Class 7 Deepakam Chapter 7 – ईशावास्यमिदं सर्वम् | NCERT Solutions, Exercise, Question Answers

Sooraj Krishna Shastri
By -
0

१. पाठ-परिचयः

आचार्या: अयि भोः बालाः! किं भवन्तः जानन्ति ‘ईश्‍वरः कुत्र अस्ति’?[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अरे बच्चों! क्या आप लोग जानते हैं कि 'ईश्वर कहाँ है?'

छात्रा: मान्ये! ईश्‍वरः देवालये भवति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: माननीया! ईश्वर मन्दिर (देवालय) में होता है।

आचार्या: वत्साः! ईश्‍वरः न केवलं देवालये अपितु सर्वत्र व्याप्‍तः अस्ति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: बच्चों! ईश्वर न केवल मन्दिर में, बल्कि सब जगह व्याप्त (मौजूद) है।

छात्रः: तत् कथम् आचार्ये?[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: वह कैसे आचार्या जी?

छात्रा: मान्ये! ईश्‍वरः वृक्षे, कक्षायां, शिलायां, क्रीडाङ्गण चापि अस्ति किम्?[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: माननीया! क्या ईश्वर पेड़ में, कक्षा में, पत्थर (शिला) में और खेल के मैदान में भी है?

आचार्या: किम् ‘ईशावास्यमिदं सर्वं’ इति न श्रुतवन्तः? एतत् सर्वं जगत् ईशेन व्याप्‍तम् अस्ति । ईश्‍वरः सर्वत्र अस्ति इति अर्थः ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: क्या आपने 'ईशावास्यमिदं सर्वम्' (यह सब ईश्वर से व्याप्त है) ऐसा नहीं सुना है? यह सारा संसार ईश्वर से व्याप्त है। इसका अर्थ है कि ईश्वर सब जगह है।

छात्राः: आम्, ईश्‍वरः सर्वत्र अस्ति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: हाँ, ईश्वर सब जगह है।

आचार्या: पुरा कश्‍चन भवादृशः अल्पवयस्कः बालः ‘ईश्‍वरः सर्वत्र अस्ति’ इति दर्शितवान्। इदानीं तमेव प्रसङ्गं पठामः । अनन्तरम् अभिनयसहितं नाटकमपि करिष्याम: ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: प्राचीन काल में आप जैसा ही कोई कम उम्र का बालक 'ईश्वर सब जगह है' ऐसा दिखाया था (सिद्ध किया था)। अब हम उसी प्रसंग को पढ़ते हैं। इसके बाद अभिनय के साथ नाटक भी करेंगे।

२. नाटकम् (प्रह्लाद-कथा)

दृश्यम् १: हिरण्यकशिपोः सभा

राजभटः: अयि भोः सावधानाः तिष्ठन्तु । राजाधिराजः राजगम्भीरः त्रैलोक्याधिपतिः देवाधिदेवः दैत्यराजः हिरण्यकशिपुः आगच्छति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अरे! सावधान हो जाइए। महाराजाधिराज, गम्भीर, तीनों लोकों के स्वामी, देवताओं के भी देव, दैत्यराज हिरण्यकशिपु आ रहे हैं।

सभासदः: विजयतां महाराज ! विजयताम्। विजयतां महाराज ! विजयताम्।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: महाराज की जय हो! जय हो! महाराज की जय हो! जय हो!

हिरण्यकशिपुः: ह ह ह ह.... (अट्टहासेन सह) अहम् एव सर्वशक्‍तिमान् अस्मि । अहम् अमरः अस्मि ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: हा हा हा हा.... (जोर से हँसते हुए) मैं ही सबसे अधिक शक्तिशाली हूँ। मैं अमर हूँ।

मन्त्री: सत्यं दैत्यराज! सुराः असुराः यक्ष-गन्धर्व-किन्नराः भवतः सर्वे भीताः तिष्ठन्ति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: सच है दैत्यराज! देवता, असुर, यक्ष, गन्धर्व और किन्नर सभी आपसे डरे हुए रहते हैं।

दैत्यपुरोहितः: भगवन्! देशे सर्वत्र भवतः एव पूजा भवति । अन्यदेवानां पूजाराधनं न भवति । इतः परं यज्ञभागादिकम् अपि देवेभ्यः न केऽपि दास्यन्ति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: भगवन्! देश में सब जगह आपकी ही पूजा होती है। अन्य देवताओं की पूजा-आराधना नहीं होती। इसके बाद यज्ञ का भाग (आहुति) भी देवताओं को कोई नहीं देगा।

हिरण्यकशिपु:: साधु साधु। अयि भोः मन्त्रिन्! सर्वत्र जनाः मामेव ध्यायन्ति खलु![cite: 7]
हिन्दी अर्थ: बहुत अच्छा, बहुत अच्छा। अरे मन्त्री! सभी जगह लोग मेरा ही ध्यान करते हैं न!

मन्त्री: देव ! सर्वत्र भवतः एव नामकीर्तनं भवति, किन्तु ........... (अधोमुखः मौनं तिष्ठति ।)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: देव! सब जगह आपके ही नाम का कीर्तन होता है, किन्तु ........... (नीचे मुँह करके चुप खड़ा रहता है।)

हिरण्यकशिपु:: (सक्रोधम्) आः ! जानामि जानामि । भवान् मम पुत्रस्य विषये वक्‍तुम् इच्छति खलु।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (क्रोध के साथ) आः! मैं जानता हूँ, जानता हूँ। आप मेरे पुत्र के विषय में बोलना चाहते हैं न!

