Marakesh Grah in Astrology (मारकेश ग्रह) – How to Identify Death Inflicting Planets in Horoscope

Sooraj Krishna Shastri
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Marakesh Grah in Astrology (मारकेश ग्रह) – How to Identify Death Inflicting Planets in Horoscope

"जानिए ज्योतिष में मारकेश ग्रह (Maraka Planets) कौन से होते हैं। द्वितीयेश, सप्तमेश, पापग्रह और अन्य ग्रहों के मारक प्रभाव, उनकी महादशा-अन्तर्दशा तथा मृत्यु-निर्णय में उनकी भूमिका को विस्तार से समझें।"

मारकेश ग्रह (Mārakeśa Graha) का निर्णय

ज्योतिष शास्त्र में मारकेश वह ग्रह कहलाता है, जिसकी दशा-अन्तर्दशा में जातक की आयु समाप्त होती है अथवा मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। यह नियम विशेष रूप से आयु-निर्णय और मृत्यु-काल की गणना में उपयोगी है। आचार्यों ने इसके निर्णय हेतु एक स्पष्ट वरीयता क्रम (priority order) निर्धारित किया है।

Marakesh Grah in Astrology (मारकेश ग्रह) – How to Identify Death Inflicting Planets in Horoscope
Marakesh Grah in Astrology (मारकेश ग्रह) – How to Identify Death Inflicting Planets in Horoscope



१. मारकेश ग्रह का वरीयता क्रम

आचार्यों के अनुसार निम्न क्रम से यह निर्णय करना चाहिए कि कौन-सा ग्रह मारकेश कहलाएगा—

  1. द्वितीय भाव का स्वामी (Dvitīya Bhāva Svāmī)

    • द्वितीय भाव मरणस्थान माना गया है। इसका स्वामी प्रमुख मारकेश होता है।
  2. सप्तम भाव का स्वामी (Saptama Bhāva Svāmī)

    • सप्तम भाव मारकस्थान कहा गया है। इसलिए इसका स्वामी भी मुख्य मारकेश माना जाता है।
  3. द्वितीय भाव में स्थित पापग्रह (Pāpaghraha in 2nd House)

    • यदि कोई पापग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) द्वितीय भाव में स्थित हो तो वह भी मारकेश की भूमिका निभाता है।
  4. सप्तम भाव में स्थित पापग्रह (Pāpaghraha in 7th House)

    • सप्तम भाव में बैठे पापग्रह भी मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
  5. द्वितीयेश से युत पापग्रह (Conjunction with 2nd Lord)

    • यदि कोई पापग्रह द्वितीय भाव के स्वामी के साथ स्थित हो तो वह भी मारकेश कहलाता है।
  6. सप्तमेश से युत पापग्रह (Conjunction with 7th Lord)

    • सप्तम भाव के स्वामी के साथ जुड़ा पापग्रह भी मारकेश हो जाता है।
  7. व्ययेश से सम्बन्ध रखने वाला पापग्रह (Relation with 12th Lord)

    • व्यय भाव (१२वाँ) हानि और मृत्यु से जुड़ा है। उसका स्वामी या उससे सम्बन्ध रखने वाला पापग्रह भी मारक प्रभाव देता है।
  8. अष्टमेश (8th Lord)

    • अष्टम भाव आयुस्थान है। उसका स्वामी यदि निर्बल या पापग्रही प्रभाव में हो तो मृत्यु का कारण बनता है।
  9. मारकेश ग्रहों के साथ बैठा शनि (Saturn with Maraka Grahas)

    • शनि, विशेषतः मारक भाव में अथवा मारकेश ग्रह के साथ स्थित होकर उसकी शक्ति बढ़ा देता है।
  10. षष्ठेश (6th Lord)

    • षष्ठ भाव शत्रु और रोग का भाव है। उसका स्वामी भी कई बार मारक ग्रह के रूप में कार्य करता है।
  11. कुण्डली का निर्बल ग्रह (Weakest Planet)

    • जो ग्रह अत्यधिक निर्बल हो, वह भी मृत्यु का कारण बन सकता है।
  12. शुभ ग्रह (Benefics)

    • अंततः यदि उपरोक्त ग्रह प्रभावी न हों, तो शुभ ग्रह भी मारक प्रभाव दे सकते हैं, विशेषतः यदि वे मारक स्थानों से सम्बद्ध हों।

