Looking for accurate and easy-to-understand solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 8 Vichitrah Sakshi (विचित्रः साक्षी)? In this post, we provide comprehensive NCERT Solutions for the Shemushi Part 2 textbook. This chapter narrates a fascinating story about a strange witness and a clever judge, Bankim Chandra.
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Ekapaden Uttarat (One-word answers)
Purnavakyen Uttarat (Full sentence answers)
Prashna Nirman (Question framing)
Sandhi Viched and Pratyaya (Grammar)
We have also included the Hindi translation of the difficult Sanskrit questions to help students grasp the meaning easily. Whether you are preparing for your board exams or completing your homework, these 'Vichitrah Sakshi Question Answers' cover every aspect of the chapter strictly according to the latest CBSE syllabus. Read on to master the 8th chapter of Class 10 Sanskrit.
Class 10 Sanskrit Chapter 8 Vichitrah Sakshi Question Answer | विचित्रः साक्षी (NCERT Solutions)
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| Class 10 Sanskrit Chapter 8 Vichitrah Sakshi Question Answer | विचित्रः साक्षी (NCERT Solutions) |
📘 कक्षा 10 संस्कृत (शेमुषी भाग 2)
⭐ अष्टमः पाठः – विचित्रः साक्षी
📚 अभ्यास-प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर दें)
| क्र. |
प्रश्न |
उत्तर |
| (क) |
कीदृशे प्रदेशे पदयात्रा न सुखावहा? |
विजनप्रदेशे |
| (ख) |
अतिथि: केन प्रबुद्धः? |
पादध्वनिना |
| (ग) |
कृशकायः कः आसीत्? |
अभियुक्तः |
| (घ) |
न्यायाधीशः कस्मै कारागारदण्डम् आदिष्टवान्? |
आरक्षिणे |
| (ङ) |
कं निकषा मृतशरीरम् आसीत्? |
राजमार्गम् |
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
| क्र. |
प्रश्न |
उत्तर |
| (क) |
निर्धनः जनः कथं वित्तम् उपार्जितवान्? |
निर्धनः जनः भूरि परिश्रम्य वित्तम् उपार्जितवान्। |
| (ख) |
जनः किमर्थं पदातिः गच्छति? |
अर्थ कार्येन पीडितः जनः बसयानं विहाय पदातिः गच्छति। |
| (ग) |
प्रसृते निशान्धकारे स किम् अचिन्तयत्? |
प्रसृते निशान्धकारे सः अचिन्तयत् – ‘निशान्धकारे प्रसृते विजने प्रदेशे पदयात्रा न शुभावहा’। |
| (घ) |
वस्तुतः चौरः कः आसीत्? |
वस्तुतः आरक्षी चौरः आसीत्। |
| (ङ) |
जनस्य क्रन्दनं निशम्य आरक्षी किमुक्तवान्? |
जनस्य क्रन्दनं निशम्य आरक्षी उक्तवान्- “रे दुष्ट! तस्मिन् दिने त्वयाऽहं चोरितायाः मञ्जूषायाः ग्रहणाद् वारितः। इदानीं निजकृत्यस्य फलं भुक्ष्व, अस्मिन् चौर्याभियोगे त्वं वर्षत्रयस्य कारादण्डं लप्स्यसे”। |
| (च) |
मतिवैभवशालिन: दुष्कराणि कार्याणि कथं साधयन्ति? |
मतिवैभवशालिनः दुष्कराणि कार्याणि नीतिं युक्तिं समालम्ब्य लीलया एव साधयन्ति। |
प्रश्न 3. रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
| क्र. |
वाक्य |
प्रश्नवाचक पद |
