लापरवाही) का कोई स्थान नहीं होना चाहिए’।
वयं सर्वेऽपि धन्याः यत् अस्यां पवित्रभूम्यां जन्म प्राप्तवन्तः। वयं पवित्रायाः भारतमातुः नित्यं वन्दनं कुर्मः अस्याः गौरववर्धनार्थं च प्रयत्नं कुर्मः। आगच्छन्तु मिलित्वा सर्वे गायाम: –
हिन्दी अर्थ: हम सभी धन्य हैं कि हमने इस पवित्र भूमि पर जन्म प्राप्त किया है। हम पवित्र भारतमाता की प्रतिदिन वंदना करते हैं और इसके गौरव (सम्मान) को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। आओ, मिलकर सब गाएँ -
वयं बालका भारतभक्ताः वयं बालिका भारतभक्ताः।
वयं हि सर्वे भारतभक्ताः पृथ्वीं स्वर्गं जेतुं शक्ताः॥
२. शब्दार्थ-सारणी (Word Meanings)
| संस्कृत शब्दः | संस्कृत-पर्यायः | हिन्दी अर्थः | English Meaning |
|---|---|---|---|
| वन्दे | प्रणामं करोमि | प्रणाम करता/ती हूँ | I greet |
| आलिङ्ग्य | आलिङ्गनं कृत्वा | गले लगाकर | Having embraced |
| बहुत्र | बहुषु स्थानेषु | अनेक स्थानों पर | In many places |
| शृणुमः | श्रवणं कुर्मः | हम सुनते हैं | We listen |
| जिज्ञासा | ज्ञातुम् इच्छा | जानने की इच्छा | Curiosity |
| उपन्यासम् | बृहत्कथारूपम् | उपन्यास को | Novel |
| रम्यम् | सुन्दरम् | रमणीय / सुन्दर | Pleasant |
| आन्दोलने | क्रान्तौ | आन्दोलन में | In the movement |
| वत्सला | स्नेहयुक्ता | स्नेहमयी | Loving |
| माहात्म्यम् | महत्त्वम् | महिमा / महानता | Greatness |
| मुकुटरूपेण | किरीटरूपेण | मुकुट के रूप में | As a crown |
| पर्वतराजः | पर्वतानां राजा | पर्वतों का राजा | King of mountains |
| रत्नाकरः | समुद्रः | सागर / समुद्र | Sea / Ocean |
| तीर्थक्षेत्राणि | पुण्यक्षेत्राणि | तीर्थस्थल | Holy places |
| धूलिम् | क्षितिकणम् | धूल / मिट्टी | Dust |
| ललाटे | भाले | माथे पर | On the forehead |
| विराजमानः | शोभायमानः | सुशोभित होता हुआ | Shining |
| सूचकः | बोधकः | सूचित करने वाला | Indicator |
| केशरवर्णः | केसरवर्णः | केसरिया रंग | Saffron colour |
| प्राप्तुम् | लब्धुम् | पाने के लिए | To get |
| वक्तुम् | भाषितुम् | बोलने के लिए | To speak |
| कृषक-बान्धवाः | कृषीवल-बान्धवाः | किसान भाई | Our dear farmers |
| स्वेदबिन्दुभिः | घर्मस्य जलकणैः | पसीने की बूंदों से | By sweat-drops |
| सिञ्चन्ति | सिञ्चनं कुर्वन्ति | सींचते हैं | Sprinkle |
| सस्यश्यामला | सस्यैः घनश्यामा | फसलों से हरी-भरी | Covered with flora |
| आभा | कान्तिः | चमक | Lustre |
| धवलम् | शुक्लम् | सफेद | White |
| अराः | चक्रस्य यष्टिकाः | तीलियाँ | Spokes of a wheel |
| श्रान्तेः | क्लान्तेः | थकान का | Of tiredness |
| प्रमादस्य | अनवधानतायाः | असावधानी का | Of carelessness |
| जेतुम् | विजयं प्राप्तुम् | जीतने के लिए | To win |
३. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १-४)
१. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन पदद्वयेन वा उत्तरं लिखन्तु:
• (क) पर्वतराजः कः? ➔ हिमालयः
• (ख) समुद्रः कस्याः चरणौ प्रक्षालयति? ➔ भारतमातुः
• (ग) त्रिवर्णयुतः ध्वजः कुत्र विलसति? ➔ भारतमातुः हस्ते
• (घ) ध्वजस्थितः केशरवर्णः अस्मान् किं वक्तुं प्रेरयति? ➔ 'जयतु सैनिकः'
• (ङ) कृषकबान्धवाः भारतभूमिं कैः सिञ्चन्ति? ➔ स्वेदबिन्दुभिः
• (च) केषां धवलं यशः राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति? ➔ वैज्ञानिकानाम्
• (छ) सूर्यः कं विना नित्यं सञ्चरति? ➔ विरामं
२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु:
• (क) पवित्राः नद्यः काः?
