NCERT Class 10 Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 1 — शुचिपर्यावरणम् Solutions

Sooraj Krishna Shastri
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NCERT Class 10 Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 1 “शुचिपर्यावरणम्” पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को समझाने वाला अत्यंत उपयोगी पाठ है। इस पेज पर आपको इस अध्याय के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (एकपदेन उत्तर, दीर्घ प्रश्न-उत्तर, सन्धि-विच्छेद, पर्यायवाची-विलोम, समास, अव्ययपद, प्रश्ननिर्माण आदि) बिलकुल सरल और परीक्षा-उपयोगी रूप में मिलते हैं।

यहाँ प्रस्तुत अभ्यास-प्रश्नों की तालिकाएँ, सुव्यवस्थित Notes Format, और स्पष्ट व्याकरणिक विश्लेषण छात्रों को अवधारणाएँ समझने में मदद करते हैं। साथ ही, अध्याय का सार, व्याकरणिक बिंदु, मुख्य शब्दार्थ, तथा “शुचि पर्यावरण” विषयक महत्वपूर्ण तथ्य भी जोड़े गए हैं, जो बोर्ड परीक्षाओं और गृहकार्य दोनों के लिए उपयोगी हैं।

यह सामग्री विशेष रूप से उन छात्रों और शिक्षकों के लिए बनाई गई है जिन्हें NCERT संस्कृत पाठ्यपुस्तक Shemushi भाग 2 के अध्याय 1 का एक ही स्थान पर संपूर्ण समाधान चाहिए।

आप इसे अध्ययन नोट्स, असाइनमेंट, टेस्ट की तैयारी, तथा ऑनलाइन लर्निंग के लिए सीधे उपयोग कर सकते हैं।

NCERT Class 10 Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 1 — शुचिपर्यावरणम् Solutions

NCERT Class 10 Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 1 — शुचिपर्यावरणम् Solutions
NCERT Class 10 Sanskrit Shemushi Part 2 Chapter 1 — शुचिपर्यावरणम् Solutions


📘 शुचिपर्यावरणम् —

अभ्यास प्रश्न 


प्रश्न 1 — एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर दें)

क्र. प्रश्न (संस्कृत) उत्तर
(क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्? दुर्वहम्
(ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति? कालायासचक्रम्
(ग) कुत्सितवस्तुमिश्रितं किमस्ति? भक्ष्यम्
(घ) अहं कस्मै जीवनं कामये? मानवाय
(ङ) केषां माला रमणीया? ललितलतानां

प्रश्न 2 — अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

क्र. प्रश्न (संस्कृत) उत्तर
(क) कविः किमर्थं प्रकृतेः शरणम् इच्छति? कविः सुजीवनार्थं प्रकृतेः शरणम् इच्छति।
(ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते? यानानां हि अनन्ताः पङ्कतयः महानगरेषु सन्ति अतः तत्र संसरणं कठिनं वर्तते।
(ग) अस्माकं पर्यावरणे किं किं दूषितम् अस्ति? अस्माकं पर्यावरणे वायुमण्डलं, जलम्, भक्ष्यम्, धरातलं च सर्वं दूषितम् अस्ति।
(घ) कविः कुत्र सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति? कविः एकान्ते कान्तारे सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति।
(ङ) स्वस्थजीवनाय कीदृशे वातावरणे भ्रमणीयम्? स्वस्थजीवनाय खगकुलकलरव-गुञ्जिते, कुसुमावलि-समीरचालिते वातावरणे भ्रमणीयम्।
(च) अन्तिमे पद्यांशे कवेः का कामना अस्ति? अन्तिमे पद्यांशे कवेः मानवेभ्यः शान्तिप्रिय-जीवनस्य कामना अस्ति।

प्रश्न 3 — सन्धिं / सन्धिविच्छेदं कुरुत

क्र. विग्रह पद सन्धि पद / उत्तर
(क) प्रकृतिः + एव प्रकृतिरेव
(ख) स्यात् + न + एव स्यान्नैव
(ग) हि + अनन्ताः ह्यनन्ताः
(घ) बहिः + अन्तः + जगति बहिरन्तर्जगति
(ङ) अस्मात् + नगरात् अस्मान्नगरात्
(च) सम् + चरणम् सञ्चरणम् (फाइल में 'पञ्चरणम्' मुद्रित है)
(छ) धूमम् + मुञ्चति धूमंमुञ्चति

प्रश्न 4 — अव्ययपदों से रिक्त स्थान भरें

(मंजूषा: भृशम्, यत्र, तत्र, अत्र, अपि, एव, सदा, बहिः)

क्र. वाक्य उत्तर
(क) इदानीं वायुमण्डलं ........... प्रदूषितमस्ति। भृशम्
(ख) ........... जीवनं दुर्वहम् अस्ति। अत्र
(ग) प्राकृतिक वातावरणे क्षणं सञ्चरणम् ........... लाभदायकं भवति। अपि
(घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् ........... प्रकृतेः आराधना। एव
(ङ) ........... समयस्य सदुपयोगः करणीयः। सदा
(च) भूकम्पित-समये ........... गमनमेव उचितं भवति। बहिः
(छ) ........... हरीतिमा ........... शुचि पर्यावरणम्। यत्र, तत्र

प्रश्न 5 (अ) — पर्यायपदं लिखत

क्र. शब्द पर्यायपद
(क) सलिलम् जलम्
(ख) आम्रम् रसालम्
(ग) वनम् कान्तारम्
(घ) शरीरम् तनुः
(ङ) कुटिलम् वक्रम्
(च) पाषाणः प्रस्तरः

प्रश्न 5 (आ) — विलोमपदानि लिखत

क्र. शब्द विलोमपद
(क) सुकरम् दुष्करम्
(ख) दूषितम् निर्मलम्
(ग) गृह्णन्ती मुञ्चति
(घ) निर्मलम् दूषितम्
(ङ) दानवाय मानवाय
(च) शान्ताः ध्वानम् (फाइल के अनुसार)

प्रश्न 6 — समस्तपदानि तथा समासः

क्र. विग्रह पदानि समस्तपद समास
(क) मलेन सहितम् समलम् अव्ययीभाव
(ख) हरिताः च ये तरवः हरिततरूणाम् कर्मधारय
(ग) ललिताः च याः लताः ललितलतानाम् कर्मधारय
(घ) नवा मालिका नवमालिका कर्मधारय
(ङ) धृतः सुखसन्देशः येन धृतसुखसन्देशम् बहुब्रीहि
(च) कज्जलम् इव मलिनम् कज्जलमलिनम् कर्मधारय
(छ) दुर्दान्तैः दशनैः दुर्दान्तैर्दशनैः कर्मधारय

प्रश्न 7 — प्रश्ननिर्माणम्

क्र. वाक्य (रेखांकित पद) प्रश्नवाचक शब्द
(क) शकटीयानम् कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति। कीदृशम्
(ख) उद्याने पक्षिणां कलरवं चेतः प्रसादयति। केषाम्
(ग) पाषाणीसभ्यतायां लतातरुगुल्माः प्रस्तरतले पिष्टाः सन्ति। के
(घ) महानगरेषु वाहनानाम् अनन्ताः पङ्कतयः धावन्ति। केषु / कुत्र
(ङ) प्रकृत्याः सन्निधौ वास्तविकं सुखं विद्यते। कस्याः

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