मन्त्री: (मन्दध्वनिना) सत्यं देव ![cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (धीमी आवाज़ में) सच है देव!

हिरण्यकशिपु:: मम पुत्रकः एव मम शत्रुः अस्ति । कुलकलङ्कः सः प्रह्लादः अहर्निशं मम शत्रोः हरेः गुणगानं करोति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: मेरा पुत्र ही मेरा शत्रु है। कुल का कलंक वह प्रह्लाद दिन-रात मेरे शत्रु 'हरि' का गुणगान करता है।

सेनापतिः: स्वामिन्! गजस्य पद-दलनेन अपि सः जीवति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: स्वामी! हाथी के पैरों से कुचलवाने पर भी वह जीवित है।

हिरण्यकशिपु:: अहो महदाश्‍चर्यम्![cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अहो! यह तो बहुत बड़ा आश्चर्य है!

सेनापतिः: भवदाज्ञया वयम् उत्तुङ्गशिखरात् तं पातितवन्तः । तथापि सः न मृतः ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: आपकी आज्ञा से हमने उसे ऊँचे पर्वत के शिखर से गिराया। फिर भी वह नहीं मरा।

मन्त्री: रज्ज्वा बद्ध्वा समुद्रमध्ये क्षिप्‍तवन्तः । तथापि....[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: रस्सी से बाँधकर समुद्र के बीच में फेंक दिया। फिर भी....

हिरण्यकशिपु:: (हस्तौ मर्दयन् सक्रोधम्) आः ... किं करवाणि, किं करवाणि एतस्य । (किञ्चिद्विचिन्त्य) आस्तां तावत्। उपायः मया चिन्तितः । द्रक्ष्यामि सः कथं जीविष्यति इति । (वदन् सभातः निर्गतः । सर्वे निष्क्रान्ता:)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (हाथ मलते हुए क्रोध से) आः ... क्या करूँ, इसका क्या करूँ। (कुछ सोचकर) रुको अभी। मैंने एक उपाय सोच लिया है। देखूँगा वह कैसे जीवित रहता है। (यह बोलता हुआ सभा से निकल जाता है। सभी निकल जाते हैं)

दृश्यम् २: हिरण्यकशिपुः होलिका च

हिरण्यकशिपुः: अयि भोः अनुजे ! होलिके !! होलिके !!! कुत्र असि त्वम्? इत इतः ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अरे छोटी बहन! होलिका !! होलिका !!! तुम कहाँ हो? इधर आओ, इधर आओ।

होलिका: प्रणमामि भ्रातः! कथं मां स्मरसि ? किमर्थं दुःखितः भासि ? किं कारणम् अस्य दुःखस्य ? वद भ्रातः! वद।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: प्रणाम करती हूँ भाई! मुझे कैसे याद किया? किसलिए दुखी लग रहे हो? इस दुःख का क्या कारण है? बोलो भाई! बोलो।

हिरण्यकशिपुः: अनुजे ! त्वं जानासि एव, मम पुत्रः एव मम शत्रुः जातः । (क्षीणस्वरेण सर्वं वृत्तान्तं कथयति)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: बहन! तुम जानती ही हो, मेरा पुत्र ही मेरा शत्रु बन गया है। (धीमी आवाज़ में पूरी घटना बताता है)

होलिका: भ्रातः! अलं चिन्तया, ब्रह्मणः वरप्रसादात् अग्निः मां न दहति, अहं ज्वालयिष्यामि प्रह्लादम्। आश्‍वस्तो भव ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: भाई! चिन्ता मत करो, ब्रह्मा के वरदान की कृपा से आग मुझे नहीं जलाती है, मैं प्रह्लाद को जला दूँगी। आप निश्चित हो जाइए।

(होलिका प्रह्लादकक्षं प्रविशति) (होलिका प्रह्लाद के कमरे में प्रवेश करती है)

प्रह्लाद:: (होलिकां दृष्‍ट्वा) पितृष्वसः! (आलिङ्गति)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (होलिका को देखकर) बुआ जी! (गले मिलता है)

होलिका: अयि भोः प्रह्लाद! आगच्छ, आवां क्रीडिष्यावः ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अरे प्रह्लाद! आओ, हम दोनों खेलेंगे।

प्रह्लाद:: (सहर्षम्) बाढम् ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (खुशी से) ज़रूर।

होलिका: प्रथमं त्वं माम् अन्विष्यसि ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: पहले तुम मुझे ढूँढ़ोगे।

प्रह्लाद:: (सहर्षम्) साधु ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (खुशी से) ठीक है।

(होलिका प्रह्लादस्य नेत्रयो: पट्टिकां बध्नाति । किञ्चित् दूरे अग्निं प्रज्वालयति । स्वयम् अग्नौ उपविश्य करतलध्वनिना आह्वयति ।)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (होलिका प्रह्लाद की आँखों पर पट्टी बाँधती है। कुछ दूरी पर आग जलाती है। स्वयं आग में बैठकर ताली की आवाज़ से बुलाती है।)

होलिका: अत्र, अहम् अत्र अस्मि, इत इत: ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: यहाँ, मैं यहाँ हूँ, इधर आओ, इधर आओ।

प्रह्लाद:: अहो तापम् अनुभवामि खलु अहम्। (प्रह्लादः अग्निकुण्डस्य समीपम् गच्छति । होलिका तम् अङ्के स्वीकरोति ।)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अरे! मैं तो गर्मी अनुभव कर रहा हूँ। (प्रह्लाद अग्निकुण्ड के पास जाता है। होलिका उसे गोद में ले लेती है।)

होलिका: ह.....ह....ह... प्रह्लाद! अहं तव मृत्युः अस्मि । अहं त्वाम् अग्नये दास्यामि ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: हा.....हा....हा... प्रह्लाद! मैं तुम्हारी मृत्यु हूँ। मैं तुम्हें आग को सौंप दूँगी।

प्रह्लाद:: (करौ बद्ध्वा हरिं स्मरति) ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय....[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (हाथ जोड़कर हरि का स्मरण करता है) ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय....