| (क) |
पुत्रं द्रष्टुं सः प्रस्थितः। |
कम् |
| (ख) |
करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्। |
कस्मै |
| (ग) |
चौरस्य पादध्वनिना अतिथिः प्रबुद्धः। |
कस्य |
| (घ) |
न्यायाधीशः बंकिमचन्द्रः आसीत्। |
कः |
| (ङ) |
स भारवेदनया क्रन्दति स्म। |
कया |
| (च) |
उभौ शवं चत्वरे स्थापितवन्तौ। |
कुत्र |
प्रश्न 4. यथानिर्देशम् उत्तरत
| क्र. |
निर्देश |
उत्तर |
| (क) |
‘आदेशं प्राप्य उभौ अचलताम्’ - अत्र किं कर्तृपदम्? |
उभौ |
| (ख) |
‘एतेन आरक्षिणा अध्वनि यदुक्तं तत् वर्णयामि’ - अत्र ‘मार्गे’ इत्यर्थे किं पदं प्रयुक्तम्? |
अध्वनि |
| (ग) |
‘करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्’ - अत्र ‘तस्मै’ इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्? |
निर्धनजनाय |
| (घ) |
‘ततोऽसौ तौ अग्रिमे दिने उपस्थातुम् आदिष्टवान्’ - अस्मिन् वाक्ये किं क्रियापदम्? |
आदिष्टवान् |
| (ङ) |
‘दुष्कराण्यपि कर्माणि मतिवैभवशालिनः’ - अत्र विशेष्यपदं किम्? |
कर्माणि |
प्रश्न 5. सन्धि एवं सन्धिविच्छेद
| क्र. |
विच्छेद / पद |
संयुक्त रूप |
| (क) |
पदातिः + एव |
पदातिरेव |
| (ख) |
निशा + अन्धकारे |
निशान्धकारे |
| (ग) |
अभि + आगतम् |
अभ्यागतम् |
| (घ) |
भोजन + अन्ते |
भोजनान्ते |
| (ङ) |
चौरः + अयम् |
चौरोऽयम् |
| (च) |
गृह + अभ्यन्तरे |
गृहाभ्यन्तरे |
| (छ) |
लीलया + एव |
लीलयैव |
| (ज) |
यत् + उक्तम् |
यदुक्तम् |
| (झ) |
प्रबुद्धः + अतिथिः |
प्रबुद्धोऽतिथि: |
प्रश्न 6. प्रत्यय-वर्गीकरणम्
| ल्यप् |
क्त |
क्तवतु |
तुमुन् |
| परिश्रम्य |
प्रस्थितः |
उपार्जितवान् |
दापयितुम् |
| विहाय |
प्रविष्टः |
पृष्ठवान् |
द्रष्टुम् |
| आदाय |
नियुक्तः |
नीतवान् |
क्रोशितुम् |
| समागत्य |
मुदितः |
आदिष्टवान् |
निर्णेतुम् |
प्रश्न 7 (अ). वचनानुसार परिवर्तनम् (एकवचन → बहुवचन)
| क्र. |
एकवचन |
बहुवचन |
| (क) |
स बसयानं विहाय पदातिरेव गन्तुं निश्चयं कृतवान्। |
ते बसयानं विहाय पदातिरेव गन्तुं निश्चयं कृतवन्तः। |
| (ख) |
चौरः ग्रामे नियुक्तः राजपुरुषः आसीत्। |
चौराः ग्रामेषु नियुक्ताः राजपुरुषाः आसन्। |
| (ग) |
कश्चन चौर: गृहाभ्यन्तरं प्रविष्टः। |
केचन चौराः गृहाभ्यन्तरं प्रविष्टाः। |
| (घ) |
अन्येयुः तौ न्यायालये स्व-स्व-पक्षं स्थापितवन्तौ। |
अन्येयुः ते न्यायालये स्व-स्व पक्षान् स्थापितवन्तः। |
प्रश्न 7 (आ). विभक्ति प्रयोग (रिक्त स्थान भरें)
| क्र. |
वाक्य |
सही उत्तर |
| (क) |
सः _______ निष्क्रम्य बहिरगच्छत्। (गृह - पञ्चमी) |
गृहात् |
| (ख) |
गृहस्थः _______ आश्रयं प्रायच्छत्। (अतिथि - चतुर्थी) |
अतिथये |
| (ग) |
तौ _______ प्रति प्रस्थितौ। (न्यायाधिकारिन् - द्वितीया) |
न्यायाधिकारिणं |
| (घ) |
_______ चौर्याभियोगे त्वं वर्षत्रयस्य कारादण्डं लप्स्यसे। (इदम् - सप्तमी) |
अस्मिन् |
| (ङ) |
चौरस्य _______ प्रबुद्धः अतिथिः। (पादध्वनि - तृतीया) |
पादध्वनिना |
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