➔ गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धुः, ब्रह्मपुत्रः, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी इत्यादयः पवित्राः नद्यः सन्ति।
• (ख) विविधभ्यः प्रदेशेभ्यः जनाः किमर्थम् आगच्छन्ति?
➔ तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयितुं विविधभ्यः प्रदेशेभ्यः जनाः आगच्छन्ति।
• (ग) धर्मचक्रं कं भावं बोधयति?
➔ धर्मचक्रं ‘चलनीयं कर्तव्यपथे वै, न विरम, सततं चल’ इति भावं बोधयति।
• (घ) कृषकबान्धवानां परिश्रमेण भारतभूमिः कथं सञ्जाता?
➔ कृषकबान्धवानां परिश्रमेण भारतभूमिः हरितवर्णमयी समृद्धा सस्यश्यामला च सञ्जाता।
• (ङ) विज्ञानस्य केषु क्षेत्रेषु भारतीयैः यशः प्राप्तम्?
➔ अणुशास्त्रे, सङ्गणकशास्त्रे, चिकित्साशास्त्रे, अन्तरिक्षशास्त्रे, आयुधशास्त्रे इत्यादिषु विज्ञानस्य क्षेत्रेषु भारतीयैः यशः प्राप्तम्।
• (च) अन्ते सर्वे किं गीतं गायन्ति?
➔ अन्ते सर्वे "वयं बालका भारतभक्ताः वयं बालिका भारतभक्ताः" इति गीतं गायन्ति।
३. रेखाङ्कितानि पदानि आश्रित्य उदाहरणानुसारं प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु:
यथा– अस्माकं वत्सला भारतमाता। ➔ अस्माकं कीदृशी भारतमाता?
• (क) समुद्र: भारतमातुः चरणौ प्रक्षालयति। ➔ समुद्रः कस्याः चरणौ प्रक्षालयति?
• (ख) जनाः तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयन्ति। ➔ जनाः केषां धूलिं ललाटे स्थापयन्ति?
• (ग) वीराः भारतमातुः सर्वदा सेवां कृतवन्तः। ➔ के भारतमातुः सर्वदा सेवां कृतवन्तः?
• (घ) ‘जयतु सैनिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति। ➔ ‘जयतु कः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति?
• (ङ) नदी कष्टानि सहमाना प्रवहति। ➔ का कष्टानि सहमाना प्रवहति?
• (च) वयं गौरववर्धनार्थं प्रयत्नं कुर्मः। ➔ वयं किमर्थं प्रयत्नं कुर्मः?