(नारायणस्य कृपया प्रह्लादः रक्षितः भवति । ब्रह्मणः वरस्य दुरुपयोगकारणात् अग्निः होलिकाम् एव ज्वालयति । होलिका अग्निदाहात् आर्तनादं कुर्वती प्राणान् त्यजति ।)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (नारायण की कृपा से प्रह्लाद बच जाता है। ब्रह्मा के वरदान का दुरुपयोग करने के कारण आग होलिका को ही जला देती है। होलिका आग में जलने से चिल्लाती हुई प्राण त्याग देती है।)

दृश्यम् ३: नृसिंहावतारः

दैत्याः: अहो! किमेतत्? होलिका एव दग्धा । (ततः प्रविशति प्रह्लादः हिरण्यकशिपुः च)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: अहो! यह क्या? होलिका ही जल गई। (तब प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु प्रवेश करते हैं)

प्रह्लादः: ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय...[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय...

हिरण्यकशिपु:: (सक्रोधं दन्तान् विघट्टयन्) आः, नारायण! नारायण! दर्शय, कुत्र अस्ति तव नारायणः?[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (क्रोध से दाँत पीसते हुए) आः, नारायण! नारायण! दिखा, कहाँ है तेरा नारायण?

प्रह्लाद:: तात ! श्रीहरिः तु सर्वत्र अस्ति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: पिता जी! श्रीहरि तो सब जगह हैं।

हिरण्यकशिपुः: किं ते हरि: अत्र अस्ति ? तत्र अस्ति ? सोपानेषु अस्ति ? अथवा अस्मिन् स्तम्भे अस्ति ?[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: क्या तेरा हरि यहाँ है? वहाँ है? सीढ़ियों में है? या इस खम्भे में है?

प्रह्लाद:: नूनं हरिः सर्वत्र अस्ति । अस्मिन् स्तम्भे अपि अस्ति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: निश्चय ही हरि सब जगह हैं। इस खम्भे में भी हैं।

हिरण्यकशिपु:: आः, मूढ! पश्य पश्य, अनेन खड्गेन स्तम्भं भङ्क्ष्यामि ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: आः, मूर्ख! देख-देख, इस तलवार से खम्भे को तोड़ दूँगा।

प्रह्लादः: ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय...[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो नारायणाय...

(हिरण्यकशिपुः स्तम्भं प्रहरति । महता गर्जनेन नृसिंहः स्तम्भात् बहिः आगच्छति)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (हिरण्यकशिपु खम्भे पर प्रहार करता है। बड़ी गर्जना के साथ नृसिंह खम्भे से बाहर आते हैं)

नृसिंह:: (क्रोधेन सिंहगर्जनं कुर्वन्) रे पापात्मन्! अद्य तव मृत्युः सन्निहितः । कालोऽहं तव ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (क्रोध से सिंह की तरह गर्जना करते हुए) रे पापी! आज तेरी मृत्यु पास आ गई है। मैं तेरा काल (मौत) हूँ।

हिरण्यकशिपु:: (आदौ आश्‍चर्येण पश्यति पुनः कथयति) आः, असत्यवादिन्! अहं ब्रह्मदेवात् वरं प्राप्य अमरः अस्मि । त्वाम् एव मृत्युलोकं प्रेषयिष्यामि ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (शुरू में आश्चर्य से देखता है फिर कहता है) आः, झूठे! मैं ब्रह्मा जी से वरदान पाकर अमर हूँ। मैं ही तुझे यमलोक भेज दूँगा।

(तस्मिन् सन्ध्याकाले नृसिंह: हिरण्यकशिपुं केशेषु गृहीत्वा कर्षति)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (उस शाम के समय नृसिंह हिरण्यकशिपु को बालों से पकड़कर खींचते हैं)

नृसिंह:: रे मूर्ख ! अधम ! त्वं ब्रह्मदेवात् वरं प्राप्‍तवान् असि, तं वरम् अनुल्लङ्घ्य अहं त्वां मारयिष्यामि । (राजभवनस्य अन्तः बहिः च एतयोः मध्ये विद्यमानायां देहल्यां तं गृह्णाति)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: रे मूर्ख! नीच! तूने ब्रह्मा से वरदान पाया है, उस वरदान का उल्लंघन किए बिना ही मैं तुझे मारूँगा। (राजभवन के अंदर और बाहर के बीच मौजूद देहली (चौखट) पर उसे पकड़ लेते हैं)