२. मारकेश ग्रह का कार्य

  • जिस ग्रह को ऊपर दिए गए क्रम में मारकेश माना गया है, उसी की महादशा (Mahādaśā) में मृत्यु की संभावना अधिक रहती है।
  • यदि उसी महादशा में उसका संबंधित या सधर्मी ग्रह (same natured or associated planet) की अन्तर्दशा (Antardaśā) आ जाए, तो मृत्यु की आशंका और भी प्रबल हो जाती है।

३. विशेष बिंदु

  • मारकेश ग्रह सदैव मृत्यु का कारण बने, यह आवश्यक नहीं है। उसकी दशा में कभी-कभी केवल भारी कष्ट, रोग या विपत्ति भी हो सकती है।
  • यदि जातक की आयु शेष हो तो मारकेश केवल कष्ट देगा, किन्तु यदि आयु समाप्त हो चुकी हो तो वही ग्रह मृत्यु का कारण बनेगा।
  • आयु का निर्णय पहले कर लेना आवश्यक है, तभी मारकेश की दशा को निश्चित रूप से समझा जा सकता है।

मारकेश ग्रह का वरीयता क्रम (Table Form)

क्रमांक मारकेश ग्रह का प्रकार विवरण / भूमिका
1 द्वितीय भाव का स्वामी द्वितीय भाव मरणस्थान कहलाता है, इसका स्वामी प्रमुख मारकेश होता है।
2 सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव मारकस्थान है, उसका स्वामी भी मृत्यु हेतु उत्तरदायी हो सकता है।
3 द्वितीय भाव में स्थित पापग्रह यदि कोई पापग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) द्वितीय भाव में स्थित हो तो मारक प्रभाव देता है।
4 सप्तम भाव में स्थित पापग्रह सप्तम भाव में पापग्रह बैठने से भी मृत्यु का कारण बनता है।
5 द्वितीयेश से युत पापग्रह द्वितीय भाव के स्वामी के साथ स्थित पापग्रह भी मारकेश कहलाता है।
6 सप्तमेश से युत पापग्रह सप्तम भाव के स्वामी के साथ जुड़ा पापग्रह भी मारक हो जाता है।
7 व्ययेश से सम्बन्ध रखने वाला पापग्रह 12वें भाव (हानि, व्यय, मृत्यु) के स्वामी से सम्बन्ध रखने वाला पापग्रह मृत्यु का कारण हो सकता है।
8 अष्टमेश अष्टम भाव आयुस्थान है। इसका स्वामी निर्बल हो तो मृत्यु देता है।
9 मारकेश ग्रहों के साथ बैठा शनि शनि जब मारक ग्रहों के साथ बैठता है, तो उनकी मारक शक्ति को और बढ़ा देता है।
10 षष्ठेश 6वें भाव का स्वामी (रोग-शत्रु भाव) भी मृत्यु का कारण बन सकता है।
11 निर्बल ग्रह जो ग्रह अत्यधिक निर्बल हो, वह भी मारक प्रभाव दे सकता है।
12 शुभ ग्रह अंततः यदि कोई अन्य ग्रह प्रभावी न हो, तो शुभ ग्रह भी मारकेश बन सकता है।

कार्यप्रणाली

  • जब आयु-निर्णय के अनुसार व्यक्ति की आयु समाप्ति के निकट हो, तब ऊपर दिए गए क्रम से जो ग्रह की महादशा चले, वही मारकेश कहलाता है।
  • उसकी अन्तर्दशा में सम्बद्ध ग्रह (संबंधी या सधर्मी) मृत्यु या भारी संकट उत्पन्न करते हैं।

निष्कर्ष

ज्योतिष शास्त्र में मृत्यु-काल का निर्णय अत्यंत सूक्ष्म एवं गूढ़ विषय है। इसमें आयु-निर्णय और मारकेश ग्रह की दशा-अन्तर्दशा दोनों को देखकर ही परिणाम कहा जाता है। इस प्रकार मारकेश का महत्व केवल मृत्यु-काल निर्धारण तक ही नहीं, बल्कि जीवन में आने वाले संकट और रोगों के समय को समझने में भी होता है।

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