४. अधः प्रदत्तानां शब्दानाम् उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानेषु रूपाणि लिखन्तु:
| शब्दः (विभक्तिः) | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| (क) चरण (द्वितीया) | चरणम् | चरणौ | चरणान् |
| (ख) नदी (प्रथमा) | नदी | नद्यौ | नद्यः |
| (ग) ललाट (सप्तमी) | ललाटे | ललाटयोः | ललाटेषु |
| (घ) देश (चतुर्थी) | देशाय | देशाभ्याम् | देशेभ्यः |
| (ङ) चक्र (प्रथमा) | चक्रम् | चक्रे | चक्राणि |
| (च) वैज्ञानिक (तृतीया) | वैज्ञानिकेन | वैज्ञानिकाभ्याम् | वैज्ञानिकैः |
| (छ) अस्मद् (प्रथमा) | अहम् | आवाम् | वयम् |
| (ज) विज्ञान (षष्ठी) | विज्ञानस्य | विज्ञानयोः | विज्ञानानाम् |
४. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ५-८)
५. अधः प्रदत्तानि वाक्यानि पठित्वा मातृभाषायां अनुवादं कुर्वन्तु:
• (क) भारतभूमौ पवित्राः नद्यः प्रवहन्ति।
➔ भारत भूमि पर पवित्र नदियाँ बहती हैं।
• (ख) भारतस्य मस्तके हिमालयः मुकुटरूपेण शोभते।
➔ भारत के मस्तक पर हिमालय मुकुट के रूप में सुशोभित है।
• (ग) भारतभूमौ श्रेष्ठाः पर्वताः विराजन्ते।
➔ भारत भूमि पर श्रेष्ठ पर्वत विराजमान हैं।
• (घ) राष्ट्रध्वजे केशरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः सन्ति।
➔ राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया, सफेद और हरा रंग हैं।
• (ङ) वयं भारते जन्म प्राप्तवन्तः।
➔ हमने भारत में जन्म प्राप्त किया है।
६. अधः प्रदत्तानां शब्दानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखन्तु:
| शब्दः | विभक्तिः | वचनम् |
|---|---|---|
| (क) भारतमाता | प्रथमा विभक्तिः | एकवचनम् |
| (ख) नद्यः | प्रथमा विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ग) ललाटे | सप्तमी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (घ) तीर्थक्षेत्राणाम् | षष्ठी विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ङ) देशस्य | षष्ठी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (च) बलिदानम् | द्वितीया (प्रथमा वा) | एकवचनम् |
| (छ) कृषीवलबान्धवाः | प्रथमा विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ज) अस्मान् | द्वितीया विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (झ) क्षेत्रेषु | सप्तमी विभक्तिः | बहुवचनम् |
७. पाठे प्रयुक्तानि क्रियापदानि रिक्तस्थानेषु लिखन्तु:
(पाठ में प्रयोग की गई क्रियाएँ - Verbs used in chapter)
• शृणुमः
• जानीमः
• अस्ति
• वर्तते
• शोभते
• प्रक्षालयति
• विराजन्ते
• प्रवहन्ति
• आगच्छन्ति
• गायन्ति
• भवामः
• विलसति
• प्रयच्छन्ति
• प्रेरयति
• सिञ्चन्ति
८. अधः प्रदत्तानां क्रियापदानां त्रिषु पुरुषेषु त्रिषु वचनेषु च लट्-लकारस्य रूपाणि लिखन्तु:
भू (होना):
प्र.पु. – भवति, भवतः, भवन्ति
म.पु. – भवसि, भवथः, भवथ
उ.पु. – भवामि, भवावः, भवामः
अस् (होना):
प्र.पु. – अस्ति, स्तः, सन्ति
म.पु. – असि, स्थः, स्थ
उ.पु. – अस्मि, स्वः, स्मः
इष् (चाहना):
प्र.पु. – इच्छति, इच्छतः, इच्छन्ति
म.पु. – इच्छसि, इच्छथः, इच्छथ
उ.पु. – इच्छामि, इच्छावः, इच्छामः
आ + गम् (आना):
प्र.पु. – आगच्छति, आगच्छतः, आगच्छन्ति
म.पु. – आगच्छसि, आगच्छथः, आगच्छथ
उ.पु. – आगच्छामि, आगच्छावः, आगच्छामः