मूढ! पश्य, न त्वमसि भुवि, न च स्वर्गे ; न वा पाताले, न च आकाशे ; न गृहाभ्यन्तरे, बहिर्भागे वा ; नायं दिवसो, न वा रात्रि: ; नाहं मनुष्यो, न च पशु: ; न अस्त्रेण, न च शस्त्रेण ; निजनखै: तव वक्ष:स्थलं विदीर्य हनिष्यामि ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: मूर्ख! देख, न तू धरती पर है, न स्वर्ग में; न पाताल में है, न आकाश में; न घर के अंदर है, न बाहर; न यह दिन है, न रात; न मैं मनुष्य हूँ, न पशु; न किसी अस्त्र से, न शस्त्र से; अपने नाखूनों से तेरी छाती फाड़कर तुझे मारूँगा।

हिरण्यकशिपु:: (भीतः) प्रभो! क्षमस्व मां, क्षमस्व ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: (डरा हुआ) प्रभु! मुझे क्षमा करें, क्षमा करें।

नृसिंह:: अधम ! न तेऽपराध: क्षम्य: । (सिंहगर्जनं कुर्वन् हिरण्यकशिपोः वक्षःस्थलं भिनत्ति ।)[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: नीच! तेरा अपराध क्षमा करने योग्य नहीं है। (सिंह जैसी गर्जना करते हुए हिरण्यकशिपु की छाती चीर देते हैं।)

अध्यापिका: एवं बालः प्रह्लादः ईश्‍वरः सर्वत्र अस्ति इति दर्शितवान्। अत एव उच्यते, ‘ईशावास्यम् इदं सर्वम्’ इति ।[cite: 7]
हिन्दी अर्थ: इस प्रकार बालक प्रह्लाद ने दिखाया कि ईश्वर सब जगह है। इसीलिए कहा जाता है, 'यह सब कुछ ईश्वर से व्याप्त है'।

३. शब्दार्थ-सारणी (Word Meanings)

संस्कृत शब्दः संस्कृत-पर्यायः हिन्दी अर्थः English Meaning
ईशावास्यम्ईश्‍वरेण व्याप्‍तम्ईश्‍वर से व्याप्‍तPervaded by God[cite: 7]
राजगम्भीरःराजसु गम्भीरःराजाओं में कुशलतमThe best amongst the Kings[cite: 7]
कश्‍चनकोऽपि जनःकोई व्यक्‍तिSomeone (M)[cite: 7]
विजयताम्जयतुविजयी होवेLet (him) be victorious[cite: 7]
सर्वशक्‍तिमान्सर्वसामर्थ्यवान्सबसे अधिक शक्‍तिशालीAll powerful[cite: 7]
यक्षाःकुबेरस्य अनुचराःयक्षYakshas (Demi-Gods)[cite: 7]
गन्धर्वाःदिव्यगायकाःगन्धर्वGandharvas (Demi-Gods)[cite: 7]
किन्नराःकिम्पुरुषाःकिन्नरKinnaras (Demi-Gods)[cite: 7]
यज्ञभागःहविःयज्ञ-आहुतिYajna offering[cite: 7]
आराधनम्पूजनम्पूजाWorship[cite: 7]
दास्यन्तिदानं करिष्यन्तिदेंगेShall give[cite: 7]
ध्यायन्तिचिन्तयन्तिध्यान करते हैंMeditate[cite: 7]
नामकीर्तनम्नामस्तुतिःनाम जपनाSinging the Name in praise[cite: 7]
सक्रोधम्कोपेन सहक्रोध सहितWith Anger[cite: 7]
खलुननुनिश्‍चित रूप सेIndeed[cite: 7]
कुलकलङ्कःकुलपातकःवंश को कलंकित करने वालाOne who brings ill-fame to family[cite: 7]
अहर्निशम्अहोरात्रःदिन-रातDay and night[cite: 7]
पद-दलनेनपदकुट्टनेनपैरों के द्वारा कुचलने सेStamped (by foot)[cite: 7]
उत्तुङ्गशिखरात्उन्नतपर्वतस्य अग्रभागात्ऊँचे पर्वत के शिखर सेFrom the peak of a high mountain[cite: 7]
रज्ज्वावराटकेनरस्सी के द्वाराBy the rope[cite: 7]
बद्ध्वानिबध्यबाँधकरHaving tied[cite: 7]
क्षिप्‍तवन्तःत्यक्‍तवन्तःफेंक दिया(They) Threw[cite: 7]
विचिन्त्यचिन्तनं कृत्वासोचकरHaving thought[cite: 7]
द्रक्ष्यामिअवलोकयिष्यामिदेखूँगाShall see[cite: 7]
निष्क्रान्तःनिर्गतःनिकल गयाWent out[cite: 7]
भासिप्रतीयसेलग रहे होSeem[cite: 7]
वृत्तान्तम्वार्ताम्वृत्तान्त या घटना कोAccount / Anecdote[cite: 7]
अलं चिन्तयाचिन्तां मा कुरुचिंता मत करोDo not worry[cite: 7]
पितृष्वसः!पितुः भगिनि !हे बुआ !Hey Paternal Sister![cite: 7]
बाढम्निश्‍चयेनअवश्यCertainly[cite: 7]
अन्विष्यसिमार्गयिष्यसिढूँढ़ोगे(You) Shall search[cite: 7]
करतलध्वनिनातालिकावादनेनताली बजा करकेClap sound[cite: 7]
प्रज्वलयतिउद्दीपयतिजलाता हैKindles[cite: 7]
इत इतःअनेन मार्गेणइस ओरThis way[cite: 7]
आर्तनादम्चीत्कार-क्रन्दनम्चिल्लाकर रोनाCry for help[cite: 7]
भङ्क्ष्यामिभग्नं करिष्यामितोड़ दूँगा(I) Shall break[cite: 7]
सन्निहितःसमागतःपास आयाCame near[cite: 7]
कालोऽहम्यमः अहम्मैं मृत्यु हूँI am Death[cite: 7]
मृत्युलोकम्यमपुरम्यमलोकRealm of death[cite: 7]
कर्षतिआकर्षतिखींचता हैPulls[cite: 7]
देहल्याम्द्वारतलेदेहरी मेंThreshold[cite: 7]
निजनखैःस्वस्य करजैःअपने नाखूनों सेBy own nails[cite: 7]
अधम !हे क्षुद्रजन !हे नीच!O’ Low calibre person![cite: 7]
क्षम्यःसोढव्यःक्षमा करने योग्यWorthy of forgiving[cite: 7]
वक्ष:स्थलम्उरःस्थलम्छातीChest[cite: 7]
भिनत्तिविदीर्णं करोतिचीरता हैTears apart[cite: 7]

४. व्याकरणम् (तृतीया-विभक्तिः व लृट्-लकारः)

तृतीया-विभक्‍तेः रूपाणि

लिङ्गम्मूलशब्‍दःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
पुंलिङ्गम्बालकबालकेनबालकाभ्याम्बालकैः
वृक्षवृक्षेणवृक्षाभ्याम्वृक्षैः
किम्केनकाभ्याम्कैः
स्‍त्रीलिङ्गम्छात्राछात्रयाछात्राभ्याम्छात्राभिः
शिक्षिकाशिक्षिकयाशिक्षिकाभ्याम्शिक्षिकाभिः
किम्कयाकाभ्याम्काभिः
नपुंसकलिङ्गम्वनवनेनवनाभ्याम्वनैः
पुस्तकपुस्तकेनपुस्तकाभ्याम्पुस्तकैः
किम्केनकाभ्याम्कैः
[cite: 7]

अत्र इदम् अवधेयम् (नियम):

(क) वाक्ये उपकरणार्थे तृतीया विभक्‍तिः भवति । (साधन या उपकरण के अर्थ में तृतीया विभक्ति होती है।)
यथा – हिरण्यकशिपुः खड्गेन स्तम्भं भञ्जयति । बालकः लेखन्या लिखति । पितामहः चषकेण क्षीरं पिबति ।[cite: 7]

(ख) क्रियाविशेषण-स्वभाववाचक-शब्दानां तृतीया विभक्‍तिः भवति । (क्रियाविशेषण या स्वभाव बताने वाले शब्दों में तृतीया होती है।)
यथा – हिरण्यकशिपुः आश्‍चर्येण आह । नृसिंहः क्रोधेन गर्जति ।[cite: 7]

लृट्-लकारः (भविष्यत्-कालः)

(भविष्यत्-काले एतस्य लकारस्य प्रयोगः भवति)[cite: 7]

पठ् धातुः (लृट्-लकारः)
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःपठिष्यतिपठिष्यतःपठिष्यन्ति
मध्यमपुरुषःपठिष्यसिपठिष्यथःपठिष्यथ
उत्तमपुरुषःपठिष्यामिपठिष्यावःपठिष्यामः
[cite: 7]
वाक्येषु लृट्-लकारस्य प्रयोगः
एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
बालक: पाठं पठिष्यतिबालकौ पाठं पठिष्यतःबालकाः पाठं पठिष्यन्ति
त्वं पाठं पठिष्यसियुवां पाठं पठिष्यथःयूयं पाठं पठिष्यथ
अहं पाठं पठिष्यामिआवां पाठं पठिष्यावःवयं पाठं पठिष्यामः
[cite: 7]

५. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १-४)

१. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि लिखन्तु—

(हिन्दी: नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखें—)

• (क) दैत्यराजः कः? (दैत्यराज कौन है?) ➔ हिरण्यकशिपुः[cite: 7]

• (ख) के हिरण्यकशिपुं ध्यायन्ति? (कौन हिरण्यकशिपु का ध्यान करते हैं?) ➔ जनाः[cite: 7]

• (ग) किं देवेभ्यः न दास्यन्ति? (क्या देवताओं को नहीं देंगे?) ➔ यज्ञभागम्[cite: 7]

• (घ) कस्य दलनेन अपि सः जीवति ? (किसके कुचलने पर भी वह जीवित है?) ➔ गजस्य[cite: 7]

• (ङ) राक्षसाः कुतः प्रह्लादं पातितवन्तः? (राक्षसों ने प्रह्लाद को कहाँ से गिराया?) ➔ उत्तुङ्गशिखरात्[cite: 7]

• (च) हिरण्यकशिपुः कस्मात् वरं प्राप्‍तवान्? (हिरण्यकशिपु ने किससे वर प्राप्त किया?) ➔ ब्रह्मदेवात्[cite: 7]

• (छ) हरिः कुत्र अस्ति इति कः वदति ? (हरि कहाँ है, ऐसा कौन कहता है?) ➔ प्रह्लादः[cite: 7]

२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु—

(हिन्दी: नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखें—)

• (क) के भीताः तिष्ठन्ति ? (कौन डरे हुए रहते हैं?)
सुराः असुराः यक्ष-गन्धर्व-किन्नराः सर्वे भीताः तिष्ठन्ति ।[cite: 7]

• (ख) प्रह्लादः अहर्निशं किं करोति ? (प्रह्लाद दिन-रात क्या करता है?)
प्रह्लादः अहर्निशं शत्रोः हरेः गुणगानं करोति ।[cite: 7]

• (ग) प्रह्लादं कथं समुद्रे क्षिप्‍तवन्तः ? (प्रह्लाद को समुद्र में कैसे फेंका?)
प्रह्लादं रज्ज्वा बद्ध्वा समुद्रे क्षिप्‍तवन्तः ।[cite: 7]

• (घ) नृसिंहः कथं बहिः आगच्छति ? (नृसिंह कैसे बाहर आते हैं?)
यदा हिरण्यकशिपुः स्तम्भं प्रहरति, तदा महता गर्जनेन नृसिंहः स्तम्भात् बहिः आगच्छति ।[cite: 7]

• (ङ) हिरण्यकशिपुः केन स्तम्भं भङ्क्ष्यामि इति वदति ? (हिरण्यकशिपु किससे खम्भा तोड़ने के लिए कहता है?)
हिरण्यकशिपुः खड्गेन स्तम्भं भङ्क्ष्यामि इति वदति ।[cite: 7]

३. उदाहरणानुसारं रिक्‍तस्थानानि पूरयन्तु— (तृतीया विभक्तिः)

यथा – रामेण ➔ रामाभ्याम् ➔ रामैः[cite: 7]

• (क) रामेणरामाभ्याम्रामैः[cite: 7]

• (ख) चमसेन ➔ चमसाभ्याम्चमसैः[cite: 7]

• (ग) आचार्येण ➔ आचार्याभ्याम् ➔ आचार्यैः[cite: 7]

• (घ) आसन्देनआसन्दाभ्याम् ➔ आसन्दैः[cite: 7]

• (ङ) बालिकया ➔ बालिकाभ्याम् ➔ बालिकाभिः[cite: 7]

• (च) पेटिकया ➔ पेटिकाभ्याम् ➔ पेटिकाभिः[cite: 7]

• (छ) मित्रेण ➔ मित्राभ्याम्मित्रैः[cite: 7]

• (ज) वस्त्रेणवस्त्राभ्याम् ➔ वस्‍त्रैः[cite: 7]

४. उदाहरणानुसारं रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्‍ननिर्माणं कुर्वन्तु—

यथा – हिरण्यकशिपुः आगच्छति । ➔ कः आगच्छति ?[cite: 7]

• (क) सुरासुराः सर्वे भीताः भविष्यन्ति । ➔ के सर्वे भीताः भविष्यन्ति ?[cite: 7]

• (ख) दैत्यराजः खड्गेन प्रहरति । ➔ दैत्यराजः केन प्रहरति ?[cite: 7]

• (ग) अहं प्रह्लादं मारयिष्यामि । ➔ अहं कं मारयिष्यामि ?[cite: 7]

• (घ) तात ! हरिः तु सर्वत्र अस्ति । ➔ तात ! कः तु सर्वत्र अस्ति ?[cite: 7]

• (ङ) पुत्रस्य विषये वक्‍तुम् इच्छति । ➔ कस्य विषये वक्‍तुम् इच्छति ?[cite: 7]

• (च) नृसिंहः निजनखैः हिरण्यकशिपुं मारितवान् । ➔ नृसिंहः कैः हिरण्यकशिपुं मारितवान् ?[cite: 7]

६. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ५-८)

५. अधः प्रदत्तेषु रिक्‍तस्थानेषु तृतीया-विभक्‍त्यन्तानि रूपाणि लिखन्तु—

• (क) अहं मम खड्गेन (खड्ग) स्तम्भं भङ्क्ष्यामि ।[cite: 7]

• (ख) प्रह्लादः गजस्य पददलनेन (पददलन) अपि जीवति ।[cite: 7]

• (ग) सर्वे जनाः नारायणेन (नारायण) अनुगृहीताः ।[cite: 7]

• (घ) निजनखैः (निजनख) तव वक्ष:स्थलं विदीर्य मारयिष्यामि ।[cite: 7]

• (ङ) बालिकाः शिक्षिकया (शिक्षिका) सह चर्चां कुर्वन्ति ।[cite: 7]

६. उदाहरणानुसारं संयोज्य लिखन्तु (सन्धिः)—

• (क) रमा + ईशः = रमेशः[cite: 7]

• (ख) सुर + ईश्‍वरः = सुरेश्वरः[cite: 7]

• (ग) नाग + इन्द्रः = नागेन्द्रः[cite: 7]

• (घ) गज + इन्द्रः = गजेन्द्रः[cite: 7]

• (ङ) माता + इव = मातेव[cite: 7]

• (च) राम + इति = रामेति[cite: 7]

• (छ) पर + उपकारः = परोपकारः[cite: 7]

• (ज) मम + उपरि = ममोपरि[cite: 7]

• (झ) सूर्य + उदयः = सूर्योदयः[cite: 7]

• (ञ) रामेण + उक्‍तम् = रामेणोक्तम्[cite: 7]

• (ट) तस्य + उपरि = तस्योपरि[cite: 7]

७. उदाहरणानुसारं वाक्यानि वर्तमानकालतः भविष्यत्-काले परिवर्तयन्तु—

(वर्तमानकालः ➔ भविष्यत्कालः)

• (क) सा आपणं गच्छति । ➔ सा आपणं गमिष्यति ।[cite: 7]

• (ख) रमा क्रीडाङ्गणे क्रीडति । ➔ रमा क्रीडाङ्गणे क्रीडिष्यति ।[cite: 7]

• (ग) बालाः फलानि खादन्ति । ➔ बालाः फलानि खादिष्यन्ति ।[cite: 7]

• (घ) ताः योगासनं कुर्वन्ति । ➔ ताः योगासनं करिष्यन्ति ।[cite: 7]

• (ङ) अहं नित्यं पठामि । ➔ अहं नित्यं पठिष्यामि ।[cite: 7]

• (च) त्वं कस्मिन् विषये वदसि ? ➔ त्वं कस्मिन् विषये वदिष्यसि ?[cite: 7]

• (छ) आवां पाठं लिखावः । ➔ आवां पाठं लेखिष्यावः ।[cite: 7]

• (ज) यूयं शालां गच्छथ । ➔ यूयं शालां गमिष्यथ ।[cite: 7]

• (झ) ते बालिके वैद्ये भवतः । ➔ ते बालिके वैद्ये भविष्यतः ।[cite: 7]

• (ञ) वयं श्‍लोकान् स्मरामः । ➔ वयं श्‍लोकान् स्मरिष्यामः ।[cite: 7]

८. उदाहरणानुसारं रिक्‍तस्थानानि पूरयन्तु (लृट् लकारः)—

यथा – बालकः कार्यं करिष्यति । बालकौ कार्यं करिष्यतः । बालकाः कार्यं करिष्यन्ति ।[cite: 7]

• (क) सः आपणं गमिष्यति । तौ आपणं गमिष्यतः । ते आपणं गमिष्यन्ति ।[cite: 7]

• (ख) सः शालां गमिष्यति । तौ शालां गमिष्यतः । ते शालां गमिष्यन्ति ।[cite: 7]

• (ग) त्वं श्‍लोकं वदिष्यसि । युवां श्‍लोकं वदिष्यथः । यूयं श्‍लोकं वदिष्यथ ।[cite: 7]

• (घ) अहं पुस्तकं दास्यामि । आवां पुस्तकानि दास्यावः । वयं पुस्तकानि दास्यामः ।[cite: 7]

• (ङ) छात्रा प्रदर्शनीं द्रक्ष्यति । छात्रे प्रदर्शनीं द्रक्ष्यतः । छात्राः प्रदर्शनीं द्रक्ष्यन्ति ।[cite: 7]

• (च) अहं भगवद्गीतां श्रोष्यामि । आवां भगवद्गीतां श्रोष्यावः । वयं भगवद्गीतां श्रोष्यामः ।[cite: 7]

• (छ) बालिका कथां लेखिष्यति । बालिके कथां लेखिष्यतः । बालिकाः कथां लेखिष्यन्ति ।[cite: 7]

• (ज) त्वं किं खादिष्यसि ? युवां किं खादिष्यथः ? यूयं किं खादिष्यथ ?[cite: 7]

७. योग्यताविस्तरः एवं परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तर: (१)

एषा घटना नरसिंहपुराणे श्रीमद्भागवतपुराणे च वर्णिता अस्ति । एतयोः पुराणयोः रचयिता महर्षिः वेदव्यासः अस्ति । सः एव अष्‍टादश पुराणानि लिखितवान्। नरसिंहपुराणम् एकम् उपपुराणम् अस्ति ।[cite: 7]

(हिन्दी: यह घटना नरसिंह पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित है। इन दोनों पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास हैं। उन्होंने ही अठारह पुराण लिखे हैं। नरसिंह पुराण एक उपपुराण है।)

नृसिंहावतारविषये प्रमुखांशाः (नृसिंहावतार के विषय में प्रमुख बातें):

  • बिहारराज्ये ‘पूर्णिया’-जनपदे बनमनखी-ग्रामे सिकलीगढ-धरहरा इति इतिहासप्रसिद्धं स्थानम्। (बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी गाँव में सिकलीगढ़ धरहरा एक ऐतिहासिक स्थान है।)[cite: 7]
  • अस्मिन् एव स्थाने भगवान् नृसिंहः अवतारं प्राप्‍तवान् इति ख्यातिः वर्तते । (ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान नृसिंह ने अवतार लिया था।)[cite: 7]
  • अत्रैव नृसिंहः हिरण्यकशिपोः वधं कृत्वा प्रह्लादस्य रक्षणं कृतवान्। (यहीं नृसिंह ने हिरण्यकशिपु का वध कर प्रह्लाद की रक्षा की थी।)[cite: 7]
  • भक्‍तस्य प्रह्लादस्य हिरण्यकशिपोः च साम्राज्यं अत्रैव आसीत्। (प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का साम्राज्य यहीं था।)[cite: 7]
  • अधुनापि अत्र कश्‍चन विशालः बृहदाकारकः प्रसिद्धः माणिक्यनामकः स्तम्भः वर्तते । (आज भी यहाँ एक बहुत बड़ा माणिक्य नामक खम्भा (स्तम्भ) है।)[cite: 7]
  • यस्यां देहल्यां दैत्यराजस्य हिरण्यकशिपोः वधः जातः, तस्याः एव देहल्याः पाश्‍र्वस्तम्भः एषः इति जनश्रुतिः वर्तते । तस्य भञ्जनार्थं बहुधा प्रयासः कृतः तथापि न भग्नः इत्यपि श्रूयते । (जिस देहली पर हिरण्यकशिपु का वध हुआ, यह उसी देहली का पास वाला खम्भा है, ऐसा लोग कहते हैं। इसे तोड़ने का कई बार प्रयास हुआ लेकिन यह नहीं टूटा।)[cite: 7]
  • हिरण्यकशिपोः अनुजायाः होलिकायाः दहनम् अत्रैव जातम् इति मन्यते । (हिरण्यकशिपु की बहन होलिका का दहन (जलना) भी यहीं हुआ था, ऐसा माना जाता है।)[cite: 7]
  • तदर्थमेव अत्रत्याः जनाः प्रतिवर्षं भस्मना मृत्तिकया च होलिकां क्रीडन्ति । (इसीलिए यहाँ के लोग हर साल राख और मिट्टी से होली खेलते हैं।)[cite: 7]
  • तदारभ्य भारतवर्षे जनाः होलिकोत्सवम् आचरन्ति इत्यपि ख्यातिः वर्तते । (तभी से भारतवर्ष में लोग होली का उत्सव मनाते हैं, ऐसी भी प्रसिद्धि है।)[cite: 7]
  • अत्र नृसिंहस्य प्राचीनः देवालयः अपि अस्ति । सद्यः सः देवालयः पुनर्नवीकृतः । (यहाँ नृसिंह का प्राचीन मन्दिर भी है। हाल ही में उसका जीर्णोद्धार (नवीनीकरण) किया गया है।)[cite: 7]
  • अस्मिन् मन्दिरे ब्रह्म-विष्णु-महेश्‍वरसहितं प्रायः 40 देवतानां प्रतिमाः सन्ति । (इस मन्दिर में ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित लगभग 40 देवताओं की मूर्तियां हैं।)[cite: 7]
  • वैदिककाले होलिकोत्सवः वसन्तोत्सवरूपेणापि आचर्यते । (वैदिक काल में होली का उत्सव वसन्तोत्सव के रूप में भी मनाया जाता था।)[cite: 7]
  • होलकः तृणाग्नौ भृष्टम् अर्द्धपक्वं धान्यम्। होरा इति हिन्दी भाषायाम्। यदा नवगोधूमादि-धान्यानि गृहेषु आगच्छन्ति, तदा कृषकः प्रसन्नो भूत्वा अग्नौ हवि: समर्प्य उत्सवम् आचरति स: होलिकोत्सवः भवति । (घास की आग में भुना हुआ आधा पका अनाज 'होलक' (हिन्दी में 'होरा') कहलाता है। जब नया गेहूँ आदि अनाज घर में आता है, तो किसान प्रसन्न होकर आग में आहुति देकर उत्सव मनाता है, वही होलिकोत्सव है।)[cite: 7]
  • शास्त्रेषु होलिकोत्सवः ‘वासन्तीय-नवसस्येष्टि:’ उच्यते । (शास्त्रों में होलिकोत्सव को 'वासन्तीय नवसस्येष्टि' (वसंत का नया अनाज यज्ञ) कहा गया है।)[cite: 7]

योग्यताविस्तर: (२) - अष्‍टादश पुराणानि

भारतीयज्ञानपरम्परायां संस्कृतवाङ्मयस्य विशेषतः पुराणानां महती भूमिका वर्तते । प्रधानतया अष्‍टादश पुराणानि सन्ति ।[cite: 7]

मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्‍टयम्।
अनापलिङ्गकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते॥[cite: 7]

  • मद्वयम् (म से 2) – १. मत्स्यपुराणम् २. मार्कण्डेयपुराणम्[cite: 7]
  • भद्वयम् (भ से 2) – ३. भागवतपुराणम् ४. भविष्यपुराणम्[cite: 7]
  • ब्रत्रयम् (ब्र से 3) – ५. ब्रह्मपुराणम् ६. ब्रह्माण्डपुराणम् ७. ब्रह्मवैवर्तपुराणम्[cite: 7]
  • वचतुष्‍टयम् (व से 4) – ८. वायुपुराणम् ९. वराहपुराणम् १०. वामनपुराणम् ११. विष्णुपुराणम्[cite: 7]
  • अनापलिङ्गकूस्कानि – १२. अग्निपुराणम् (अ) १३. नारदपुराणम् (ना) १४. पद्मपुराणम् (प) १५. लिङ्गपुराणम् (लिं) १६. गरुडपुराणम् (ग) १७. कूर्मपुराणम् (कू) १८. स्कन्दपुराणम् (स्क)[cite: 7]

परियोजनाकार्यम् / कार्यकलापः

१. माता-पित्रोः शिक्षकस्य च साहाय्येन मानवानां षोडश-संस्काराणां नामानि लिखन्तु ।
(हिन्दी: माता-पिता और शिक्षक की सहायता से मानवों के सोलह संस्कारों के नाम लिखें।)[cite: 7]

२. पुराणेभ्यः कामपि एकां कथां सङ्गृह्य लिखन्तु, कक्षायां श्रावयन्तु च।
(हिन्दी: पुराणों से कोई एक कहानी (कथा) इकट्ठा करके लिखें और कक्षा में सुनाएँ।)[cite: 7]

कार्यकलापः

कक्षायाः सर्वे छात्राः मिलित्वा अस्य नाटकस्य अभिनयं कुर्वन्तु ।
(हिन्दी: कक्षा के सभी छात्र मिलकर इस (प्रह्लाद-नृसिंह) नाटक का अभिनय करें।)[cite: 7]

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!